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साहब किसने चुराई गरीबों की पानी टंकी ? : गरियाबंद में 'नेताजी' या सिस्टम निगल गया, सरकारी खजाने से पैसे गायब, धरातल पर विकास लापता

MP CG Times / Sat, Apr 18, 2026

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पेयजल सुविधा के नाम पर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। दो साल पहले मंजूर हुआ पानी टंकी निर्माण और पाइप लाइन विस्तार का काम आज तक धरातल पर शुरू नहीं हो सका, जबकि इसके लिए प्रथम किश्त की राशि भी आहरित कर ली गई है। मामला इतना बढ़ा कि पूर्व जिला पंचायत सदस्य धनमति यादव “गुम हो चुके निर्माण कार्य” को ढूंढने के लिए सीधे देवभोग थाने पहुंच गईं।

थाने पहुंचा “गायब काम” का मामला

पूर्व जिला पंचायत सदस्य धनमति यादव ने लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में जिला पंचायत निधि से वार्ड क्रमांक 13 दासोपारा में बोर खनन, पानी टंकी स्थापना और पाइप लाइन विस्तार का कार्य मंजूर किया गया था।

कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत चिचिया को बनाया गया था। पंचायत स्तर पर चयनित स्थल की जियो टैगिंग भी कराई गई और नोटशीट प्रक्रिया के बाद निर्माण कार्य के लिए लगभग 1.20 लाख रुपये की पहली किश्त भी निकाल ली गई। यह पूरा काम तत्कालीन सरपंच राजकुमार प्रधान के कार्यकाल में हुआ था।

कागजों में काम प्रगति पर, जमीन पर शून्य

आरोप है कि जनपद पंचायत के रिकॉर्ड में यह योजना “प्रगति पर” दिखाई जाती रही, जबकि वास्तविकता यह है कि मौके पर एक ईंट तक नहीं रखी गई।

गर्मी के मौसम में हर साल बढ़ने वाले पेयजल संकट के बीच पूर्व जिला पंचायत सदस्य लगातार 6 महीने से जनपद और जिला प्रशासन को पत्राचार के माध्यम से कार्य पूर्ण कराने की मांग करती रहीं, लेकिन उन्हें न तो कोई स्पष्ट जवाब मिला और न ही काम की स्थिति बताई गई।

थाने में “गुमशुदा निर्माण” की शिकायत

परेशान होकर धनमति यादव शुक्रवार को देवभोग थाना पहुंचीं और थाना प्रभारी फैजुल शाह को आवेदन सौंपते हुए व्यंग्यात्मक रूप में “गायब हो चुके निर्माण कार्य को ढूंढने” की मांग रखी।

600 की आबादी, एक हैंडपंप पर निर्भर दासोपारा

ग्राम पंचायत चिचिया के आश्रित गांव दासोपारा में लगभग 600 की आबादी रहती है। यहां पेयजल का एकमात्र स्रोत सिर्फ वार्ड 14 में मौजूद एक हैंडपंप है।

जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन तो बिछाई गई, लेकिन जल स्रोत की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। इसी वजह से घर-घर जल आपूर्ति का उद्देश्य अधूरा रह गया।

मंजूर योजना के तहत टंकी वार्ड 13 में स्थापित होनी थी, जिससे वार्ड 14 पर दबाव कम होता और ग्रामीणों, खासकर महिलाओं को राहत मिलती।

गर्मी में गहराया संकट, महिलाओं का आक्रोश

भीषण गर्मी के चलते गांव में पेयजल संकट और गहरा गया है। ग्रामीण महिलाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो वे खाली बर्तन लेकर नेशनल हाईवे जाम करने को मजबूर होंगे।

थाना प्रभारी फैजुल शाह ने कहा कि—“प्रारंभिक दृष्टि से मामला पुलिस हस्तक्षेप योग्य अपराध की श्रेणी में नहीं आता, फिर भी 155 के तहत जानकारी दर्ज की जाएगी। साथ ही जनपद से भी पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी कि मंजूर कार्य का क्रियान्वयन क्यों नहीं हुआ।”

जनपद की प्रतिक्रिया: “6 महीने पहले शिकायत मिली थी”

जनपद पंचायत देवभोग के सीईओ बी.के. भगत ने बताया कि—“पूर्व जिला पंचायत सदस्य की ओर से 6 महीने पहले एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी। उस पर क्या कार्रवाई हुई है, इसका रिकॉर्ड देखकर ही बताया जा सकेगा।”

सवालों के घेरे में व्यवस्था

इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता और विकास कार्यों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • पैसा निकला, लेकिन काम क्यों नहीं हुआ?

  • रिकॉर्ड में काम “प्रगति पर” कैसे दिखता रहा?

  • 6 महीने की शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

  • ग्रामीण आज भी मूलभूत पेयजल से क्यों वंचित हैं?

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