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: Shahdol: सवालों के घेरे में मजदूर की मौत, बेसहारा परिवार के सामने खदान प्रबंधन की मनमानी, जानें पूरा मामला

News Desk / Fri, Dec 2, 2022


खदान में मजदूर मौत

खदान में मजदूर मौत - फोटो : अमर उजाला

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शहडोल जिले के एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र में संचालित बंगवार भूमिगत कोयला खदान में जेएमएस के ठेका कर्मी टीकम सिंह (32) की मशीन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। घटना बुधवार करीब 7 बजे की है। मजदूर की मौत के बाद बंगवार खदान में गहमा-गहमी का माहौल रहा।

बता दें कि ग्राम अरझुली निवासी टीकम की मौके पर ही मौत हो गई थी। फिर भी उसे सेंट्रल हास्पिटल न ले जाकर मेडिकल कॉलेज शहडोल ले जाया गया, आखिर क्यों? वहीं, मृतक के साथ मौजूद साथी मजदूरों को बुढ़ार से वापस लौटा दिया गया, इस पर भी सवाल उठ रहा है।

परिवार का इकलौता सहारा था मृतक...
मृतक टीकम सिंह की करीब तीन साल की बच्ची है। परिवार में बुजुर्ग मां और पत्नी हैं। टीकम घर का अकेला कमाने वाला था, उसके पिता की मौत टीकम के जन्म से पहले हो गई थी। पूरा घर बेसहारा हो चुका है, घटना के बाद पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, घर और गांव वालों का आरोप है कि कॉलरी प्रबंधन टीकम की मौत को अस्पताल में होना बताकर मामले को दबाने में लगी है। क्योंकि जब मौत को अस्पताल में होना बताया जाएगा तो मुआवजा राशि मिलने से पहले ही अड़चन लग गया रहेगा।

वहीं, प्रबंधन का कहना है कि अभी मृतक के परिवार को त्वरित तौर पर बीस हजार रुपये की मुआवजा राशि दी गई है और एक महीने के अंदर सभी तरह की मुआवजा राशि उपलब्ध करा दी जाएंगी। घर के किसी एक सदस्य को बतौर निविदा श्रमिक नौकरी भी दी जाएगी। इस पर घर वालों का कहना है कि टीकम की मौत के बाद हमारा पूरा घर ही उजड़ चुका है, प्रबंधन नौकरी किसे देगी?

उत्पादन के आगे सुरक्षा को दरकिनार...
बंगवार खदान में बीते अप्रैल में भी खदान धसकने की एक बड़ी दुर्घटना हुई थी। गनीमत थी की कोई मजदूर उसकी चपेट में नहीं आया था। अब यह घटना भी प्रबंधन की जल्दबाजी, लापरवाही और उत्पादन की गलाकाट प्रतियोगिता का नतीजा बताई जा रही है। कोयलांचल में चर्चा है कि इस मामले में प्रबंधन की ओर से खदान के भीतर हुई मौत को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जब प्रबंधन का यही रवैया है तो ठेका कंपनी जेएमएस की भूमिका का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ठेका मजदूर के साथ काम करने वाले प्रत्यक्षदर्शी मजदूरों ने प्रबंधन की लापरवाही से मौत की बात कही है।

विस्तार

शहडोल जिले के एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र में संचालित बंगवार भूमिगत कोयला खदान में जेएमएस के ठेका कर्मी टीकम सिंह (32) की मशीन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। घटना बुधवार करीब 7 बजे की है। मजदूर की मौत के बाद बंगवार खदान में गहमा-गहमी का माहौल रहा।

बता दें कि ग्राम अरझुली निवासी टीकम की मौके पर ही मौत हो गई थी। फिर भी उसे सेंट्रल हास्पिटल न ले जाकर मेडिकल कॉलेज शहडोल ले जाया गया, आखिर क्यों? वहीं, मृतक के साथ मौजूद साथी मजदूरों को बुढ़ार से वापस लौटा दिया गया, इस पर भी सवाल उठ रहा है।

परिवार का इकलौता सहारा था मृतक...
मृतक टीकम सिंह की करीब तीन साल की बच्ची है। परिवार में बुजुर्ग मां और पत्नी हैं। टीकम घर का अकेला कमाने वाला था, उसके पिता की मौत टीकम के जन्म से पहले हो गई थी। पूरा घर बेसहारा हो चुका है, घटना के बाद पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, घर और गांव वालों का आरोप है कि कॉलरी प्रबंधन टीकम की मौत को अस्पताल में होना बताकर मामले को दबाने में लगी है। क्योंकि जब मौत को अस्पताल में होना बताया जाएगा तो मुआवजा राशि मिलने से पहले ही अड़चन लग गया रहेगा।

वहीं, प्रबंधन का कहना है कि अभी मृतक के परिवार को त्वरित तौर पर बीस हजार रुपये की मुआवजा राशि दी गई है और एक महीने के अंदर सभी तरह की मुआवजा राशि उपलब्ध करा दी जाएंगी। घर के किसी एक सदस्य को बतौर निविदा श्रमिक नौकरी भी दी जाएगी। इस पर घर वालों का कहना है कि टीकम की मौत के बाद हमारा पूरा घर ही उजड़ चुका है, प्रबंधन नौकरी किसे देगी?


उत्पादन के आगे सुरक्षा को दरकिनार...
बंगवार खदान में बीते अप्रैल में भी खदान धसकने की एक बड़ी दुर्घटना हुई थी। गनीमत थी की कोई मजदूर उसकी चपेट में नहीं आया था। अब यह घटना भी प्रबंधन की जल्दबाजी, लापरवाही और उत्पादन की गलाकाट प्रतियोगिता का नतीजा बताई जा रही है। कोयलांचल में चर्चा है कि इस मामले में प्रबंधन की ओर से खदान के भीतर हुई मौत को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जब प्रबंधन का यही रवैया है तो ठेका कंपनी जेएमएस की भूमिका का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ठेका मजदूर के साथ काम करने वाले प्रत्यक्षदर्शी मजदूरों ने प्रबंधन की लापरवाही से मौत की बात कही है।

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