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IGNTU यूनिवर्सिटी का मेन गेट जाम, आदिवासी बच्चों के भविष्य पर संकट : मॉडल ट्राइबल स्कूल को 12वीं तक बढ़ाने की मांग, 6 दिन से हड़ताल पर अभिभावक

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) में सोमवार को हालात उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गए, जब पिछले 6 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे अभिभावक संघ ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार (मेन गेट) को पूरी तरह जाम कर दिया।

कक्षा 9वीं से 12वीं तक स्कूल के उन्नयन (अपग्रेडेशन) की मांग को लेकर आक्रोशित अभिभावक गेट के सामने ही जमीन पर बैठ गए। इस चक्काजाम के कारण विश्वविद्यालय आने-जाने वाले प्रोफेसरों, कर्मचारियों और छात्रों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और घंटों तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा।

6 दिन से जारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल, आश्वासन बेअसर

दरअसल, मॉडल ट्राइबल स्कूल के उन्नयन की मांग को लेकर अभिभावक संघ 1 जुलाई से ही विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठा है। सोमवार को आंदोलन के छठे दिन जब कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो प्रदर्शनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने गेट ब्लॉक कर दिया। सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन के आला अधिकारी और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों ने अभिभावकों को समझाने और रास्ता खोलने की अपील की। प्रबंधन ने स्कूल के उन्नयन के लिए दिल्ली (केंद्र सरकार) से पत्राचार करने का लिखित आश्वासन भी दिया, लेकिन आंदोलनकारी 'अब आश्वासन नहीं, सीधे आदेश चाहिए' की जिद पर अड़े रहे।

8वीं के बाद कहां जाएं बच्चे? भविष्य अधर में

अभिभावक संघ का आरोप है कि वर्तमान में यह मॉडल ट्राइबल स्कूल केवल कक्षा 1 से 8वीं तक ही संचालित हो रहा है। इस साल जो बच्चे आठवीं पास कर चुके हैं, उनका दाखिला आगे की कक्षाओं में नहीं हो पा रहा है।

इस संबंध में स्कूल के प्राचार्य डॉ. राज नारायण ओझा ने बताया कि वर्तमान में स्कूल के पास कक्षा 8वीं तक का ही बजट और शिक्षक स्वीकृत हैं। कक्षा 9 से 12वीं तक की उच्च कक्षाओं के संचालन के लिए प्रस्ताव बहुत पहले ही भेजा जा चुका है। जैसे ही शासन या मंत्रालय से उच्च कक्षाओं की स्वीकृति और आदेश मिलेगा, संचालन तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।

"आदिवासी बच्चों का भविष्य दांव पर, वोट लेने वाले नेता गायब"

धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनेताओं के खिलाफ भारी नाराजगी जाहिर की। अभिभावकों ने कहा कि यह पूरी समस्या आदिवासी क्षेत्र के गरीब बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। इसके बावजूद क्षेत्र का कोई भी बड़ा नेता, विधायक या सांसद उनकी सुध लेने या विश्वविद्यालय प्रशासन से मध्यस्थता करने धरना स्थल पर नहीं पहुंचा। नेताओं की इस उदासीनता को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

राष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रालय तक पहुंची गुहार, पर नतीजा सिफर

अभिभावक संघ का दावा है कि वे इस मांग को लेकर पिछले कई महीनों से लगातार आवेदन, ज्ञापन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मामले में कई सांसदों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र भी लिखे हैं और देश के सर्वोच्च पद 'राष्ट्रपति' तक न्याय की गुहार लगाई जा चुकी है।

संघ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि IGNTU का विश्वविद्यालय प्रशासन केंद्र सरकार को इस स्कूल के संबंध में लगातार गलत और भ्रामक जानकारी भेज रहा है, जिसके कारण अपग्रेडेशन की प्रक्रिया को जानबूझकर टाला जा रहा है।

अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि जब तक कक्षा 9वीं में प्रवेश शुरू करने का आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक उनका यह उग्र आंदोलन और चक्काजाम अनवरत जारी रहेगा।

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