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: Pravasi Bhartiya Sammelan: 'आजादी की शताब्दी तक भारत विश्व गुरु बन जाएगा, 27 प्रवासी भारतीय सम्मानित'

News Desk

News Desk / Mon, Jan 9, 2023

Pravasi Bhartiya Sammelan: 'आजादी की शताब्दी तक भारत विश्व गुरु बन जाएगा, 27 प्रवासी भारतीय सम्मानित'

प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का 17वां संस्करण

प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का 17वां संस्करण - फोटो : अमर उजाला

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मध्यप्रदेश में इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 17वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, आगामी 25 साल भारत के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत निरंतर विश्व गुरु बनने की महत्वाकांक्षी यात्रा पर है। साल 2047 में जब हमारा देश आजादी की शताब्दी मना रहा होगा। तब तक देश आत्मनिर्भर और विश्व गुरु बन चुका होगा। भारत की विकास यात्रा में पूरी दुनिया के कोने-कोने में बसे प्रवासी भारतीयों की अहम भूमिका है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, भारत का संकल्प है कि विश्व में सभी का समान और न्यायोचित विकास हो। हमारा दर्शन वसुधैव कुटुंबकम का है, सारा विश्व हमारे लिए एक परिवार है। प्रवासी भारतीय, भारत के विकास के विश्वसनीय भागीदार हैं। हम आपको पूरी तरह भागीदार बनाना चाहते हैं। आपकी सामूहिक ताकत, इनोवेटिव आइडियाज, तकनीकी दक्षता और क्षमता भारत को आत्म-निर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। कार्यक्रम में गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली और सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी विशेष रूप से शामिल हुए। राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी मौजूद रहे।

प्रवासी भारतीय सम्मेलन ने निभाई तरक्की में अहम भूमिका...
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि गत दो दशक में प्रवासी भारतीय सम्मेलन ने भारत की तरक्की में अहम भूमिका निभाई है। यह सरकार और प्रवासी भारतीय के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। कोरोना के कारण दो साल पहले यह सम्मेलन वर्चुअली आयोजित किया गया था। आज आप सभी से मिलकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। यह सम्मेलन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नौ जनवरी 1915 को अफ्रीका से भारत लौटने की गौरवमयी याद में मनाया जाता है।

इन्हें किया गया सम्मानित...
गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली, आस्ट्रेलिया के प्रोफेसर जगदीश चंद्रपति, भूटान के संजीव मेहता, ब्राजील के दिलीप लुंडो, ब्रुनेई के डॉ. एलेक्सज़ेंडर जॉन, कनाडा के डॉ. वैकुंटम अय्यर लक्ष्मणम, क्रोएशिया के डॉ. जुगेन्नदर सिंह निजर, डेनमार्क के प्रो. रामजी प्रसाद, इथोपिया के डॉ. कन्नन अम्बलम, जर्मनी के डॉ. अमल कुमार मुखोपाध्याय, इज़राइल की रीना विनोद पुष्करना, जापान की मक्सूदा सर्फी श्योटानी, मैक्सिको के डॉ. राजागोपाल, पोलैंड के अमित कैलाशचंद्र लाथ, कांगो के परमानंद सुखमल दासवानी, सिंगापुर के पीयूष गुप्ता, दक्षिण अफ्रीका के मोहनलाल हीरा, दक्षिण सूडान के संजय कुमार शिव भाई पटेल, श्रीलंका के सिवकुमार नादेसन, सूरीनाम के डॉ. देवचंद्रभोस शर्मा, स्विटजरलैंड की डॉ. अर्चना शर्मा, यूनाइटेड किंगडम के चंद्रकांत पटेल, अमेरिका के डॉ. दर्शन सिंह धालीवाल, उज्बेकिस्तान के अशोक तिवारी, संयुक्त अरब अमीरात के सिद्धार्थ बालचन्द्रन तथा त्रिनिदाद और टोबेगो के जस्टिस फ्रैंक ऑर्थर सीपरसाद को उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किए।

विस्तार

मध्यप्रदेश में इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 17वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, आगामी 25 साल भारत के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत निरंतर विश्व गुरु बनने की महत्वाकांक्षी यात्रा पर है। साल 2047 में जब हमारा देश आजादी की शताब्दी मना रहा होगा। तब तक देश आत्मनिर्भर और विश्व गुरु बन चुका होगा। भारत की विकास यात्रा में पूरी दुनिया के कोने-कोने में बसे प्रवासी भारतीयों की अहम भूमिका है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, भारत का संकल्प है कि विश्व में सभी का समान और न्यायोचित विकास हो। हमारा दर्शन वसुधैव कुटुंबकम का है, सारा विश्व हमारे लिए एक परिवार है। प्रवासी भारतीय, भारत के विकास के विश्वसनीय भागीदार हैं। हम आपको पूरी तरह भागीदार बनाना चाहते हैं। आपकी सामूहिक ताकत, इनोवेटिव आइडियाज, तकनीकी दक्षता और क्षमता भारत को आत्म-निर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। कार्यक्रम में गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली और सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी विशेष रूप से शामिल हुए। राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी मौजूद रहे।

प्रवासी भारतीय सम्मेलन ने निभाई तरक्की में अहम भूमिका...
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि गत दो दशक में प्रवासी भारतीय सम्मेलन ने भारत की तरक्की में अहम भूमिका निभाई है। यह सरकार और प्रवासी भारतीय के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। कोरोना के कारण दो साल पहले यह सम्मेलन वर्चुअली आयोजित किया गया था। आज आप सभी से मिलकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। यह सम्मेलन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नौ जनवरी 1915 को अफ्रीका से भारत लौटने की गौरवमयी याद में मनाया जाता है।

इन्हें किया गया सम्मानित...
गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली, आस्ट्रेलिया के प्रोफेसर जगदीश चंद्रपति, भूटान के संजीव मेहता, ब्राजील के दिलीप लुंडो, ब्रुनेई के डॉ. एलेक्सज़ेंडर जॉन, कनाडा के डॉ. वैकुंटम अय्यर लक्ष्मणम, क्रोएशिया के डॉ. जुगेन्नदर सिंह निजर, डेनमार्क के प्रो. रामजी प्रसाद, इथोपिया के डॉ. कन्नन अम्बलम, जर्मनी के डॉ. अमल कुमार मुखोपाध्याय, इज़राइल की रीना विनोद पुष्करना, जापान की मक्सूदा सर्फी श्योटानी, मैक्सिको के डॉ. राजागोपाल, पोलैंड के अमित कैलाशचंद्र लाथ, कांगो के परमानंद सुखमल दासवानी, सिंगापुर के पीयूष गुप्ता, दक्षिण अफ्रीका के मोहनलाल हीरा, दक्षिण सूडान के संजय कुमार शिव भाई पटेल, श्रीलंका के सिवकुमार नादेसन, सूरीनाम के डॉ. देवचंद्रभोस शर्मा, स्विटजरलैंड की डॉ. अर्चना शर्मा, यूनाइटेड किंगडम के चंद्रकांत पटेल, अमेरिका के डॉ. दर्शन सिंह धालीवाल, उज्बेकिस्तान के अशोक तिवारी, संयुक्त अरब अमीरात के सिद्धार्थ बालचन्द्रन तथा त्रिनिदाद और टोबेगो के जस्टिस फ्रैंक ऑर्थर सीपरसाद को उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किए।


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