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: गुनाहगार कौन ?: 3 महीने से राशन नहीं मिला, अन्‍न के अभाव में कंद-मूल-गेठी खाने को मजबूर है आदिवासी परिवार...

MP CG Times

MP CG Times / Tue, Oct 19, 2021

गुनाहगार कौन ?: 3 महीने से राशन नहीं मिला, अन्‍न के अभाव में कंद-मूल-गेठी खाने को मजबूर है आदिवासी परिवार...
गढ़वा. गरीब-गुरबों के कल्‍याण के लिए सरकार के स्‍तर पर दर्जनों योजनाएं चल रही हैं, लेकिन इससे देश मेें सबसे गरीब तबके के बजाय किसी और का कल्‍याण होता प्रतीत होता है. ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि झारखंड के गढ़वा जिले के आदिवासी परिवार की बेबसी भ्रष्‍टतंत्र और लूटतंत्र के क्रूर चेहरे को उजागर कर रहा है. हम तो डूबेंगे सनम तुम को भी ले डूबेंगे: पत्नी से कहासुनी के बाद पति ने अपने घर में लगाई आग, पड़ोस के 10 घर भी जलकर हुए राख  जिले के रंका प्रखंड के आदिवासी बहुल सिरोइकला पंचायत में सरकार की कोई योजना नहीं पहुंच रही है. सरकार की ओर से मिलने वाला मुफ्त अनाज भी यहां के लोगों की पहुंच से दूर है. लिहाजा, खुद को जिंदा रखने के लिए लोग कंद-मूल और गेठी खाने को मजबूर हैं. बताया जाता है कि दशहरा पूजा से पहले 4 महीने के बकाया राशन में से 1 महीने का राशन मिला, लेकिन यह आदिवासी परिवार का पेट भरने के लिए नाकाफी है. सिरोइकला का टिकर चुइया टोला आदिवासी बहुल इलाका है. कहने को तो झारखंड में आदिवासी हितों को ध्‍यान में रखने वाली सरकार बनी है, लेकिन इस गांव की हालत देखकर इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के लोग अपना गुजर-बसर कैसे करते होंगे. इश्क का खौफ़नाक इंतकामः Ex-boyfriend ने पहले लड़की को बुलाया घर, फिर सीने में 7 बार घपा-घप घोंपा चाकू  यहां जंगलों में वास करने वाला कोरवा समुदाय रहता है. इस इलाके में घर तक जाने के लिए न पुल है और न ही सड़क. खाने के लिए न तो राशन है और न ही रहने के लिए पक्‍का मकान. ऐसे में इस पथरीली इलाके में लोग कैसे जीवन बसर करते हैं, इसका बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है. जंगल में रहने वाले आदिवासियों की जमीन पर वन विभाग ने ट्रेंच गाड़ रखा है, जिससे उनके सामने अब रहने को भी लाले पड़ गए हैं. इन आदिवासियों को अब तक न तो आवास मिला है और नही पीने के लिए शुद्ध पानी की व्‍यवस्‍था हो सकी है. हां, केंद्र सरकार की शौचालय योजना की पहुंच इस गांव में जरूर देखी गई. चौंकाने वाली कहानी: पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचा शख्स, एक्सरे रिपोर्ट में सामने आया हैरान करने वाला राज

आदिवासी परिवार पूरी तरह से जंगल पर आश्रित हुए

पिछले 4 माह से इन आदिवासी परिवारों को राशन नहीं मिला है. जब हो-हंगामा हुआ तो दशहरा पूजा से पहले 1 महीने का राशन दिया गया, लेकिन इतना अनाज ज्‍यादा दिनों तक नहीं चल सकता है. अनाज खत्‍म होने पर आदिवासी परिवार पूरी तरह जंगल पर आश्रित हो गया है. लोग जंगलों से कंद-मूल और गेठी लाकर खा रहे हैं. ग्रामीण कहते हैं कि हमलोगों को देखने-सुनने वाला कोई नहीं है. हमलोगों की जमीन छीनी जा रही है और सरकार की योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा है. बीच सड़क पर कत्ल: सिर पर खून सवार हत्यारों ने युवक पर धारदार हथियार से किया वार, भीड़ को आता देख हो गए फरार 

दो महीने से सिस्टम गड़बड़ाया हुआ हैःबीडीओ

इस मामले पर इलाके के बीडीओ ने बताया कि अभी चावल नहीं आ रहा है. दो-तीन महीने से मामला गड़बड़ाया हुआ है. बीडीओ ने प्रभावित परिवारों को तुरंत प्रति व्यक्ति पांच-पांच किेलो चावल देने की बात कही है. उन्‍होंने कहा कि आदिवासी परिवारों को और मदद मिल सके, इसके लिए जिला मुख्‍यालय को रिपोर्ट दी जाएगी. read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001 छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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