: महाकुंभ में 59 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया स्नान: प्रयागराज के लोग ही घरों में बंद, दो महीने से स्कूल बंद, दफ्तर आने-जाने में लगते हैं 5 घंटे
प्रयागराज के 50 वर्षीय विद्यासागर मिश्रा ने कहा...
मेरे जीवन में आज तक कभी भी घर के बाहर सड़क पर जाम नहीं लगा। मैं करीब 50 साल से इस शहर में रह रहा हूं। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि हम पैदल भी घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। अब महाकुंभ का प्रचार बंद कर देना चाहिए और लोगों को यहां आने से रोकना चाहिए। यह सभी के हित में है।
अपनी परेशानी सिर्फ विद्यासागर मिश्र ही नहीं बता रहे, बल्कि अब प्रयागराज में सालों से रह रहे लोग भी खुलकर बोल रहे हैं। जगह-जगह बैरिकेडिंग होने से लोग अपने रोजमर्रा के काम नहीं कर पा रहे हैं। अमृत स्नान खत्म होने के बाद माना जा रहा था कि अब शहर में भीड़ कम होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। रोजाना एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आ रहे हैं। पढ़िए प्रयागराज शहर के लोगों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है... स्कूल बंद, कॉलेज और यूनिवर्सिटी पहुंचने में देरी शहर के लगभग सभी स्कूल बंद हैं। दो महीने से यही स्थिति है।
ऑनलाइन क्लास चल रही हैं। यहां तक कि प्रशासन ने परीक्षा छूटने पर दूसरी तारीख पर कराने की घोषणा की है। छात्र और शिक्षक समय पर कॉलेज और यूनिवर्सिटी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रों का कहना है कि जब तक सही तरीके से कक्षाएं नहीं लगेंगी, सिर्फ स्टडी मैटेरियल से हम कैसे पढ़ाई करेंगे। छात्रा हिमांशी उपाध्याय कहती हैं- मुझे कॉलेज जाने में देर हो जाती है। जाम के कारण कई बच्चे आ भी नहीं रहे हैं। अप्रैल में हमारी परीक्षा है। प्रोफेसर भी समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, हमारी पढ़ाई सफर में है।
ऑटो और ई-रिक्शा नहीं मिल रहे
स्थानीय लोगों को एक और बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें जरूरत पड़ने पर ऑटो और ई-रिक्शा भी नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से वे कहीं जा नहीं पा रहे हैं।
छात्रा जैनब कहती हैं- कई प्रतियोगी परीक्षाएं हो रही हैं, जिनके सेंटर 10 किलोमीटर के अंदर दिए गए हैं। उन सेंटर तक पहुंचने के लिए लोगों को कई साधन बदलने पड़ते हैं। इसके बाद भी कुछ लोग समय पर नहीं पहुंच पाते हैं। साथ ही भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम के कारण डिलीवरी एप भी शहर में सामान नहीं पहुंचा पा रहे हैं। तबीयत खराब होने पर अस्पताल पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। लोगों को इलाज कराने के लिए भी 10 बार सोचना पड़ता है।
अतुल न्यायिक कहते हैं, स्थानीय लोगों के लिए सबसे परेशानी की बात यह है कि वे बाहर नहीं जा पा रहे हैं। न किसी काम से और न ही घूमने-फिरने के लिए। अगर हम बाहर निकल भी पाते हैं तो एक चौराहे से दूसरे चौराहे तक जाने में 4-5 घंटे लग जाते हैं। यह एक बड़ी समस्या है।
अतुल कहते हैं कि शहर में कार लेकर निकलना बहुत मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर तो बाइक चलाना भी मुश्किल हो गया है। यहां के स्थानीय लोग बाहर से आने वाले लोगों के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। जिससे जो बन रहा है, वह मदद कर रहा है।
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जाम और बंद सड़कों की वजह से कारोबार ठप पड़ा है, खरीदार नहीं मिल रहे हैं
दुकानदारों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार सामान न होने की वजह से उन्हें अपनी दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं। अचानक इतनी भीड़ बढ़ने की वजह से दुकानों में सामान खत्म होने की कगार पर है। रोजमर्रा की चीजें दुकानों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इस वजह से ज्यादातर दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने को मजबूर हैं।
दुकानदार धर्मेंद्र त्रिपाठी कहते हैं- 'इतनी भीड़ की वजह से कारोबार में काफी दिक्कत आ रही है। सभी रास्ते सील कर दिए गए हैं, क्योंकि ये गलियां स्टेशन की तरफ जाती हैं। इसकी वजह से आने-जाने में काफी दिक्कत आ रही है। हमें लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। साथ ही सामान लाने में भी काफी दिक्कत आ रही है।'
उनका कहना है कि जो थोड़ा बहुत सामान आ पाता है, उसे पैदल ही लाया जाता है, कोई दूसरा साधन नहीं है। गलियों की शुरुआत में ही बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं, जिससे ग्राहक नहीं आ पा रहे हैं। इस समय सिर्फ 10% कारोबार ही चल रहा है।
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