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EXCLUSIVE- मोदी कैबिनेट से 6 मंत्रियों की छुट्टी तय ! : निर्मला सीतारमण, हरदीप सिंह होंगे आउट, जानिए किसकी जाएगी कुर्सी, किसे मिलेगा प्रमोशन ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार में अब सबसे बड़े राजनीतिक ऑपरेशन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होना है और उससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की तैयारी लगभग अंतिम चरण में बताई जा रही है।

सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि इस बार बदलाव केवल मंत्रालयों के बंटवारे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी कैबिनेट की संरचना और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

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मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस बार कम से कम 6 मंत्रियों की जिम्मेदारी बदली जा सकती है या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। इसके साथ ही कई नए और अपेक्षाकृत युवा चेहरों को सरकार में जगह मिलने की संभावना है।

2 बड़े फॉर्मूले पर तैयार हो रही नई कैबिनेट

सूत्रों के अनुसार इस बार का फेरबदल दो बड़े आधारों पर तय किया गया है। पहला आधार कैबिनेट को पहले से अधिक युवा बनाना है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आने वाले वर्षों की राजनीति को देखते हुए सरकार में नई पीढ़ी को आगे लाया जाए। बताया जा रहा है कि नई कैबिनेट की औसत उम्र भाजपा अध्यक्ष की उम्र के आसपास यानी करीब 46 वर्ष रखने की कोशिश होगी।

इसमें 2-4 साल का अंतर हो सकता है, लेकिन 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले मंत्रियों की संख्या काफी कम की जाएगी। हालांकि प्रधानमंत्री के पद पर यह फॉर्मूला लागू नहीं होगा। पिछले दो फेरबदल में जिन चेहरों को नहीं बदला गया था, इस बार उनके बदलने की संभावना अधिक बताई जा रही है।

दूसरा बड़ा आधार राजनीतिक विस्तार है। भाजपा उन नेताओं को भी सरकार में प्रतिनिधित्व देना चाहती है जो दूसरी पार्टियां छोड़कर एनडीए के साथ आए हैं। सूत्रों के मुताबिक पंजाब से आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा के साथ आए राज्यसभा सांसदों, शिवसेना (उद्धव गुट) छोड़ने वाले सांसदों और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह देने पर विचार चल रहा है।

हरदीप सिंह पुरी की विदाई लगभग तय, उम्र सबसे बड़ा कारण

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का मंत्रिमंडल से बाहर होना लगभग तय माना जा रहा है। फिलहाल उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देने पर चर्चा नहीं हुई है।

मंत्रालय के भीतर चर्चा है कि उनकी विदाई का सबसे बड़ा कारण उनकी उम्र है। वे इस समय 74 वर्ष के हैं और युवा कैबिनेट बनाने की रणनीति में यह सबसे बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नए चेहरों को जगह देने के लिए वरिष्ठ मंत्रियों के पद खाली करना जरूरी होगा।

कुछ समय पहले सामने आई एपस्टीन फाइल में उनका नाम चर्चा में आने को लेकर भी सवाल उठे, लेकिन सूत्र साफ कहते हैं कि केवल आरोपों के आधार पर सरकार ने पहले कभी किसी मंत्री को नहीं हटाया। इसलिए इस मामले का फेरबदल से कोई सीधा संबंध नहीं माना जा रहा।

निर्मला सीतारमण की भूमिका बदल सकती है, नाराजगी नहीं रणनीति वजह

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदा भूमिका भी बदल सकती है। हालांकि इसे किसी तरह की नाराजगी या असंतोष से जोड़कर नहीं देखा जा रहा।

बताया जा रहा है कि पार्टी उन्हें दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी देना चाहती है। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा दक्षिण भारत में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। ऐसे में सीतारमण संगठन की बड़ी भूमिका में दिखाई दे सकती हैं।

सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बड़े फैसले लिए जाएंगे और यदि वित्त मंत्रालय में नया चेहरा आता है तो उन फैसलों को नया राजनीतिक संदेश भी मिलेगा।

वित्त मंत्रालय के लिए दो बड़े नाम चर्चा में

यदि वित्त मंत्रालय में बदलाव होता है तो सूत्रों के मुताबिक दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पहला नाम प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास का है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी उनके कामकाज से काफी संतुष्ट हैं और उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

दूसरा नाम केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का है। सरकार और पार्टी दोनों स्तर पर उन्हें मजबूत प्रशासक माना जाता है और वे भी वित्त मंत्रालय के संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं।

धर्मेंद्र प्रधान पर फैसला ओडिशा की राजनीति से जुड़ा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर पिछले काफी समय से चर्चा है, खासकर NEET पेपर लीक विवाद के बाद। हालांकि सूत्रों का कहना है कि फिलहाल उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की संभावना बहुत कम है।

बताया जा रहा है कि यदि ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव होता है और मुख्यमंत्री मोहन मांझी की जगह नया नेतृत्व सामने आता है, तब धर्मेंद्र प्रधान को राज्य की कमान सौंपी जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार फिलहाल उनके शिक्षा मंत्रालय में बदलाव या किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने की संभावना है, लेकिन सरकार से बाहर किए जाने की संभावना नहीं के बराबर है।

दोहरी जिम्मेदारी के कारण पंकज चौधरी को छोड़ना पड़ सकता है मंत्रालय

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी इस समय उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। भाजपा लंबे समय से "एक व्यक्ति-एक पद" की नीति पर जोर देती रही है। ऐसे में सूत्रों का कहना है कि पंकज चौधरी प्रदेश अध्यक्ष बने रह सकते हैं, लेकिन उन्हें केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ना पड़ सकता है। इससे सरकार में नए चेहरों को जगह देने का रास्ता भी साफ होगा।

दिल्ली की राजनीति में बढ़ सकती है हर्ष मल्होत्रा की भूमिका

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा के मंत्री पद पर भी संकट है।

बताया जा रहा है कि वे फिलहाल दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष भी हैं और पार्टी उन्हें दिल्ली की राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका देना चाहती है। केंद्र सरकार दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कामकाज और उनकी सार्वजनिक छवि पर लगातार नजर बनाए हुए है।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली सरकार के कामकाज, संगठनात्मक समन्वय और मुख्यमंत्री की छवि मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ऐसे में उनके मंत्री पद से हटने की संभावना काफी प्रबल मानी जा रही है।

20 जुलाई से पहले कभी भी हो सकता है ऐलान

सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई टीम के साथ संसद में उतरना चाहते हैं। इसलिए फेरबदल की घोषणा कभी भी हो सकती है।

यदि सूत्रों के दावे सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ मंत्रालयों का फेरबदल नहीं होगा, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी, युवा नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति और भाजपा के राजनीतिक विस्तार की नई रूपरेखा भी माना जाएगा।

नोट: यह रिपोर्ट विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारियों पर आधारित है। सरकार की ओर से मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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