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: Politics: भारत जोड़ो यात्रा में कमलनाथ और दिग्विजय के बीच क्यों रहे मतभेद, जानिए क्या है वजह

News Desk / Mon, Dec 5, 2022


भारत जोड़ो यात्रा

भारत जोड़ो यात्रा - फोटो : सोशल मीडिया

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कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत को जोड़ने निकले राहुल गांधी को मध्यप्रदेश में बड़े नेताओं की गुटबाजी ने चिंता में डाल दिया। हमेशा एक दूसरे की मदद करने वाले कमलनाथ यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह से उखड़े-उखड़े रहे। यात्रा की लिए गठित टीम और रूट सहित कई मुद्दों पर दोनों के बीच मदभेद उभरे, जिसे राहुल गांधी भी भांप गए थे।

मध्यप्रदेश की सीमा के डोंगरपुर गांव की सभा में राहुल ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को गले मिलवाकर दूरियां मिटाने की कोशिश की। राहुल अपनी कोशिश मेें कितने सफल होते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन प्रदेश की सफल मानी जाने वाली राजनीतिक जोड़ी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का इस तरह एक दूसरे से खफा हो जाना चर्चा का विषय है।

दिग्विजय चाहते थे पीडि़त परिवारों से मिलवाना...
प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के रूट को लेकर नाथ और सिंह समर्थकों में मतभेद थे। बुरहानपुर सर्किट हाउस में यात्रा से पहले हुई बैठक में यह लगभग तय हो गया था कि राहुल गांधी खरगोन में दंगे के प्रभावित मुस्लिम परिवारों से भी मिलेंगे। कांग्रेस नेता अरुण यादव और दिग्विजय सिंंह इस पक्ष में थे। खरगोन विधायक रवि जोशी यादव के विरोधी माने जाते हैं, उन्हें भी इस मामले में दोनों ने विश्वास में नहीं लिया। यदि राहुल खरगोन वाला रूट अपनाते तो वहां वोटों का ध्रुवीकरण होने का खतरा रहता। इस तर्क का हवाला देकर कमलनाथ समर्थक ने इसका विरोध किया तो सिंह ने विधायक रवि जोशी को लेकर टिप्पणी कर दी। बाद मेें कमलनाथ ने अपना प्रभाव दिखाकर खरगोन के बजाए यात्रा का रूट बड़वाह, सनावद और बलवाड़ा रखवाया।

कमेटी में सिंह समर्थकों की भरमार से कमल नाथ थेे खफा...
भारत जोड़ो यात्रा की व्यवस्था के लिए जो कमेटी बनाई गई। उसमें दिग्विजय सिंह ने अपने ज्यादा समर्थकों को रखकर यात्रा का श्रेय लेने की कोशिश की। सिंह समर्थक पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, जीतू पटवारी भी यात्रा में सक्रिय रहे। पटवारी तो मध्यप्रदेश में पूरी यात्रा के दौरान राहुल के करीब रहने की कोशिश करते नजर आए। अपने समर्थकों को कमेटी में कम महत्व मिलने से भी कमलनाथ खफा थे। मीडिया समन्वय की टीम में शामिल रहे नाथ समर्थकों ने भी सिंह को 12 दिन हुई पत्रकार वार्ताओं में ज्यादा तवज्जों नहीं दी।

शुक्ला की कथा में भी नहीं जाने दिया राहुल को
कमलनाथ से जुड़े विधायक संजय शुक्ला चाहते थे कि राहुल गांधी इंदौर मेें विश्राम के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में भी शामिल हों, लेकिन बताते हैं कि सिंह ने राहुल को कथा को लेकर अपना फीड बैक दिया। इसके बाद राहुल भी कथा में नहीं गए। इंदौर में सक्रिय रहने के बजाए सिंह समर्थक सिंह के प्रभाव वाले सुसनेर में उनके बेटे जयवर्धन सिंह के साथ यात्रा में भीड़ जुटाने में सक्रिय रहे। यात्रा के अंतिम दिन दिग्विजय सिंह कांग्रेस की बैठक मेें शामिल होने के लिए दिल्ली गए थे। तब नाथ ने बुखार होने के बावजूद काफी सक्रियता दिखाई और राहुल के साथ रहे। मध्यप्रदेश में हुई अंतिम सभा में राहुल ने नाथ और सिंह को अपने पास बुलवाया और कहा था कि पहले आप दोनों गले मिलिए। इसके बाद राहुल गांधी राजस्थान के लिए रवाना हो गए।

विस्तार

कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत को जोड़ने निकले राहुल गांधी को मध्यप्रदेश में बड़े नेताओं की गुटबाजी ने चिंता में डाल दिया। हमेशा एक दूसरे की मदद करने वाले कमलनाथ यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह से उखड़े-उखड़े रहे। यात्रा की लिए गठित टीम और रूट सहित कई मुद्दों पर दोनों के बीच मदभेद उभरे, जिसे राहुल गांधी भी भांप गए थे।

मध्यप्रदेश की सीमा के डोंगरपुर गांव की सभा में राहुल ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को गले मिलवाकर दूरियां मिटाने की कोशिश की। राहुल अपनी कोशिश मेें कितने सफल होते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन प्रदेश की सफल मानी जाने वाली राजनीतिक जोड़ी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का इस तरह एक दूसरे से खफा हो जाना चर्चा का विषय है।

दिग्विजय चाहते थे पीडि़त परिवारों से मिलवाना...
प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के रूट को लेकर नाथ और सिंह समर्थकों में मतभेद थे। बुरहानपुर सर्किट हाउस में यात्रा से पहले हुई बैठक में यह लगभग तय हो गया था कि राहुल गांधी खरगोन में दंगे के प्रभावित मुस्लिम परिवारों से भी मिलेंगे। कांग्रेस नेता अरुण यादव और दिग्विजय सिंंह इस पक्ष में थे। खरगोन विधायक रवि जोशी यादव के विरोधी माने जाते हैं, उन्हें भी इस मामले में दोनों ने विश्वास में नहीं लिया। यदि राहुल खरगोन वाला रूट अपनाते तो वहां वोटों का ध्रुवीकरण होने का खतरा रहता। इस तर्क का हवाला देकर कमलनाथ समर्थक ने इसका विरोध किया तो सिंह ने विधायक रवि जोशी को लेकर टिप्पणी कर दी। बाद मेें कमलनाथ ने अपना प्रभाव दिखाकर खरगोन के बजाए यात्रा का रूट बड़वाह, सनावद और बलवाड़ा रखवाया।

कमेटी में सिंह समर्थकों की भरमार से कमल नाथ थेे खफा...
भारत जोड़ो यात्रा की व्यवस्था के लिए जो कमेटी बनाई गई। उसमें दिग्विजय सिंह ने अपने ज्यादा समर्थकों को रखकर यात्रा का श्रेय लेने की कोशिश की। सिंह समर्थक पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, जीतू पटवारी भी यात्रा में सक्रिय रहे। पटवारी तो मध्यप्रदेश में पूरी यात्रा के दौरान राहुल के करीब रहने की कोशिश करते नजर आए। अपने समर्थकों को कमेटी में कम महत्व मिलने से भी कमलनाथ खफा थे। मीडिया समन्वय की टीम में शामिल रहे नाथ समर्थकों ने भी सिंह को 12 दिन हुई पत्रकार वार्ताओं में ज्यादा तवज्जों नहीं दी।


शुक्ला की कथा में भी नहीं जाने दिया राहुल को
कमलनाथ से जुड़े विधायक संजय शुक्ला चाहते थे कि राहुल गांधी इंदौर मेें विश्राम के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में भी शामिल हों, लेकिन बताते हैं कि सिंह ने राहुल को कथा को लेकर अपना फीड बैक दिया। इसके बाद राहुल भी कथा में नहीं गए। इंदौर में सक्रिय रहने के बजाए सिंह समर्थक सिंह के प्रभाव वाले सुसनेर में उनके बेटे जयवर्धन सिंह के साथ यात्रा में भीड़ जुटाने में सक्रिय रहे। यात्रा के अंतिम दिन दिग्विजय सिंह कांग्रेस की बैठक मेें शामिल होने के लिए दिल्ली गए थे। तब नाथ ने बुखार होने के बावजूद काफी सक्रियता दिखाई और राहुल के साथ रहे। मध्यप्रदेश में हुई अंतिम सभा में राहुल ने नाथ और सिंह को अपने पास बुलवाया और कहा था कि पहले आप दोनों गले मिलिए। इसके बाद राहुल गांधी राजस्थान के लिए रवाना हो गए।

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