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: नशा छीन रहा बच्चों का बचपन: 7 से 16 साल के मासूम ड्रग एडिक्ट, 100 में से 60 भिखारी नशे के आदी पाए गए

MP Indore beggar children found to be drug addicts: एमपी के इंदौर शहर के गरीब तबके और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले 7 से 16 साल के मासूम बच्चे नशे के आदी होते जा रहे हैं। नशे के लिए वे सड़कों पर भीख भी मांग रहे हैं और पैसे नहीं मिलने पर चोरी भी कर रहे हैं। गांजा और चरस के अलावा वे व्हाइटनर, थिनर, तारपीन, पंचर ठीक करने वाले घोल, दर्द निवारक क्रीम, कफ सिरप और पेट्रोल का भी सेवन कर रहे हैं। खास बात यह है कि लड़कों के अलावा कम उम्र की लड़कियां भी ऐसे नशे का सेवन कर रही हैं। जिला प्रशासन के भिखारी मुक्त अभियान में मुक्त कराए गए बच्चों की जांच में यह बात सामने आई है। भीख मांगने से मुक्त कराए गए करीब 100 मासूम बच्चों में से 60 से ज्यादा नशे की हालत में मिले। कुछ बच्चों के चेस्ट एक्सरे करवाए और विशेषज्ञों से जांच करवाई। कुछ बच्चों के चेस्ट में इंफेक्शन भी पाया गया। झुग्गी-झोपड़ियों के अलावा यह भी सामने आया है कि शहर के बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ई-सिगरेट और हुक्का जैसे नशीले पदार्थ मिल रहे हैं। 15 इलाकों की झुग्गियों में नशा जिला परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा के अनुसार बॉम्बे बाजार, चंदन नगर, मच्छी बाजार, अहीरखेड़ी, हवा बंगले के पास नाथ मोहल्ला, मूसाखेड़ी, निरंजनपुर, द्वारकापुरी, प्रजापत नगर, खजराना, गुसाखेड़ी, चोइथराम मंडी, कनाड़ा, गांधी नगर समेत अन्य इलाकों की झुग्गियों के आसपास 7 से 16 साल के बच्चे नशे की हालत में मिले। कुछ बच्चों के परिजन या रिश्तेदार उन्हें नशा देकर भीख मंगवाते मिले। बाथरूम के नल के पानी से बना खाना: डॉक्टरों को खिलाया गया, MP के इस मेडिकल कॉलेज का है यह कारनामा केस 1 13 साल की बच्ची से 100 ग्राम गांजा मिला। 56 दुकान इलाके से कुछ दिन पहले भीख मांगते हुए 13 साल की बच्ची को छुड़ाया गया था। बचाव दल ने जब उसे पकड़ा तो वह बहुत नशे में थी। उसके पास करीब 100 ग्राम गांजा मिला। वह अपने घर का पता भी नहीं बता पा रही थी। कुछ महीने पहले लोक बिरादरी संस्था ने 16 साल के एक लड़के को बचाया था। वह थिनर, व्हाइटनर, अल्प्राजोलम, मारिजुआना का आदी था। केस 2 पंचर रिपेयर ट्यूब का इस्तेमाल कर ड्रग्स लेती मिली लड़कियां कनाडा इलाके में 10 और 12 साल की दो लड़कियों को बचाया गया, वे चौराहे के पास भीख मांग रही थीं। जब टीम ने उन्हें पकड़ा तो उनकी दोनों आंखें पूरी तरह लाल थीं, वे ठीक से बोल भी नहीं पा रही थीं। उनके पास कपड़े के छोटे-छोटे पैकेट मिले। इनमें पंचर टायर ठीक करने वाला घोल बड़ी मात्रा में था और वे उसे सूंघकर ड्रग्स ले रही थीं। केस 3 भाई-बहन दोनों एक साथ नशा कर रहे थे टीम ने अहीरखेड़ी में रहने वाले 10 वर्षीय बालक और उसकी 8 वर्षीय बहन को राजबाड़ा के पास किशनपुरा पुल से भीख मांगते हुए छुड़ाया। दोनों के पास से पंचर ठीक करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉल्यूशन की ट्यूब, पानी की छोटी बोतल में थिनर और कपड़े की पोटली बरामद हुई। पूछताछ में दोनों ने टीम को बताया कि वे समूह में नशा करते हैं। यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है। ...और इधर बड़े स्कूलों के बच्चों तक भी पहुंच रही ई-सिगरेट गरीब तबके और झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों के अलावा बड़े स्कूलों के बच्चों तक भी नशा पहुंच रहा है। सहोदय ग्रुप ऑफ सीबीएसई स्कूल्स के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि ज्यादातर स्कूलों में समय-समय पर बच्चों के स्कूल बैग की जांच की जाती है। शिक्षकों और प्राचार्यों का कहना है कि कई बार बैग में ई-सिगरेट और हुक्का जैसी चीजें मिलती हैं। कई बार बड़ी मात्रा में नकदी भी मिलती है। दूसरे शहरों और गांवों से पढ़ने आने वाले बच्चे हॉस्टल में रहते हैं, उनके आसपास भी नशा कराने वाले गिरोह सक्रिय रहते हैं। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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