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: आरक्षण पर रार: CM भूपेश ने कहा- विरोध पर भी राज्यपाल का ईगो सेटिस्फाई किया, विधानसभा से बड़ा है विधिक सलाहकार?

News Desk

News Desk / Sun, Dec 25, 2022

आरक्षण पर रार: CM भूपेश ने कहा- विरोध पर भी राज्यपाल का ईगो सेटिस्फाई किया, विधानसभा से बड़ा है विधिक सलाहकार?

सीएम भूपेश और राज्यपाल अनुसुइया उईके।

सीएम भूपेश और राज्यपाल अनुसुइया उईके। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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छत्तीसगढ़ में आरक्षण को लेकर सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। अब यह राजभवन बनाम कांग्रेस हो गया है। इसे लेकर अब कांग्रेस सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही है। संभवत: प्रदेश में ऐसा पहली होगा, जब राजभवन के विरोध में सरकार प्रदर्शन करेगी। वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी राजभवन और राज्यपाल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि, राज्यपाल आरक्षण को टालने का बहाना ढूंढ रही हैं।

यह भी पढ़ें...आरक्षण विधेयक अटका: राज्यपाल ने कहा- कानूनी सलाह के बाद ही कर पाऊंगी हस्ताक्षर, अब उपचुनाव के बाद फैसला

वैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में हुई मीटिंग के बाद बाहर निकले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से कहा कि, विधानसभा का जो अधिकार हैं, क्या राज्यपाल का विधिक सलाहकार उससे भी बड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ठीक कहते थे कि वैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। वैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और नीचा दिखाने का यह जीता जागता उदाहरण है। 

राज्यपाल की जिद पर सवालों के जवाब दिए
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, विधिक सलाहकार को कोई अधिकार नहीं है। सारे अधिकारी मेरी इस बात के विरोध में थे कि राज्यपाल ने जो 10 सवाल भेजे हैं उनका जवाब देना है। संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था है ही नहीं। CM ने कहा कि, फिर भी मैंने राज्यपाल की जिद को ध्यान में रखते हुए कि पौने तीन करोड़ जनता के लिए आरक्षण लागू हो जाए। उनको लाभ मिले, ये सोचकर जवाब भेजे।

कांग्रेस तीन जनवरी को करेगी महारैली
राज्यपाल का जो ईगो है, वह सटिसफाई हो जाए। फिर से बहाना ढूंढ रहीं कि परीक्षण कराएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि, कौन करेगा परीक्षण? विधिक सलाहकार को ही खोज लेते हैं, जो विधानसभा से भी बड़ा हो गया है।  कहा कि, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट परीक्षण करती है। वह काम विधिक सलाहकार करेगी। इसी के चलते आरक्षण संशोधन विधेयक रुक रहा है। यह बेहद दुर्भाग्यजनक है। इसके विरोध में कांग्रेस 3 जनवरी को महारैली करेगी। 
यह भी पढ़ें...Chhattisgarh : विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित, SC, ST, OBC का बढ़ा, पर EWS का छह फीसदी हुआ कम

3 दिसंबर को विधानसभा में पारित हुआ था विधेयक
अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण संशोधन विधेयक और शैक्षणिक संस्था प्रवेश के लिए संशोधन विधेयक तीन दिसंबर को पारित हुआ है। इन दोनों विधेयकों में आदिवासी वर्ग-को 32%, अनुसूचित जाति-को 13 और अन्य पिछड़ा वर्गको 27 फीसदी आरक्षण तय हुआ है। सामान्य वर्ग के गरीबों को 4 फीसदी आरक्षण देने का भी प्रस्ताव है। इसको मिलाकर छत्तीसगढ़ में 76% आरक्षण हो जाएगा। 

पिछड़ा वर्ग के 27 फीसदी पर फंसा पेंच
राज्यपाल अनुसूईया उइके अन्य पिछड़ा वर्ग वर्ग को दिये गये 27% आरक्षण की वजह से आरक्षण विधेयकों पर हस्ताक्षर करने से हिचक रही हैं। राज्यपाल ने पहले मीडिया से बातचीत में कहा, मैंने केवल आदिवासी वर्ग का आरक्षण बढ़ाने के लिए सरकार को विशेष सत्र बुलाने का सुझाव दिया था। उन्होंने सबका बढ़ा दिया। अब जब कोर्ट ने 58% आरक्षण को अवैधानिक कह दिया है तो 76% आरक्षण का बचाव कैसे करेगी सरकार।

विस्तार

छत्तीसगढ़ में आरक्षण को लेकर सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। अब यह राजभवन बनाम कांग्रेस हो गया है। इसे लेकर अब कांग्रेस सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही है। संभवत: प्रदेश में ऐसा पहली होगा, जब राजभवन के विरोध में सरकार प्रदर्शन करेगी। वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी राजभवन और राज्यपाल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि, राज्यपाल आरक्षण को टालने का बहाना ढूंढ रही हैं।

यह भी पढ़ें...आरक्षण विधेयक अटका: राज्यपाल ने कहा- कानूनी सलाह के बाद ही कर पाऊंगी हस्ताक्षर, अब उपचुनाव के बाद फैसला

वैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में हुई मीटिंग के बाद बाहर निकले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से कहा कि, विधानसभा का जो अधिकार हैं, क्या राज्यपाल का विधिक सलाहकार उससे भी बड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ठीक कहते थे कि वैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। वैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और नीचा दिखाने का यह जीता जागता उदाहरण है। 


राज्यपाल की जिद पर सवालों के जवाब दिए
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, विधिक सलाहकार को कोई अधिकार नहीं है। सारे अधिकारी मेरी इस बात के विरोध में थे कि राज्यपाल ने जो 10 सवाल भेजे हैं उनका जवाब देना है। संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था है ही नहीं। CM ने कहा कि, फिर भी मैंने राज्यपाल की जिद को ध्यान में रखते हुए कि पौने तीन करोड़ जनता के लिए आरक्षण लागू हो जाए। उनको लाभ मिले, ये सोचकर जवाब भेजे।

कांग्रेस तीन जनवरी को करेगी महारैली
राज्यपाल का जो ईगो है, वह सटिसफाई हो जाए। फिर से बहाना ढूंढ रहीं कि परीक्षण कराएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि, कौन करेगा परीक्षण? विधिक सलाहकार को ही खोज लेते हैं, जो विधानसभा से भी बड़ा हो गया है।  कहा कि, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट परीक्षण करती है। वह काम विधिक सलाहकार करेगी। इसी के चलते आरक्षण संशोधन विधेयक रुक रहा है। यह बेहद दुर्भाग्यजनक है। इसके विरोध में कांग्रेस 3 जनवरी को महारैली करेगी। 

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3 दिसंबर को विधानसभा में पारित हुआ था विधेयक
अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण संशोधन विधेयक और शैक्षणिक संस्था प्रवेश के लिए संशोधन विधेयक तीन दिसंबर को पारित हुआ है। इन दोनों विधेयकों में आदिवासी वर्ग-को 32%, अनुसूचित जाति-को 13 और अन्य पिछड़ा वर्गको 27 फीसदी आरक्षण तय हुआ है। सामान्य वर्ग के गरीबों को 4 फीसदी आरक्षण देने का भी प्रस्ताव है। इसको मिलाकर छत्तीसगढ़ में 76% आरक्षण हो जाएगा। 

पिछड़ा वर्ग के 27 फीसदी पर फंसा पेंच
राज्यपाल अनुसूईया उइके अन्य पिछड़ा वर्ग वर्ग को दिये गये 27% आरक्षण की वजह से आरक्षण विधेयकों पर हस्ताक्षर करने से हिचक रही हैं। राज्यपाल ने पहले मीडिया से बातचीत में कहा, मैंने केवल आदिवासी वर्ग का आरक्षण बढ़ाने के लिए सरकार को विशेष सत्र बुलाने का सुझाव दिया था। उन्होंने सबका बढ़ा दिया। अब जब कोर्ट ने 58% आरक्षण को अवैधानिक कह दिया है तो 76% आरक्षण का बचाव कैसे करेगी सरकार।


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