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: Chhindwara: किसानों को एक रुपये किलो बेचना पड़ रहा टमाटर, मजदूरी भी नहीं निकल पा रही

News Desk / Fri, Dec 23, 2022


किसानों को टमाटर की मजदूरी निकालना भी भारी पड़ रहा है।

किसानों को टमाटर की मजदूरी निकालना भी भारी पड़ रहा है। - फोटो : सोशल मीडिया

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मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में टमाटर की अधिक पैदावार किसानों के लिए मुसीबत बन गई। दिसंबर में जहां टमाटर के ठीकठाक भाव मिलते थे, अब एक रुपये किलो में बिक रहा है। किसान टमाटर की तुड़ाई भी नहीं निकाल पा रहे हैं। वहीं फुटकर बाजार में टमाटर दस रुपये किलो ही बिक रहा है।

बता दें कि इस बार टमाटर की पैदावार अच्छी हुई है। पर भाव नहीं मिल रहे हैं। किसान का कहना है कि टमाटर की खेती में  प्रति एकड़ में एक लाख रुपये की लागत आती है। मजदूरी भी 300 रुपये हो गई है। 20 रुपये से 60 रुपये कैरेट में बिकने वाले टमाटर से मजदूरी निकालना मुश्किल है। बता दें कि जिले में लगभग 10 हजार हेक्टेयर में टमाटर की पैदावार होती है। दिसंबर, जनवरी में टमाटर की ज्यादा पैदावार होने के कारण डिमांड कमजोर हो जाती है। इसी कारण किसानों को टमाटर के ठीक दाम नहीं मिल पाते। 

हार्टिकल्चर विभाग के उप संचालक एम एल उईके का कहना है कि इन दिनों टमाटर की पैदावार ज्यादा होने की वजह से किसानो को उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। टमाटर की पैदावार करने वाले किसान घाटे से बचने के लिए सरकारी अनुदान प्राप्त कर प्रोसेसिंग यूनिट के प्रोजेक्ट के तहत मुनाफा कमा सकता है। सॉस, कैचप, पेस्ट, कैरी बनाकर विधिवत रख लें तो आगामी समय में किसानों को अच्छा मुनाफा हो सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत 30 लाख के लोन में 10 लाख का अनुदान देती है। 
 

विस्तार

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में टमाटर की अधिक पैदावार किसानों के लिए मुसीबत बन गई। दिसंबर में जहां टमाटर के ठीकठाक भाव मिलते थे, अब एक रुपये किलो में बिक रहा है। किसान टमाटर की तुड़ाई भी नहीं निकाल पा रहे हैं। वहीं फुटकर बाजार में टमाटर दस रुपये किलो ही बिक रहा है।

बता दें कि इस बार टमाटर की पैदावार अच्छी हुई है। पर भाव नहीं मिल रहे हैं। किसान का कहना है कि टमाटर की खेती में  प्रति एकड़ में एक लाख रुपये की लागत आती है। मजदूरी भी 300 रुपये हो गई है। 20 रुपये से 60 रुपये कैरेट में बिकने वाले टमाटर से मजदूरी निकालना मुश्किल है। बता दें कि जिले में लगभग 10 हजार हेक्टेयर में टमाटर की पैदावार होती है। दिसंबर, जनवरी में टमाटर की ज्यादा पैदावार होने के कारण डिमांड कमजोर हो जाती है। इसी कारण किसानों को टमाटर के ठीक दाम नहीं मिल पाते। 

हार्टिकल्चर विभाग के उप संचालक एम एल उईके का कहना है कि इन दिनों टमाटर की पैदावार ज्यादा होने की वजह से किसानो को उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। टमाटर की पैदावार करने वाले किसान घाटे से बचने के लिए सरकारी अनुदान प्राप्त कर प्रोसेसिंग यूनिट के प्रोजेक्ट के तहत मुनाफा कमा सकता है। सॉस, कैचप, पेस्ट, कैरी बनाकर विधिवत रख लें तो आगामी समय में किसानों को अच्छा मुनाफा हो सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत 30 लाख के लोन में 10 लाख का अनुदान देती है। 
 


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