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: Ujjain: चारधाम फोरलेन से महाकाल लोक को जोड़ेगा पैदल ब्रिज, 200 मीटर लंबा और सात मीटर चौड़ा होगा

News Desk / Sat, Jan 7, 2023


पैदल पुल निर्माण के लिए डाली गई मिट्टी।

पैदल पुल निर्माण के लिए डाली गई मिट्टी। - फोटो : Amar Ujala Digital

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महाकाल विस्तारीकरण योजना के तहत रुद्रसागर के बड़े भाग पर पैदल ब्रिज बनेगा। यह ब्रिज चारधाम फोरलेन से महाकाल लोक को जोड़ेगा। इसके निर्माण से पहले मिट्टी का आधार बनकर तैयार हो गया है। इसके साथ ही पोल निर्माण के लिए खुदाई की जा रही है। महाकाल विस्तारीकरण योजना के दूसरे चरण में रुद्रसागर का विकास भी शामिल है।

रुद्रसागर के बड़े भाग पर चारधाम मंदिर वाली फोरलेन से महाकाल लोक को जोड़ने के लिए बीच में पैदल ब्रिज बनाने की योजना है। यहां 200 मीटर लंबा और सात मीटर चौड़ा पैदल ब्रिज बनना है। अधिकारियों के अनुसार ब्रिज का काम अगले साल बारिश से पूर्व करना है। इसके लिए रुद्रसागर का जलस्तर कम करने के बाद ब्रिज निर्माण स्थल पर मिट्टी का आधार बनाया गया है। रुद्रसागर का पानी दो भागों में बंट गया है। काम पूरा होने के बाद मिट्टी के आधार को हटा दिया जाएगा।

अतिक्रमण हटाए गए
ब्रिज के लिए पोल बनाने के लिए निर्माण स्थल पर खुदाई शुरू हो गई है। ऐसे में फिलहाल रुद्रसागर का बड़ा भाग दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। पोल की खुदाई करने से पहले यहां की मिट्टी का परीक्षण भी हो चुका है। दूसरे चरण में रुद्रसागर विकास के साथ-साथ अन्य कार्य भी शुरू हुए हैं। हाल ही में बड़ा गणेश मंदिर के समीप वाली गली के 13 मकानों के अतिक्रमणों को भी हटाया गया है। यहां से हरसिद्धि की पाल तक सड़क चौड़ीकरण होना है। इससे पहले महाराजवाड़ा स्कूल के सामने दुकानों के नौ अतिक्रमण भी हटाए गए थे।

ऐसा बनेगा ब्रिज
स्मार्ट सिटी ने इस पुल को बनाने के पहले कई तरह के ब्रिज के डिजाइन और निर्माण शैली को लेकर मंथन किया। पुल के कारण मंदिर की सुंदरता पर कोई असर न हो तथा वह ज्यादा सुविधाजनक भी रहे, इसके लिए अंतत: आरसीसी ब्रिज बनाने पर सहमति हुई है। यह ब्रिज 200 मीटर लंबा और सात मीटर चौड़ा होगा। इसकी भुजाएं कंक्रीट के साथ पत्थरों से सजाई जाएंगी। पुल की ऊंचाई इतनी होगी कि उसके कारण हरसिद्धि-चारधाम मार्ग से भी महाकाल मंदिर का शिखर दिखाई दे सकेगा।

ब्रिज से यह सुविधा होगी
यात्री पैदल आ-जा सकेंगे, इसके मंदिर के पास भीड़ जल्दी कम होगी। आपात स्थिति में पुल पर से आपदा राहत वाहनों का आवागमन हो सकेगा। मध्य भाग 6 मीटर से ज्यादा चौड़ा और अंडाकार होगा। यहां पर वाटर कर्टन शो, लेजर शो देखने के लिए भी यात्री रुक सकेंगे।

यह भी जानिए
रुद्रसागर का कैचमेंट एरिया 238 हेक्टेयर का है। इसमें जल संग्रहण पहले 31 हेक्टेयर में होता था, लेकिन अब 17 हेक्टेयर में हो रहा है। उपग्रहीय चित्रों, एसआरटीएम डेटा के अध्ययन से पता चला है कि शिप्रा नदी, पुरातनकाल में गऊघाट-रुद्रसागर से होती हुई रामघाट से उत्तरी तट से होकर बहती थी। वर्तमान में यह गऊघाट-भूखी माता मंदिर, नृसिंह घाट होते हुए रामघाट होकर बहती है। शिप्रा नदी का भूवैज्ञानिक गतिविधियों के कारण रास्ता बदल गया है। पुरातत्व एवं ऐतिहासिक प्रमाणों में रुद्रसागर के जल से आचमन करने का जिक्र है।

विस्तार

महाकाल विस्तारीकरण योजना के तहत रुद्रसागर के बड़े भाग पर पैदल ब्रिज बनेगा। यह ब्रिज चारधाम फोरलेन से महाकाल लोक को जोड़ेगा। इसके निर्माण से पहले मिट्टी का आधार बनकर तैयार हो गया है। इसके साथ ही पोल निर्माण के लिए खुदाई की जा रही है। महाकाल विस्तारीकरण योजना के दूसरे चरण में रुद्रसागर का विकास भी शामिल है।

रुद्रसागर के बड़े भाग पर चारधाम मंदिर वाली फोरलेन से महाकाल लोक को जोड़ने के लिए बीच में पैदल ब्रिज बनाने की योजना है। यहां 200 मीटर लंबा और सात मीटर चौड़ा पैदल ब्रिज बनना है। अधिकारियों के अनुसार ब्रिज का काम अगले साल बारिश से पूर्व करना है। इसके लिए रुद्रसागर का जलस्तर कम करने के बाद ब्रिज निर्माण स्थल पर मिट्टी का आधार बनाया गया है। रुद्रसागर का पानी दो भागों में बंट गया है। काम पूरा होने के बाद मिट्टी के आधार को हटा दिया जाएगा।

अतिक्रमण हटाए गए
ब्रिज के लिए पोल बनाने के लिए निर्माण स्थल पर खुदाई शुरू हो गई है। ऐसे में फिलहाल रुद्रसागर का बड़ा भाग दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। पोल की खुदाई करने से पहले यहां की मिट्टी का परीक्षण भी हो चुका है। दूसरे चरण में रुद्रसागर विकास के साथ-साथ अन्य कार्य भी शुरू हुए हैं। हाल ही में बड़ा गणेश मंदिर के समीप वाली गली के 13 मकानों के अतिक्रमणों को भी हटाया गया है। यहां से हरसिद्धि की पाल तक सड़क चौड़ीकरण होना है। इससे पहले महाराजवाड़ा स्कूल के सामने दुकानों के नौ अतिक्रमण भी हटाए गए थे।

ऐसा बनेगा ब्रिज
स्मार्ट सिटी ने इस पुल को बनाने के पहले कई तरह के ब्रिज के डिजाइन और निर्माण शैली को लेकर मंथन किया। पुल के कारण मंदिर की सुंदरता पर कोई असर न हो तथा वह ज्यादा सुविधाजनक भी रहे, इसके लिए अंतत: आरसीसी ब्रिज बनाने पर सहमति हुई है। यह ब्रिज 200 मीटर लंबा और सात मीटर चौड़ा होगा। इसकी भुजाएं कंक्रीट के साथ पत्थरों से सजाई जाएंगी। पुल की ऊंचाई इतनी होगी कि उसके कारण हरसिद्धि-चारधाम मार्ग से भी महाकाल मंदिर का शिखर दिखाई दे सकेगा।


ब्रिज से यह सुविधा होगी
यात्री पैदल आ-जा सकेंगे, इसके मंदिर के पास भीड़ जल्दी कम होगी। आपात स्थिति में पुल पर से आपदा राहत वाहनों का आवागमन हो सकेगा। मध्य भाग 6 मीटर से ज्यादा चौड़ा और अंडाकार होगा। यहां पर वाटर कर्टन शो, लेजर शो देखने के लिए भी यात्री रुक सकेंगे।

यह भी जानिए
रुद्रसागर का कैचमेंट एरिया 238 हेक्टेयर का है। इसमें जल संग्रहण पहले 31 हेक्टेयर में होता था, लेकिन अब 17 हेक्टेयर में हो रहा है। उपग्रहीय चित्रों, एसआरटीएम डेटा के अध्ययन से पता चला है कि शिप्रा नदी, पुरातनकाल में गऊघाट-रुद्रसागर से होती हुई रामघाट से उत्तरी तट से होकर बहती थी। वर्तमान में यह गऊघाट-भूखी माता मंदिर, नृसिंह घाट होते हुए रामघाट होकर बहती है। शिप्रा नदी का भूवैज्ञानिक गतिविधियों के कारण रास्ता बदल गया है। पुरातत्व एवं ऐतिहासिक प्रमाणों में रुद्रसागर के जल से आचमन करने का जिक्र है।


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