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: कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज, EPFO ने इतनी बढ़ाई

News Desk / Fri, Feb 10, 2023


EPFO की सीमा बढ़ी: देश में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के लाखों कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) पेंशन लाभ के लिए मौजूदा वेतन सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। ईपीएफओ वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये प्रति माह करने पर विचार कर रहा है।

ईपीएफओ की लिमिट में इजाफा

ईपीएफओ की नई लिमिट बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि संघ के ज्यादातर सदस्य इस फैसले के पक्ष में हैं क्योंकि पिछली बार 2014 में वेतन सीमा में संशोधन किया गया था। ईपीएफओ की वेतन सीमा में इस बढ़ोतरी से और भी लोग इसके दायरे में आएंगे। इसका सीधा फायदा 75 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिल सकता है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को सरकार की मंजूरी का इंतजार है

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन बोर्ड के इस फैसले के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है क्योंकि सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद ही बोर्ड इस पर आगे बढ़ सकता है. इस फैसले से सरकार पर बोझ पड़ेगा। कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएफओ) पर सरकार हर साल करीब 6,750 करोड़ रुपए खर्च करती है। वेतन सीमा बढ़ाने के बाद सरकार को इसके लिए अलग से व्यवस्था करनी होगी।

पिछला संशोधन 2014 में हुआ था (ईपीएफओ की सीमा बढ़ाई गई)-

ईपीएफओ योजना के लिए 15,000 रुपये से कम वेतन की आवश्यकता। इसमें सरकार आपकी बेसिक सैलरी का 1.6 फीसदी आपके पीएफ खाते में योगदान करती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में वेतन सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 21 हजार रुपये करने से 75 लाख कर्मचारियों को फायदा हो सकता है. आखिरी बार 2014 में वेतन सीमा बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई थी।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में आखिरी बढ़ोतरी 2014 में हुई थी

2014 में सरकार ने EPFO ​​की लिमिट 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह कर दी थी. दूसरी ओर, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्थापना के बाद से इसमें 8 बार संशोधन किया गया है।

कब और कैसे बढ़ी लिमिट ईपीएफओ की लिमिट में इजाफा हुआ

  • 1952 में वेतन की सीमा 300 रुपये थी
  • 1957 में इस सीमा को बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया।
  • 1962 में इस सीमा को बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया
  • 1976 में इसे बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया।
  • 1985 में इसे बढ़ाकर 3500 रुपये कर दिया गया।
  • 1990 में इस सीमा को बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया।
  • 1994 में इसे घटाकर 6500 रुपये कर दिया गया।
  • 2014 से यह सीमा घटाकर 15,000 रुपये कर दी गई है।

ईपीएफओ कैसे काम करता है?

EPFO में जमा रकम पर सरकार सालाना ब्याज देती है, ब्याज दर 8.1% है. कर्मचारी के मूल वेतन का 12 प्रतिशत ईपीएफओ को जाता है, इतनी ही राशि कर्मचारी के पीएफ खाते में नियोक्ता कंपनी भी कर्मचारी के नाम से जमा करती है ! कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organisation) में देखा जाए तो कंपनी 12% में से 8.33% कर्मचारी EPS में और 3.67% EPF में डालती है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने इस नियम में बड़ा बदलाव किया है

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को लेकर एक बड़ी खबर आई है। केंद्र सरकार ईपीएफओ सैलरी कैप में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस बदलाव की मदद से जहां एक तरफ कर्मचारी भविष्य निधि संस्था से ज्यादा लोग लाभान्वित हो सकेंगे, वहीं मौजूदा शेयरधारकों को भी बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाने की सुविधा मिलेगी!

ईपीएफओ नवीनतम अपडेट चेक 2023

मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार EPFO ​​की पेंशन स्कीम के तहत सैलरी लिमिट को रिवाइज करने पर विचार कर रही है. ये परिवर्तन कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों द्वारा किए गए योगदान को प्रभावित करेंगे। इसका मतलब है कि अब आप और आपकी कंपनी दोनों ईपीएफओ के नाम पर ज्यादा पैसा जमा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि सरकार एक बार फिर इसे बढ़ाकर 21,000 रुपये प्रति माह कर सकती है। यदि सरकार यह निर्णय लेती है तो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ा दी जाएगी।

कर्मचारी भविष्य – निधि संस्था

इस नए संशोधन के बाद कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों का योगदान बढ़ जाएगा। हालांकि इससे आपकी सैलरी कम हो सकती है, लेकिन यह आपको रिटायरमेंट में ईपीएफओ से ज्यादा पैसा निकालने में सक्षम बनाएगा। वहीं, इस सुधार के बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत और लोगों को जुड़ने का मौका मिलेगा।

ईपीएस पेंशन स्कीम चेक अपडेट 2023 : ईपीएस पेंशन का गुणा करें, 33 + 2 = 35 \70×50,000


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