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: Children Death Case: मेडिकल कॉलेज अधीक्षक पद से हटाए गए, शिशु रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ निलंबित

News Desk

News Desk / Mon, Dec 12, 2022

Children Death Case: मेडिकल कॉलेज अधीक्षक पद से हटाए गए, शिशु रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ निलंबित

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज का एमसीएच अस्पताल।

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज का एमसीएच अस्पताल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज में एक सप्ताह पहले चार बच्चों की मौत मामले में गाज गिरनी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह को पदमुक्त कर दिया है। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश विश्वकर्मा और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू एक्का को निलंबित कर दिया है। डॉ. लखन सिंह की जगह अस्थाई रूप से डॉक्टर आर्या को अधीक्षक बनाया गया है। 

यह भी पढ़ें...Children Death Case: स्वास्थ्य सचिव के नेतृत्व में जांच टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची, 48 घंटे में देनी है रिपोर्ट

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि, राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंह देव चिकित्सा महाविद्यालय संबंध चिकित्सालय अंबिकापुर में पांच दिसंबर को शिशु रोग विभाग में गंभीर अवस्था में नवजात शिशु भर्ती थे। इस दौरान डॉ. कमलेश प्रसाद विश्वकर्मा रात्रि ड्यूटी के दौरान अस्पताल में उपस्थित नहीं थे। न ही भर्ती शिशुओं के उपचार के लिए कोई ठोस पहल की। उनकी लापरवाही से अस्पताल में भर्ती शिशुओं की मृत्यु हुई। 
 

यह भी पढ़ें...Children Death Case: सिंहदेव बोले- 48 घंटे में दोषियों पर होगी कार्रवाई, भाजपा ने दिखाए काले झंडे, फूंका पुतला

प्रसव में लापरवाही पर स्त्री रोग विशेषज्ञ का निलंबन
वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू एक्का को प्रसूता और उसके बच्चे की मौत के चलते निलंबित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि, प्रतापपुर से 29 नवंबर को रेफर की गई सुबुकतारा पत्नी इजराफिल की हाई रिस्क प्रेगनेंसी थी। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद भी डॉ. मंजू ने अपने दायित्व और कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया। जांच में सामने आया कि डॉक्टर की ओर से लापरवाही के चलते दोनों की जान चली गई। 

यह भी पढ़ें...Chhattisgarh: अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के SNCU में 2 घंटे बिजली गुल, 4 बच्चों की मौत, अफसर बोले- मशीनें चालू थीं

अभी और कार्रवाई संभावित
लगातार लापरवाही की शिकायतों से भड़के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने यह इशारा किया है कि अभी और कार्रवाई संभावित है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर से बेहतर कोआर्डिनेशन के लिए डॉक्टर रेलवानी भी असिस्टेंट एमएस व इंचार्ज ऑफ एमसीएच बनाए गए हैं। घटना तिथि को अवकाश पर होने के कारण डॉक्टर रेलवानी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

यह भी पढ़ें...Children Death Case: भाजपा की जांच टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची, कहा- ऑन कॉल ड्यूटी पर नहीं थे डॉक्टर

सोमवार को भाजपा के जांच दल ने किया था निरीक्षण
मामले को लेकर सोमवार को भाजपा की जांच टीम अस्पताल पहुंची। पूर्व राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम के नेतृत्व में 5 सदस्य टीम ने अलग-अलग बिंदुओं पर मौजूदा स्टॉफ और अस्पताल प्रबंधन से चर्चा की। इसके अलावा भाजपा जांच टीम ने यहां मौजूद बच्चों के परिजनों से भी बात की और अस्पताल की व्यवस्था का हाल जाना। भाजपा जांच दल ने भी व्यवस्था पर असंतोष जताया था।

विस्तार

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज में एक सप्ताह पहले चार बच्चों की मौत मामले में गाज गिरनी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह को पदमुक्त कर दिया है। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश विश्वकर्मा और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू एक्का को निलंबित कर दिया है। डॉ. लखन सिंह की जगह अस्थाई रूप से डॉक्टर आर्या को अधीक्षक बनाया गया है। 

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चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि, राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंह देव चिकित्सा महाविद्यालय संबंध चिकित्सालय अंबिकापुर में पांच दिसंबर को शिशु रोग विभाग में गंभीर अवस्था में नवजात शिशु भर्ती थे। इस दौरान डॉ. कमलेश प्रसाद विश्वकर्मा रात्रि ड्यूटी के दौरान अस्पताल में उपस्थित नहीं थे। न ही भर्ती शिशुओं के उपचार के लिए कोई ठोस पहल की। उनकी लापरवाही से अस्पताल में भर्ती शिशुओं की मृत्यु हुई। 
 

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प्रसव में लापरवाही पर स्त्री रोग विशेषज्ञ का निलंबन
वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू एक्का को प्रसूता और उसके बच्चे की मौत के चलते निलंबित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि, प्रतापपुर से 29 नवंबर को रेफर की गई सुबुकतारा पत्नी इजराफिल की हाई रिस्क प्रेगनेंसी थी। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद भी डॉ. मंजू ने अपने दायित्व और कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया। जांच में सामने आया कि डॉक्टर की ओर से लापरवाही के चलते दोनों की जान चली गई। 

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अभी और कार्रवाई संभावित
लगातार लापरवाही की शिकायतों से भड़के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने यह इशारा किया है कि अभी और कार्रवाई संभावित है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर से बेहतर कोआर्डिनेशन के लिए डॉक्टर रेलवानी भी असिस्टेंट एमएस व इंचार्ज ऑफ एमसीएच बनाए गए हैं। घटना तिथि को अवकाश पर होने के कारण डॉक्टर रेलवानी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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सोमवार को भाजपा के जांच दल ने किया था निरीक्षण
मामले को लेकर सोमवार को भाजपा की जांच टीम अस्पताल पहुंची। पूर्व राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम के नेतृत्व में 5 सदस्य टीम ने अलग-अलग बिंदुओं पर मौजूदा स्टॉफ और अस्पताल प्रबंधन से चर्चा की। इसके अलावा भाजपा जांच टीम ने यहां मौजूद बच्चों के परिजनों से भी बात की और अस्पताल की व्यवस्था का हाल जाना। भाजपा जांच दल ने भी व्यवस्था पर असंतोष जताया था।


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