Logo
Breaking News Exclusive
Chhindwara Accident की 15 Photos, हाथ कटकर अलग, लाशों का ढेर, देखिए तड़पती-बिलखती तस्वीरें छिंदवाड़ा में 10 लोगों की मौत, हाथ कटकर अलग, आंखों के सामने तड़प-तड़पकर गई जान, चीखें गूंजती रहीं राजिम में बच्चों की पढ़ाई छूटी, कॉपी-किताबें जलीं, आंखों में अब भी खौफ जिंदा, पढ़िए 1 फरवरी की इनसाइड स्टोरी गरियाबंद में दीवार में छिपाया हाथी का दांत; जानिए खुदाई से कैसे खुला सीक्रेट राज ? MP Petrol Crisis 2026, Petrol Shortage या Panic Buying, अफवाह से कैसे मची भगदड़ ? MP Petrol Crisis 2026, 58.8 करोड़ लीटर पेट्रोल स्टॉक के बावजूद क्यों मची भगदड़, पूरी इनसाइड स्टोरी Investment Tips March 2026, आज इन शेयर्स पर रखें नजर, चेक करिए लिस्ट ! Sensex में 900 अंक की तेजी, Nifty भी 300 अंक चढ़ा; पढ़िए Share Market Update Lockdown in India 2026, ‘Lockdown due to War’ क्यों हो रहा ट्रेंड; जानिए पूरा सच डॉक्टर ने पत्नी को जिंदा जलाकर मार डाला, 2-2 लाख में किराए के किलर भी बुलाए Chhindwara Accident की 15 Photos, हाथ कटकर अलग, लाशों का ढेर, देखिए तड़पती-बिलखती तस्वीरें छिंदवाड़ा में 10 लोगों की मौत, हाथ कटकर अलग, आंखों के सामने तड़प-तड़पकर गई जान, चीखें गूंजती रहीं राजिम में बच्चों की पढ़ाई छूटी, कॉपी-किताबें जलीं, आंखों में अब भी खौफ जिंदा, पढ़िए 1 फरवरी की इनसाइड स्टोरी गरियाबंद में दीवार में छिपाया हाथी का दांत; जानिए खुदाई से कैसे खुला सीक्रेट राज ? MP Petrol Crisis 2026, Petrol Shortage या Panic Buying, अफवाह से कैसे मची भगदड़ ? MP Petrol Crisis 2026, 58.8 करोड़ लीटर पेट्रोल स्टॉक के बावजूद क्यों मची भगदड़, पूरी इनसाइड स्टोरी Investment Tips March 2026, आज इन शेयर्स पर रखें नजर, चेक करिए लिस्ट ! Sensex में 900 अंक की तेजी, Nifty भी 300 अंक चढ़ा; पढ़िए Share Market Update Lockdown in India 2026, ‘Lockdown due to War’ क्यों हो रहा ट्रेंड; जानिए पूरा सच डॉक्टर ने पत्नी को जिंदा जलाकर मार डाला, 2-2 लाख में किराए के किलर भी बुलाए

किडनी की बीमारी से उठी 133वीं अर्थी : सुपेबेड़ा के शख्स ने एम्स में तोड़ा दम, डायलिसिस फिस्टुला हो गया था ब्लॉक, अभी भी 40 से ज्यादा मरीज

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा गांव में किडनी बीमारी से जुड़ी मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 49 वर्षीय प्रेमजय क्षेत्रपाल की एम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई। वे पिछले पांच वर्षों से पेरिटोनियल डायलिसिस पद्धति के जरिए घर पर ही डायलिसिस करा रहे थे।

Supebeda man dies at AIIMS: परिजनों के अनुसार, करीब 20 दिन पहले पेट में लगा डायलिसिस फिस्टुला ब्लॉक हो गया था, जिससे रोजाना होने वाली डायलिसिस प्रक्रिया रुक गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें एक सप्ताह पहले एम्स में भर्ती कराया गया।

वहां डॉक्टरों ने वैकल्पिक डायलिसिस के लिए हाथ में फिस्टुला बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की, लेकिन सहमति न मिलने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश साहू ने मौत की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि मृतक के परिवार में पहले भी कई लोग किडनी बीमारी से जान गंवा चुके हैं।

गांव में अब भी 40 से ज्यादा मरीज, आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल

पंचायत स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2005 से अब तक सुपेबेड़ा में 133 लोगों की मौत किडनी बीमारी से हो चुकी है। हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में यह संख्या 70 से 80 के बीच बताई जाती है।

Supebeda man dies at AIIMS

गांव में अभी भी 40 से अधिक किडनी रोगी मौजूद हैं, जिनमें से तीन का इलाज एम्स में चल रहा है। कई मरीज अन्य राज्यों में इलाज कराने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीमारी को लेकर भय का माहौल है और कई लोग अब नियमित जांच कराने से भी बच रहे हैं। पिछले दो वर्षों से गांव में किसी विशेषज्ञ मेडिकल टीम द्वारा स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाए जाने की भी शिकायत है।

स्वास्थ्य सुविधाएं अधूरी, योजनाएं लंबित

सुपेबेड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति तो मिल चुकी है, लेकिन भवन का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। गांव के लिए स्वीकृत डायलिसिस मशीन भी इंस्टॉल नहीं की जा सकी है। स्वीकृत दो डॉक्टरों में से वर्तमान में केवल एक ही पदस्थ है, जबकि नेफ्रोलॉजी जैसी विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। स्थानीय लोग लंबे समय से बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ पानी की मांग कर रहे हैं।

सुपेबेड़ा क्यों चर्चा में रहता है?

गरियाबंद का सुपेबेड़ा गांव पिछले कई वर्षों से “किडनी प्रभावित गांव” के रूप में चर्चा में रहा है। यहां बड़ी संख्या में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के मामले सामने आते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ समय-समय पर पानी की गुणवत्ता, जीवनशैली और अन्य पर्यावरणीय कारणों की जांच की जरूरत बताते रहे हैं।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन