: अनूपपुर में जज के घर अटैक केस में एक्शन: हाईकोर्ट से SP को फटकार, थाना प्रभारी समेत 3 सस्पेंड, पढ़िए पुलिस की सुस्ती और सवाल
अनूपपुर जिले के कोतमा में 25 अक्टूबर की रात न्यायिक व्यवस्था की गरिमा को ध्वस्त करने वाली घटना हुई। न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी अमनदीप सिंह छाबड़ा के शासकीय आवास पर हमलावरों ने पथराव किया। गाली-गलौज की और उन्हें जान से मारने की धमकी तक दे डाली। सरकारी घर में तोड़फोड़ की गई। यह सब कुछ तब हुआ जब कानून-व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा उन्हीं पुलिसकर्मियों पर था, जिन्हें बाद में निलंबित करना पड़ा।
यह घटना सिर्फ एक आवास पर हमला नहीं थी; यह न्यायपालिका पर खुलेआम हमला था। इससे भी गंभीर बात यह रही कि इसकी सूचना मिलते ही पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया न सिर्फ धीमी रही, बल्कि लापरवाही भी साफ झलकी। यही वजह थी कि मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और फिर शुरू हुआ कार्रवाई का सिलसिला।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आई पुलिस
घटना के बाद भालूमाड़ा थाना प्रभारी संजय खलको को पहले ही लाइन अटैच किया जा चुका था, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेकर अनूपपुर पुलिस अधीक्षक मोती उर्र रहमान को तलब किया। उनकी मौजूदगी में कड़ी फटकार लगाई। न्यायपालिका पर हमले को लेकर कोर्ट की नाराजगी साफ थी—और यह नाराजगी सीधे पुलिस की लापरवाही पर गिरी।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद गिरी गाज
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ही गुरुवार रात तीन पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी। थाना प्रभारी संजय खलको, प्रधान आरक्षक सुरेंद्र शर्मा, और सहायक उपनिरीक्षक रविशंकर गुप्ता तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र अनूपपुर संबद्ध कर दिया गया।
निलंबन अवधि में नियमों के मुताबिक इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, लेकिन यह प्रशासनिक कार्रवाई साफ संकेत देती है कि न्यायपालिका पर हमला किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।

क्या हुआ था 25 अक्टूबर की रात?
रात के अंधेरे में अज्ञात हमलावर न्यायिक मजिस्ट्रेट अमनदीप सिंह छाबड़ा के भालूमाड़ा स्थित आवास के बाहर पहुंचे।
उन्होंने एक-एक कर पथराव शुरू किया। खिड़कियां तोड़ी गईं, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। वहीं दूसरी ओर न्यायाधीश को गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी तक दी गई।
यह घटना किसी सामान्य व्यक्ति के नहीं, बल्कि न्यायपालिका के अधिकारी के साथ हुई—और यह तथ्य अपने आप में बताता है कि अपराधी कितने बेखौफ थे।
गश्त में कोताही और FIR में देरी—दोहरी लापरवाही
SP मोती उर्र रहमान ने आदेश जारी करते हुए साफ लिखा कि:
- सहायक उपनिरीक्षक रविशंकर गुप्ता
- प्रधान आरक्षक सुरेंद्र शर्मा
—दोनों अपनी रात्रि गश्त ड्यूटी में न सिर्फ लापरवाह थे, बल्कि सजगता का न्यूनतम स्तर भी नहीं दिखा पाए।
यह हमला उनकी ड्यूटी में हुई गंभीर चूक का प्रत्यक्ष परिणाम माना गया है।
दूसरी ओर, थाना प्रभारी संजय खलको के ऊपर आरोप और भी गंभीर हैं: उन्होंने घटना के बाद तुरंत FIR दर्ज नहीं की,
न ही अपराधियों पर नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई की।
SP ने इसे मध्य प्रदेश पुलिस रेगुलेशन के नियम 64(2) का सीधा उल्लंघन बताया है। यह नियम बताता है कि किसी भी गंभीर अपराध पर तत्पर और वैधानिक कार्रवाई करना थाना प्रभारी की अनिवार्य जिम्मेदारी है—जो कि इस मामले में नहीं निभाई गई।

हाईकोर्ट की सख्ती से साफ—न्यायपालिका पर हमले को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा
इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए केवल यही काफी है कि हाईकोर्ट को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। कोर्ट ने जिस तरह से फटकार लगाई, उससे स्पष्ट है कि यह सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि न्यायपालिका की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली स्थिति थी।
इन आरोपियों ने किया था हमला, बेल नहीं देने पर हमला
जानकारी के मुताबिक पुलिस ने हमला के आरोप में प्रियांशू सिंह ऊर्फ जेगू यादव, देवेंद्र केवट ऊर्फ सोनू, मनिकेश ऊर्फ सूतन को गिरफ्तार किया है। भालूमाड़ा के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि जज ने प्रियांशू सिंह को मारमीट मामले में बेल नहीं दी थी। वहीं ADJ कोर्ट से जमानत मिलने के बाद धमकी और तोड़फोड़ की थी।
बता दें कि कोतमा के जज अमनदीप सिंह छाबड़ा के घर पर पत्थराव के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के अंदर प्रियांशु सिंह उर्फ जेगू यादव, देवेंद्र केवट उर्फ सोनू, मनीकेश उर्फ सूतन को गिरफ्तार कर लिया था। ये सभी आरोपी भालूमाड़ा के रहने वाले हैं।
प्रियांशु सिंह को मारमीट मामले में कोतमा के जज अमनदीप सिंह छाबड़ा ने बेल नहीं दी थी। आरोपियों को एक सप्ताह के बाद एडीजे कोर्ट से जमानत मिल गई थी। इसके बाद उन्होंने जज के घर पर पत्थराव किया था।
स्पष्ट संदेश: लापरवाही पर अब जीरो टॉलरेंस
न्यायपालिका के आवास पर हमला न सिर्फ कानून-व्यवस्था की नाकामी थी, बल्कि यह दिखाता है कि अपराधी कितने निडर हो चुके हैं। हाईकोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया और उसके बाद SP की कार्रवाई अब यह संदेश दे रही है कि:
- गश्त में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी
- FIR में देरी अब कोई विकल्प नहीं

Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS
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