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: Indore News: मालवा-निमाड़ के 90 नेताओं के पास गुजरात की 37 सीटों की जिम्मेदारी थी, 34 पर भाजपा को मिली जीत

News Desk / Thu, Dec 8, 2022


पूर्व विधायक जीतू जिराती को दी गई थी बड़ी जिम्मेदारी।

पूर्व विधायक जीतू जिराती को दी गई थी बड़ी जिम्मेदारी। - फोटो : amar ujala digital

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गुजरात में मिली बम्पर सफलता से भाजपा उत्साहित है। खासकर मध्यप्रदेश भाजपा के वह नेता जिन्हें गुजरात भेजा गया था। मालवा-निमाड़ के 90 नेताओं को गुजरात में 37 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। यह नेता गुजरात में दो महीने डेरा डाले रहे। कार्यकर्ताओं से लेकर मतदाताओं के बीच घुल-मिल गए थे। गुजरात भाजपा ने भी इन नेताओं के फीडबैक को महत्व दिया और उसके हिसाब से इन 37 सीटों पर चुनावी रणनीति तैयार की गई। इसका परिणाम यह रहा कि 37 में से 34 सीटें भाजपा की झोली में आ गई।

गुजरात के हर विधानसभा चुनाव में प्रदेश के नेताओं की मदद ली जाती है। खासकर उन इलाकों में जो मध्यप्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं। खासकर मध्यप्रदेश के झाबुुआ, आलीराजपुर क्षेत्र के कई आदिवासी परिवारों का गुजरात से करीब का नाता है। गुजरात के पांच जिलों में अक्सर प्रदेश के आदिवासी युवा काम की तलाश में जाते हैं। 

जीतू जिराती को दी गई थी जिम्मेदारी
गुजरात चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा होने से पहले ही मालवा-निमाड़ के 90 नेताओं को गुजरात के 37 विधानसभा क्षेत्रों में भेजा गया था। इनमें पूर्व विधायक, प्रवक्ता, पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य समेत अन्य नेता आदि शामिल थे। गुजरात के पांच जिलों का प्रभारी पूर्व विधायक जीतू जिराती को बनाया गया था। हर विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दो नेताओं को दी गई थी। वेे मंडल से लेकर बूथ स्तर तक स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनावी तैयारियों में जुटे रहे। जिराती के अनुसार पंचमहल, गोधरा, खेड़ा, आणंद, दाहोद और बड़ौदा ग्रामीण क्षेत्र में इंंदौर-उज्जैन संभाग के नेताओं ने भौगोलिक, जातिगत, क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से विधानसभा क्षेत्रों का अध्ययन किया था। उसकी रिपोर्ट गुजरात भाजपा को दी गई। पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ यहां के मतदाताओं से भी घर-घर जाकर मिलते रहे और प्रत्याशियों को लेकर भी फीडबैक दिया।

नए उम्मीदवारों को दिया मौका
पांच जिलों के प्रभारी रहे पूर्व विधायक जीतू जिराती ने कहा कि हमने दावेदारों को लेकर फीडबैक दिया था। गुजरात भाजपा ने इस बार नए चेहरों को मौका दिया। इस वजह से बेहतर परिणाम आए हैं। कांग्रेेस को आणंद और महीसागर की एक-एक सीट मिली है, क्योकि यहां उम्मीदवारों का गलत चयन हुआ था। इसके अलावा एक सीट पर भाजपा के बागी उम्मीदवार ने जीत दर्ज कराई। जो तीन सीटें भाजपा हारी हैं, उनमें हार का अंतर काफी कम रहा। जो 34 सीटें हम जीते है, उनमें जीत का अंतर 20 से 30 हजार के करीब रहा। आणंद, दाहोद व बड़ौदा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा से भी चुनाव जीतने में मदद मिली।

20 सालों से निभा रहे हैं जिम्मेदारी
गुजरात के 37 विधानसभा क्षेत्रों मेें हर बार गुजरात विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ के नेताओं को जिम्मेदारी दी जाती है। कई नेता पांच से ज्यादा बार गुजरात चुनाव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और वे वहां की भौगोलिक, सामाजिक व राजनीतिक परिस्थितियों से परिचित है। टिकट चयन में भी कई बार गुजरात के वरिष्ठ नेता इन विधानसभा क्षेत्रों की तैैयारियों में जुटे नेताओं से फीडबैक लेते हैं। 20 साल पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे ने भी गुजरात के पांच जिलों की जिम्मेदारी संभाली थी, तब पांचों जिलों से भाजपा को अच्छी बढ़त मिली थी। इस बार फिर इन जिलों में इंदौर संभाग के नेताओं की मेहनत रंग लाई। 

विस्तार

गुजरात में मिली बम्पर सफलता से भाजपा उत्साहित है। खासकर मध्यप्रदेश भाजपा के वह नेता जिन्हें गुजरात भेजा गया था। मालवा-निमाड़ के 90 नेताओं को गुजरात में 37 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। यह नेता गुजरात में दो महीने डेरा डाले रहे। कार्यकर्ताओं से लेकर मतदाताओं के बीच घुल-मिल गए थे। गुजरात भाजपा ने भी इन नेताओं के फीडबैक को महत्व दिया और उसके हिसाब से इन 37 सीटों पर चुनावी रणनीति तैयार की गई। इसका परिणाम यह रहा कि 37 में से 34 सीटें भाजपा की झोली में आ गई।

गुजरात के हर विधानसभा चुनाव में प्रदेश के नेताओं की मदद ली जाती है। खासकर उन इलाकों में जो मध्यप्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं। खासकर मध्यप्रदेश के झाबुुआ, आलीराजपुर क्षेत्र के कई आदिवासी परिवारों का गुजरात से करीब का नाता है। गुजरात के पांच जिलों में अक्सर प्रदेश के आदिवासी युवा काम की तलाश में जाते हैं। 

जीतू जिराती को दी गई थी जिम्मेदारी
गुजरात चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा होने से पहले ही मालवा-निमाड़ के 90 नेताओं को गुजरात के 37 विधानसभा क्षेत्रों में भेजा गया था। इनमें पूर्व विधायक, प्रवक्ता, पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य समेत अन्य नेता आदि शामिल थे। गुजरात के पांच जिलों का प्रभारी पूर्व विधायक जीतू जिराती को बनाया गया था। हर विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दो नेताओं को दी गई थी। वेे मंडल से लेकर बूथ स्तर तक स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनावी तैयारियों में जुटे रहे। जिराती के अनुसार पंचमहल, गोधरा, खेड़ा, आणंद, दाहोद और बड़ौदा ग्रामीण क्षेत्र में इंंदौर-उज्जैन संभाग के नेताओं ने भौगोलिक, जातिगत, क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से विधानसभा क्षेत्रों का अध्ययन किया था। उसकी रिपोर्ट गुजरात भाजपा को दी गई। पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ यहां के मतदाताओं से भी घर-घर जाकर मिलते रहे और प्रत्याशियों को लेकर भी फीडबैक दिया।

नए उम्मीदवारों को दिया मौका
पांच जिलों के प्रभारी रहे पूर्व विधायक जीतू जिराती ने कहा कि हमने दावेदारों को लेकर फीडबैक दिया था। गुजरात भाजपा ने इस बार नए चेहरों को मौका दिया। इस वजह से बेहतर परिणाम आए हैं। कांग्रेेस को आणंद और महीसागर की एक-एक सीट मिली है, क्योकि यहां उम्मीदवारों का गलत चयन हुआ था। इसके अलावा एक सीट पर भाजपा के बागी उम्मीदवार ने जीत दर्ज कराई। जो तीन सीटें भाजपा हारी हैं, उनमें हार का अंतर काफी कम रहा। जो 34 सीटें हम जीते है, उनमें जीत का अंतर 20 से 30 हजार के करीब रहा। आणंद, दाहोद व बड़ौदा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा से भी चुनाव जीतने में मदद मिली।

20 सालों से निभा रहे हैं जिम्मेदारी
गुजरात के 37 विधानसभा क्षेत्रों मेें हर बार गुजरात विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ के नेताओं को जिम्मेदारी दी जाती है। कई नेता पांच से ज्यादा बार गुजरात चुनाव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और वे वहां की भौगोलिक, सामाजिक व राजनीतिक परिस्थितियों से परिचित है। टिकट चयन में भी कई बार गुजरात के वरिष्ठ नेता इन विधानसभा क्षेत्रों की तैैयारियों में जुटे नेताओं से फीडबैक लेते हैं। 20 साल पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे ने भी गुजरात के पांच जिलों की जिम्मेदारी संभाली थी, तब पांचों जिलों से भाजपा को अच्छी बढ़त मिली थी। इस बार फिर इन जिलों में इंदौर संभाग के नेताओं की मेहनत रंग लाई। 


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