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: Ujjain Mahakal: उज्जैन से राजनेता बचते है रात रुकने से, राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह शहरी सीमा से बाहर रुके

News Desk / Tue, Nov 29, 2022


उज्जैन शहर से बाहर रुकी भारत जोड़ो यात्रा

उज्जैन शहर से बाहर रुकी भारत जोड़ो यात्रा - फोटो : amar ujala digital

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देश और प्रदेश के मुखिया हो या राजपरिवार के सदस्य, उज्जैन में रात नहीं गुजारते। उज्जैन के राज महाकाल है।  मान्यता है कि वहां एक साथ दो राजा नहीं रुक सकते है। इसका पालन भारत जोड़ो यात्रा ने भी किया। रात्रि विश्राम के लिए एक निजी कॉलेज चुना, जो शहरी सीमा से बाहर था। राघोगढ़ राजपरिवार से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी पैदल यात्री है। वे मंगलवार को कैम्प में ही यात्रियों के साथ रुके। इंदौर से निकलने के बाद भारत जोड़ो यात्रा उज्जैन शहर की सीमा से पहले निनौरा में ही रुकी थी, जो उज्जैन की सीमा से बाहर है।  हालांकि राहुल गांधी अभी किसी बड़े पद पर नहीं है, लेकिन नेहरु-गांधी परिवार के तीन सदस्य देश के प्रधानमंत्री रह चुके है।  भारत जोडो यात्रा के शहर से बाहर रुकने का सिर्फ संयोग है या मान्यता के कारण ऐसा किया गया। इस सवाल के बारे में दिग्विजय सिंह कहते है कि   वे राजा नहीं है। इसलिए इस मान्यता पर विश्वास नहीं करते। संयोग है कि यात्रा शहर से बाहर रुकी। 

जिस कॉलेज परिसर में यात्रा रुकी वह चल रही थी परीक्षा
यात्रा ने एक दिन का ब्रेक लिया है। आगर रोड के एक निजी कॉलेज परिसर में यात्रा रुकी है। यहां बुधवार को परीक्षा भी चल रही थी। बिहार से आए कार्यकर्ता जब दिग्विजय सिंह के सामने नारेबाजी करने लगे तो उन्हें बताया गया कि भीतर परीक्षा चल रही है, इसलिए नारे न लगाएं।  

सिंधिया-शिवराज भी नहीं रुकते उज्जैन में 
सिंधिया रियासत में उज्जैन भी शामिल था लेकिन सिंधिया राजपरिवार के लोग उज्जैन में रात नहीं रुकते। सिंधिया परिवार ने रुकने के लिए शहर के बाहर एक महल बनवाया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उज्जैन में नहीं रुकते है। पिछले सिंहस्थ  के दौरान उन्होंने शहर की सीमा के बाहर एक बड़ा आयोजन करवाया था। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे। तब सीएम ने वहां रहने के लिए एक झोपड़ी बनवाई थी।

बाबा महाकाल है उज्जैन के राजा
राजा भोज के समय से ही उज्जैन में कोई राजा या मंत्री रात में नही रुकता। बाबा महाकाल उज्जैन के राजा हैं। उनके रहते कोई दूसरा राजा या मंत्री उज्जैन में  रात नहीं बिता सकता है।
इस धारणा को लेकर स्थानीय लोग कुछ उदाहरण भी बताते है। कहा जाता है कि देश के चौथे प्रधानमन्त्री मोरार जी देसाई जब उज्जैन में एक रात रुके थे, तो अगले ही दिन उनकी सरकार चली गयी। उज्जैन मेें प्रधानमंत्री के तौर पर इंदिरा गांधी भी आ चुकी है, लेकिन वे भी कभी नहीं रुकी। 

विस्तार

देश और प्रदेश के मुखिया हो या राजपरिवार के सदस्य, उज्जैन में रात नहीं गुजारते। उज्जैन के राज महाकाल है।  मान्यता है कि वहां एक साथ दो राजा नहीं रुक सकते है। इसका पालन भारत जोड़ो यात्रा ने भी किया। रात्रि विश्राम के लिए एक निजी कॉलेज चुना, जो शहरी सीमा से बाहर था। राघोगढ़ राजपरिवार से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी पैदल यात्री है। वे मंगलवार को कैम्प में ही यात्रियों के साथ रुके। इंदौर से निकलने के बाद भारत जोड़ो यात्रा उज्जैन शहर की सीमा से पहले निनौरा में ही रुकी थी, जो उज्जैन की सीमा से बाहर है।  हालांकि राहुल गांधी अभी किसी बड़े पद पर नहीं है, लेकिन नेहरु-गांधी परिवार के तीन सदस्य देश के प्रधानमंत्री रह चुके है।  भारत जोडो यात्रा के शहर से बाहर रुकने का सिर्फ संयोग है या मान्यता के कारण ऐसा किया गया। इस सवाल के बारे में दिग्विजय सिंह कहते है कि   वे राजा नहीं है। इसलिए इस मान्यता पर विश्वास नहीं करते। संयोग है कि यात्रा शहर से बाहर रुकी। 

जिस कॉलेज परिसर में यात्रा रुकी वह चल रही थी परीक्षा
यात्रा ने एक दिन का ब्रेक लिया है। आगर रोड के एक निजी कॉलेज परिसर में यात्रा रुकी है। यहां बुधवार को परीक्षा भी चल रही थी। बिहार से आए कार्यकर्ता जब दिग्विजय सिंह के सामने नारेबाजी करने लगे तो उन्हें बताया गया कि भीतर परीक्षा चल रही है, इसलिए नारे न लगाएं।  

सिंधिया-शिवराज भी नहीं रुकते उज्जैन में 
सिंधिया रियासत में उज्जैन भी शामिल था लेकिन सिंधिया राजपरिवार के लोग उज्जैन में रात नहीं रुकते। सिंधिया परिवार ने रुकने के लिए शहर के बाहर एक महल बनवाया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उज्जैन में नहीं रुकते है। पिछले सिंहस्थ  के दौरान उन्होंने शहर की सीमा के बाहर एक बड़ा आयोजन करवाया था। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे। तब सीएम ने वहां रहने के लिए एक झोपड़ी बनवाई थी।

बाबा महाकाल है उज्जैन के राजा
राजा भोज के समय से ही उज्जैन में कोई राजा या मंत्री रात में नही रुकता। बाबा महाकाल उज्जैन के राजा हैं। उनके रहते कोई दूसरा राजा या मंत्री उज्जैन में  रात नहीं बिता सकता है।

इस धारणा को लेकर स्थानीय लोग कुछ उदाहरण भी बताते है। कहा जाता है कि देश के चौथे प्रधानमन्त्री मोरार जी देसाई जब उज्जैन में एक रात रुके थे, तो अगले ही दिन उनकी सरकार चली गयी। उज्जैन मेें प्रधानमंत्री के तौर पर इंदिरा गांधी भी आ चुकी है, लेकिन वे भी कभी नहीं रुकी। 

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