: नशा छीन रहा बच्चों का बचपन: 7 से 16 साल के मासूम ड्रग एडिक्ट, 100 में से 60 भिखारी नशे के आदी पाए गए
15 इलाकों की झुग्गियों में नशा
जिला परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा के अनुसार बॉम्बे बाजार, चंदन नगर, मच्छी बाजार, अहीरखेड़ी, हवा बंगले के पास नाथ मोहल्ला, मूसाखेड़ी, निरंजनपुर, द्वारकापुरी, प्रजापत नगर, खजराना, गुसाखेड़ी, चोइथराम मंडी, कनाड़ा, गांधी नगर समेत अन्य इलाकों की झुग्गियों के आसपास 7 से 16 साल के बच्चे नशे की हालत में मिले। कुछ बच्चों के परिजन या रिश्तेदार उन्हें नशा देकर भीख मंगवाते मिले।
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केस 1
13 साल की बच्ची से 100 ग्राम गांजा मिला। 56 दुकान इलाके से कुछ दिन पहले भीख मांगते हुए 13 साल की बच्ची को छुड़ाया गया था। बचाव दल ने जब उसे पकड़ा तो वह बहुत नशे में थी। उसके पास करीब 100 ग्राम गांजा मिला। वह अपने घर का पता भी नहीं बता पा रही थी। कुछ महीने पहले लोक बिरादरी संस्था ने 16 साल के एक लड़के को बचाया था। वह थिनर, व्हाइटनर, अल्प्राजोलम, मारिजुआना का आदी था।
केस 2
पंचर रिपेयर ट्यूब का इस्तेमाल कर ड्रग्स लेती मिली लड़कियां
कनाडा इलाके में 10 और 12 साल की दो लड़कियों को बचाया गया, वे चौराहे के पास भीख मांग रही थीं। जब टीम ने उन्हें पकड़ा तो उनकी दोनों आंखें पूरी तरह लाल थीं, वे ठीक से बोल भी नहीं पा रही थीं। उनके पास कपड़े के छोटे-छोटे पैकेट मिले। इनमें पंचर टायर ठीक करने वाला घोल बड़ी मात्रा में था और वे उसे सूंघकर ड्रग्स ले रही थीं।
केस 3
भाई-बहन दोनों एक साथ नशा कर रहे थे
टीम ने अहीरखेड़ी में रहने वाले 10 वर्षीय बालक और उसकी 8 वर्षीय बहन को राजबाड़ा के पास किशनपुरा पुल से भीख मांगते हुए छुड़ाया। दोनों के पास से पंचर ठीक करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉल्यूशन की ट्यूब, पानी की छोटी बोतल में थिनर और कपड़े की पोटली बरामद हुई। पूछताछ में दोनों ने टीम को बताया कि वे समूह में नशा करते हैं। यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है।
...और इधर बड़े स्कूलों के बच्चों तक भी पहुंच रही ई-सिगरेट
गरीब तबके और झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों के अलावा बड़े स्कूलों के बच्चों तक भी नशा पहुंच रहा है। सहोदय ग्रुप ऑफ सीबीएसई स्कूल्स के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि ज्यादातर स्कूलों में समय-समय पर बच्चों के स्कूल बैग की जांच की जाती है। शिक्षकों और प्राचार्यों का कहना है कि कई बार बैग में ई-सिगरेट और हुक्का जैसी चीजें मिलती हैं। कई बार बड़ी मात्रा में नकदी भी मिलती है। दूसरे शहरों और गांवों से पढ़ने आने वाले बच्चे हॉस्टल में रहते हैं, उनके आसपास भी नशा कराने वाले गिरोह सक्रिय रहते हैं।
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