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: छत्तीसगढ़ की बेटी साक्षी बनीं बालिका वैज्ञानिक: वायरलेस कम्युनिकेशन तकनीक का आविष्कार करने वाली साक्षी को राष्ट्रीय कलचुरी गौरव सर्वोच्च सम्मान

गरियाबंद जिले के पाण्डुका नवोदय विद्यालय की कक्षा 11वीं की छात्रा साक्षी जायसवाल को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कलचुरी गौरव सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा गया।

साक्षी ने वायरलेस संचार तकनीक का आविष्कार कर प्रदेश की पहली बालिका वैज्ञानिक बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है।


दिल्ली में हुआ सम्मान समारोह

यह सम्मान अखिल भारतीय कलवार, कलाल, कलार महासभा, दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रदान किया गया।
दिल्ली के हरिमंदिर, गुरुतेग बहादुर नगर में संपन्न इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से आए प्रतिभागियों के बीच कुल 19 व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

छत्तीसगढ़ की बेटी साक्षी को यह पुरस्कार उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रविंद्र जायसवाल ने प्रदान किया।
साक्षी के पिता पी.एल. जायसवाल बेमेतरा के डीएवी स्कूल के प्राचार्य हैं, जबकि उनकी माता सुनीता जायसवाल एस.वी. इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्या हैं।


दो साल की मेहनत और अनोखा आविष्कार

साक्षी ने लगातार दो साल के शोध के बाद प्रकाश का उपयोग कर डेटा ट्रांसफर करने वाली वायरलेस तकनीक विकसित की।
इस खोज ने उन्हें न सिर्फ़ गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह दिलाई, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की सबसे कम उम्र (12 वर्ष) में वैज्ञानिक बनने वाली बालिका भी बनीं। इसी उपलब्धि के लिए उन्हें समाज ने सर्वोच्च सम्मान से अलंकृत किया।


परिवार की उपलब्धियाँ

साक्षी के छोटे भाई पियुष जायसवाल भी किसी से कम नहीं। उन्होंने मात्र 13 वर्ष की उम्र में वैज्ञानिक होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
पियुष ने लेखक और शोधकर्ता के रूप में कम उम्र में ही पीएचडी प्रमाणपत्र हासिल किया और इस दौरान अल्बर्ट आइंस्टीन का रिकॉर्ड तोड़ने का कीर्तिमान भी अपने नाम किया।

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