शहडोल में ₹8 करोड़ की 'डिजिटल कमाई' या मानसिक तनाव? : 1.88 करोड़ फॉलोअर्स वाले हेड-कॉन्स्टेबल विवेकानंद ने दिया इस्तीफा; सस्पेंड करने वाले SP को थमाया लेटर,पढ़िए रिपोर्ट
MP CG Times / Sat, Jul 4, 2026
सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी वर्दी और वीडियो के दम पर 1.88 करोड़ फॉलोअर्स बटोरने वाले मध्य प्रदेश पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल विवेकानंद तिवारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। ड्यूटी से गायब रहने और रील बनाकर करोड़ों की कमाई करने के आरोप में सस्पेंड होने के बाद, अब उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे देकर सबको चौंका दिया है।
हालांकि, पुलिस विभाग ने अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी है। एक तरफ जहां विभाग उनकी करोड़ों की कमाई को इस्तीफे की वजह मान रहा है, वहीं विवेकानंद ने इसे 'मानसिक प्रताड़ना' का नतीजा बताया है।

इन 4 बड़े आरोपों के चलते शहडोल SP ने किया था सस्पेंड
₹8 करोड़ सालाना की पैरेलल इनकम का आरोप: ऑनलाइन वेबसाइटों के अनुमान के मुताबिक, विवेकानंद तिवारी की सोशल मीडिया (फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम) से सालाना कमाई करीब ₹8 करोड़ है, यानी वे हर महीने ₹60 से ₹66 लाख कमा रहे थे। विभाग का आरोप है कि उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए पैरेलल इनकम सोर्स बना लिया था।
विवेकानंद की सफाई
कमाई के ये आंकड़े पूरी तरह बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए हैं। सभी चैनल्स मेरी पत्नी के नाम पर हैं। मैंने अपने और पत्नी के बैंक खातों का पूरा ब्योरा विभाग को दे दिया है।
ड्यूटी से गायब रहकर रील बनाने का आरोप
विभाग के मुताबिक, विवेकानंद कई बार बिना बताए ड्यूटी से गायब रहे। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन दिनों वे दफ्तर में अनुपस्थित दर्ज थे, उन्हीं दिनों उनके अकाउंट्स पर वर्दी वाले वीडियो अपलोड हो रहे थे।
मैं अस्वस्थ था और मेडिकल इमरजेंसी के कारण छुट्टी पर था। मैंने ट्रैफिक पुलिस के ऑफिशियल वॉट्सऐप ग्रुप में इसकी सूचना दी थी।
कमर्शियल शूटिंग और वीडियोग्राफर की सेवाएं: पुलिस मुख्यालय के स्पष्ट आदेश हैं कि कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी में ऐसी रील नहीं बनाएगा जिससे विभाग की गरिमा गिरे। आरोप है कि विवेकानंद ने बकायदा वीडियोग्राफर और निजी स्टाफ रखकर कमर्शियल स्तर पर कंटेंट तैयार कराया।

शासकीय दायित्वों की उपेक्षा
विभाग का साफ कहना है कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता किसी भी कर्मचारी को सरकारी कर्तव्यों से मुक्त नहीं करती। उन्होंने सरकारी काम के बजाय अपनी निजी गतिविधियों को प्राथमिकता दी।
विभाग ने दिया था 'मीडिया सेल' का ऑफर
विवाद बढ़ने पर शहडोल पुलिस ने विवेकानंद को दो विकल्प दिए थे। पहला यह कि वे एसपी ऑफिस की मीडिया सेल में रहकर सरकार की जन-जागरूकता के वीडियो बनाएं। दूसरा विकल्प यह था कि वे भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) की सोशल मीडिया सेल में अपनी सेवाएं दें। विभाग का कहना था कि उन्हें सोशल मीडिया पर काम करने से आपत्ति नहीं है, लेकिन यह शासकीय जिम्मेदारी के तहत होना चाहिए, निजी बिजनेस के रूप में नहीं।
वेतन से कई गुना अधिक है सोशल मीडिया की ताकत
विवेकानंद तिवारी साल 2013 में मध्य प्रदेश पुलिस में बतौर कॉन्स्टेबल भर्ती हुए थे। वर्तमान में एक हेड कॉन्स्टेबल की मासिक ग्रॉस सैलरी ₹45,000 से ₹52,000 के बीच होती है। कट-पिटकर हाथ में करीब ₹40 से ₹45 हजार आते हैं। उनके 13 साल के करियर में उन्हें कुल ₹35 से ₹42 लाख का वेतन मिला है।
अगर वे रिटायरमेंट (अगले 25 साल) तक नौकरी करते, तो उन्हें कुल ₹4.5 करोड़ तक की सैलरी मिलती। वहीं, उनके सोशल मीडिया की संभावित कमाई इस पूरी सर्विस अवधि की सैलरी से कहीं ज्यादा आंकी जा रही है।
'अपमान और मानसिक दबाव नहीं झेल सकता, इसलिए दिया इस्तीफा'
विवेकानंद तिवारी ने कहा, "मुझे रील बनाने के कारण नहीं, बल्कि मेडिकल लीव की प्रक्रिया में हुई गलतफहमी की वजह से सस्पेंड किया गया। जब मैं बीमार था, तब मेरी पत्नी पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो अपलोड कर रही थी। सोशल मीडिया से होने वाली आय का उपयोग मैं हेलमेट बांटने जैसे सामाजिक कार्यों में करता था। लेकिन निलंबन के बाद लगातार बनाए जा रहे मानसिक दबाव और अपमान के कारण मैंने भारी मन से इस्तीफा देने का फैसला किया है।"
सस्पेंड इन्फ्लुएंसर का इस्तीफा नामंजूर
शहडोल में निलंबित हेड कॉन्स्टेबल विवेकानंद तिवारी का शहडोल पुलिस ने उनका इस्तीफा फिलहाल अस्वीकार कर दिया है। विभागीय जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित रखा जाएगा और जांच जारी रहेगी।
पुलिस ने कंपनी से मांगी पैसों की जानकारी
पुलिस ने यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और मेटा से विवेकानंद तिवारी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट, बैंक खाते और आय संबंधी जानकारी मांगी है। हेड कॉन्स्टेबल का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा सौंप दिया है। हर जांच में सहयोग करेंगे। जांच पूरी होने के बाद विभाग जो भी निर्णय लेगा, उसे स्वीकार करेंगे।
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