Logo
Breaking News Exclusive
सिर्फ 35 हजार में डील, विदेश में नौकरी का ऑफर; जानिए फायरिंग कराने में पर्दे के पीछे कौन? Are Social Media Narratives Replacing Facts? मांस बेचने के लिए की थी हत्या; मुख्य आरोपी, उसकी पत्नी-बेटी समेत 11 गिरफ्तार, कोर्ट के बाहर भीड़ ने आरोपियों को पीटा अवैध रेत रोकने पर माफिया ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से मारी टक्कर, गाड़ी क्षतिग्रस्त; ड्राइवर और मालिक गिरफ्तार CM का भतीजा, BJP विधायक कमेटी मेंबर; 12 हिरासत में, लेकिन रसूखदारों को आंच तक नहीं? ग्वालियर में 29 घायल, 7 की हालत गंभीर; SP की मौजूदगी में नो-एंट्री में ट्रक को किसने दी परमीशन ? MP में 20,00 में किराये का डॉक्टर, डिजिटल सिग्नेचर तक बेच रहे; सिंडिकेट में मंत्री का करीबी भी महिला की 100 Deepfake फोटो बनाईं, फ्री AI टूल से हटाए कपड़े; चीन-हॉन्गकॉन्ग से चल रहा नेटवर्क विप्रो में 200 रुपए का टारगेट; शेयर में 6% से ज्यादा तेजी; Wipro Share Hike Details Yes Bank Share 17.79 रुपए पर आया; Citi ने घटाया टारगेट, जानिए इसकी वजह ? सिर्फ 35 हजार में डील, विदेश में नौकरी का ऑफर; जानिए फायरिंग कराने में पर्दे के पीछे कौन? Are Social Media Narratives Replacing Facts? मांस बेचने के लिए की थी हत्या; मुख्य आरोपी, उसकी पत्नी-बेटी समेत 11 गिरफ्तार, कोर्ट के बाहर भीड़ ने आरोपियों को पीटा अवैध रेत रोकने पर माफिया ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से मारी टक्कर, गाड़ी क्षतिग्रस्त; ड्राइवर और मालिक गिरफ्तार CM का भतीजा, BJP विधायक कमेटी मेंबर; 12 हिरासत में, लेकिन रसूखदारों को आंच तक नहीं? ग्वालियर में 29 घायल, 7 की हालत गंभीर; SP की मौजूदगी में नो-एंट्री में ट्रक को किसने दी परमीशन ? MP में 20,00 में किराये का डॉक्टर, डिजिटल सिग्नेचर तक बेच रहे; सिंडिकेट में मंत्री का करीबी भी महिला की 100 Deepfake फोटो बनाईं, फ्री AI टूल से हटाए कपड़े; चीन-हॉन्गकॉन्ग से चल रहा नेटवर्क विप्रो में 200 रुपए का टारगेट; शेयर में 6% से ज्यादा तेजी; Wipro Share Hike Details Yes Bank Share 17.79 रुपए पर आया; Citi ने घटाया टारगेट, जानिए इसकी वजह ?

जगह कैंपस में थी, तो भवन 300 मीटर दूर क्यों बनाया ? : गरियाबंद में 13 कमरों की ड्राइंग के बाद बने सिर्फ 9 कमरे; 48.48 लाख की सीक्रेट कहानी जानिए

गरियाबंद में 13 कमरों की ड्राइंग के बाद बने सिर्फ 9 कमरे; 48.48 लाख की सीक्रेट कहानी जानिए

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में छात्राओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त आवासीय सुविधा देने के लिए स्वीकृत भवन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

नियमानुसार विद्यालय के कैंपस में ग्राउंड फ्लोर पर 6 अतिरिक्त कक्ष बनाए जाने थे, लेकिन निर्माण एजेंसी हाउसिंग बोर्ड ने ड्राइंग में बदलाव कर भवन को विद्यालय कैंपस से करीब 300 मीटर दूर दूसरे शैक्षणिक भवन की पहली मंजिल पर बनवा दिया। आरोप है कि नए डिजाइन में 13 कमरे प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन निर्माण के बाद यहां केवल 9 कमरे बनाए गए।

देवभोग और मैनपुर के कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में स्कूल शिक्षा विभाग के तहत अतिरिक्त आवासीय कक्षों के निर्माण के लिए 48.48-48.48 लाख रुपए के भवन स्वीकृत किए थे। प्रदेश कार्यालय ने निर्माण की जिम्मेदारी एजेंसी के तौर पर हाउसिंग बोर्ड को दी थी।

प्रबंध समिति का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने विद्यालय की वास्तविक जरूरत और उपलब्ध जगह को नजरअंदाज कर ड्राइंग-डिजाइन में बदलाव किया और इसके बाद भी निर्माण स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप नहीं कराया।

कैंपस में जगह दिखाई, फिर 300 मीटर दूर बदली लोकेशन

निर्माण का उद्देश्य कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं को अतिरिक्त आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना था। वर्तमान भवन में छात्राओं की संख्या बढ़ने के कारण अतिरिक्त कक्षों की जरूरत बताई गई थी। इसके लिए देवभोग विद्यालय प्रबंधन ने अपने कैंपस में पर्याप्त जगह भी उपलब्ध कराई थी।

प्रबंध समिति के मुताबिक, नियमानुसार ग्राउंड फ्लोर में 6 कक्ष बनाए जाने थे। हालांकि हाउसिंग बोर्ड ने मूल ड्राइंग में बदलाव कर दिया। आरोप है कि नए डिजाइन में लागत भी करीब 4 लाख रुपए कम कर दी गई और भवन को विद्यालय के मुख्य कैंपस में बनाने के बजाय करीब 300 मीटर दूर स्थित शैक्षणिक भवन की पहली मंजिल पर बनवा दिया गया।

डिजाइन बदलकर 13 कमरे किए, निर्माण में बने सिर्फ 9

प्रबंध समिति का कहना है कि ड्राइंग में बदलाव के बाद भवन में 13 कमरों का डिजाइन तैयार किया गया था। लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद वहां 9 कमरे ही बनाए गए। आरोप है कि जिस भवन के ऊपर अतिरिक्त निर्माण किया गया, वहां पहले से ही कॉलम खड़े थे। इन्हीं पुराने कॉलम पर लैपिंग कर नया भवन तैयार किया गया।

प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह यादव और पालकों का आरोप है कि कमरों की संख्या घटाने के साथ पुराने कॉलम का इस्तेमाल कर निर्माण लागत में भी बचत की गई। उनका कहना है कि लाखों रुपए की लागत से बने भवन में छात्राओं के रहने की मूल जरूरत ही पूरी नहीं हो पा रही है, ऐसे में यह भवन अनुपयोगी साबित हो सकता है।

निर्माण पूरा होने के बाद हैंडओवर को लेकर दबाव

निर्माण पूरा होने के बाद भवन को विभाग को हैंडओवर लेने के लिए हाउसिंग बोर्ड और ठेका कंपनी की ओर से दबाव बनाए जाने का भी आरोप है। मैनपुर कस्तूरबा विद्यालय की अधीक्षिका ने भवन का हैंडओवर ले लिया, जबकि देवभोग की अधीक्षिका ने हैंडओवर लेटर में भवन की कमियों और व्यावहारिक समस्याओं का उल्लेख किया।

देवभोग की अधीक्षिका के इस पत्र से निर्माण की स्थिति और भवन के उपयोग को लेकर विभाग के उच्च अधिकारियों को भी जानकारी मिली। इसके बाद मामले में मार्गदर्शन मांगा गया है।

300 मीटर दूर भवन में छात्राओं को रखना मुश्किल

प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह यादव और पालकों का कहना है कि निर्माण एजेंसी ने जो भी किया, लेकिन छात्राओं की सुविधा और सुरक्षा के साथ समझौता नहीं होना चाहिए था। उनका कहना है कि नया भवन विद्यालय के मुख्य कैंपस से करीब 300 मीटर दूर है। ऐसी स्थिति में छात्राओं को वहां आवासीय सुविधा देना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है।

पालकों का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा और पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि दूर बने भवन को ही आवासीय उपयोग में लेना है तो वहां छात्राओं के रहने के लिए जरूरी नया सेटअप स्वीकृत किया जाए, ताकि वे सुरक्षित तरीके से रहकर अध्ययन कर सकें।

विभाग के इंजीनियर बोले- ड्राइंग देखकर बता पाऊंगा

मामले में विभाग के इंजीनियर नितेश कुमार ने कहा कि भवन का निर्माण ड्राइंग के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई कमी है तो ड्राइंग देखकर ही उसके बारे में बता पाएंगे।

डीएमसी बोले- प्रदेश कार्यालय से हुई मॉनिटरिंग

गरियाबंद के डीएमसी शिवेश शुक्ला ने कहा कि भवन की मंजूरी से लेकर निर्माण की मॉनिटरिंग तक की प्रक्रिया प्रदेश कार्यालय से हुई है। हैंडओवर लेने की बारी आने पर अधीक्षिका ने मार्गदर्शन मांगा था।

उन्होंने कहा कि मौके पर अधीक्षिका ही रहती हैं, इसलिए उन्हें भवन की वास्तविक स्थिति लिखकर हैंडओवर लेने के लिए कहा गया था। अधीक्षिका के पत्र से जानकारी मिली कि भवन में 13 के बजाय 9 कमरे हैं। इसके अलावा संचालन से जुड़ी अन्य व्यावहारिक दिक्कतों का भी पत्र में उल्लेख किया गया है। इस संबंध में राज्य कार्यालय को अवगत कराकर मार्गदर्शन मांगा गया है।

Tags :

Gariaband Kasturba School

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन