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: 500 रुपए के लिए कारोबारी ने बेटे को मार डाला: हत्या को आत्महत्या बताने फंदे पर लटकाया, फाइल बंद करने वाली थी पुलिस

MP Mauganj Businessman killed his son for 500 rupees: मध्यप्रदेश के मऊगंज में अनाज व्यापारी ने 500 रुपए के लिए अपने ही बेटे की डंडे से पीटकर और गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या को आत्महत्या दिखाने के लिए उसने शव को फंदे पर लटका दिया। सुबह उसने लोगों और पुलिस के सामने रोने का नाटक भी किया। पुलिस भी इसे आत्महत्या मानकर फाइल बंद करने जा रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि युवक की गला घोंटकर हत्या की गई है। आठ महीने बाद जब मामला सामने आया तो अफसरों की आंखें खुलीं। आनन-फानन में हत्या का केस दर्ज किया गया। पूछताछ में खुला राज पिता से पूछताछ की गई तो वह पहले गुमराह करने लगा। जब सख्ती दिखाई गई तो उसने जुर्म कबूल कर लिया। घटना 7 अप्रैल 2024 की है। 28 दिसंबर को पुलिस ने आरोपी पिता बाबूलाल गुप्ता (45) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त नायलॉन की रस्सी और डंडा भी बरामद कर लिया है। पुलिस ने पीएम रिपोर्ट तक नहीं पढ़ी 7 अप्रैल 2024 को वार्ड क्रमांक 10 निवासी रोहित गुप्ता (20) का शव घर में फंदे से लटका मिला था। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या मानकर मामला दर्ज कर लिया। पूछताछ में परिजनों ने भी किसी पर शक नहीं जताया। पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 7 मई 2024 को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली। बड़ी बात यह है कि पुलिस ने रिपोर्ट पढ़ने की जहमत तक नहीं उठाई और 8 मई को केस बंद करने की फाइल भी तैयार कर ली। MP में लावारिस कब्रिस्तान: कुत्ते नोच रहे शव, हड्डियां चबा गए, कब्रों से शवों को निकाला, जानिए क्या बोले लोग ? खर्च के हिसाब को लेकर हुआ था विवाद आरोपी पिता बाबूलाल गुप्ता ने पुलिस को बताया, 'मेरे दो बेटे और एक बेटी है। बेटा रोहित अनाज बेचने गया था। उसने 6 हजार रुपए का सामान बेचा। इसमें से 500 रुपए उसने दोस्तों के साथ खाने-पीने में खर्च कर दिए। 6 अप्रैल को जब मैंने इन पैसों का हिसाब मांगा तो वह विवाद करने लगा। गुस्से में आकर मैंने उसे डंडे से मारा। उस पर चार बार डंडे मारे, जिससे वह बेहोश हो गया। मैं डर गया था। इसके बाद उसने सफेद नायलॉन की रस्सी से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। किसी को शक न हो, इसलिए हत्या को आत्महत्या दिखाने के लिए शव को कमरे में फंदे पर लटका दिया। अगली सुबह 7 अप्रैल को मैंने शोर मचा दिया कि मेरे बेटे ने फांसी लगा ली है। मैंने घर पर किसी को नहीं बताया।' पुलिस ने भी इसे आत्महत्या का मामला मानकर जांच शुरू कर दी। 7 मई को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद भी उन्होंने रिपोर्ट पढ़े बिना ही केस बंद करने की फाइल तैयार कर ली थी। MP में वन विभाग की टीम पर पथराव VIDEO: डिप्टी रेंजर का सिर फूटा, 40 जेसीबी लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंचा था अमला, जान बचाकर भागे कर्मचारी 8 महीने बाद दर्ज हुआ हत्या का मामला केस की फाइल एसडीओपी अंकिता सुल्या के टेबल पर क्लोजर के लिए पहुंची। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी तो उनके होश उड़ गए। रिपोर्ट में सिर पर भारी वस्तु से वार करने और गला घोंटकर हत्या करने का जिक्र था। आठ महीने बाद 25 दिसंबर को एसडीओपी ने थाने में हत्या का मामला दर्ज कर दोबारा जांच कराई। पिता के घबराने पर गहराया शक मामला दर्ज होने के बाद 27 दिसंबर को पुलिस ने रोहित के पिता बाबूलाल गुप्ता को थाने बुलाया। पीएम रिपोर्ट के बारे में बताया गया। हत्या की बात सुनने के बाद भी पिता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि वह घबरा गया। इस पर पुलिस को शक हुआ। पुलिस ने पिता से पूछताछ शुरू की। वह बरगलाने लगा तो शक पुख्ता हो गया। सख्ती की गई तो उसने पूरी कहानी बता दी। 8 महीने तक किसी को नहीं बताया घटना के समय परिवार के बाकी सदस्य अंदर थे। उन्हें भी इस बात की जानकारी नहीं थी। आरोपी ने भी इसका जिक्र नहीं किया और आठ महीने तक इस राज को दबाए रखा। अब सच्चाई जानकर परिवार के लोग भी हैरान हैं। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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