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पंडवानी के एक युग का अंत : पद्म विभूषण तीजन बाई का 70 साल की उम्र में निधन; रायपुर AIIMS में ली अंतिम सांस, पीएम मोदी और सीएम साय ने जताया शोक

छत्तीसगढ़ की माटी की महक और लोक कला 'पंडवानी' को सात समंदर पार तक गूंज देने वाली महान कलाकार, पद्म विभूषण तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। 70 वर्ष की उम्र में शनिवार देर रात (तड़के 3:15 बजे) रायपुर के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले काफी समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं।

तीजन बाई के निधन की खबर से कला, संस्कृति और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

नाना से मिली प्रेरणा, तंबूरे को 'गांडीव' बना विदेशों में बिखेरा जादू

तीजन बाई ने अपनी कड़क और सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और हाथ में तंबूरे को कभी धनुष तो कभी गदा बनाने की अनूठी शैली से पंडवानी गायन को एक नया आयाम दिया। कापालिक शैली में महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत करने की प्रेरणा उन्हें अपने नाना से मिली थी।

तत्कालीन रूढ़िवादी सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए उन्होंने मंच संभाला और अपनी कला के दम पर देश के तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मान—पद्मश्री, पद्म भूषण और साल 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्य विभूषण' से नवाजी गईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री साय ने दी श्रद्धांजलि

तीजन बाई के महाप्रयाण पर देश और राज्य की बड़ी राजनीतिक हस्तियों ने गहरा दुख जताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर शोक जताते हुए लिखा, “उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी के जरिए देश-विदेश में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। वे आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रहेंगी।

अंतिम संस्कार में पहुंचे पूर्व सीएम भूपेश बघेल, साझा कीं पुरानी यादें

तीजन बाई को अंतिम विदाई देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उनके पैतृक गांव गनियारी पहुंचे। उन्होंने नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की और भावुक होते हुए अपनी पुरानी यादें साझा कीं। भूपेश बघेल ने कहा, “एक महान कलाकार आज हमसे विदा हो गया। जब मैं स्कूल में पढ़ता था, तब मैं साइकिल चलाकर तीजन बाई की पंडवानी सुनने जाया करता था।

उनकी कला में गजब का सम्मोहन था, जिसने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर अमर कर दिया।” तीजन बाई भले ही इस दुनिया से विदा हो गई हैं, लेकिन तंबूरे की तान पर उनके गाए 'महाभारत' के प्रसंग और उनकी बुलंद आवाज छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में हमेशा अमर रहेगी।

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