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नियम 72 घंटे का, तो महीनों क्यों पड़ा है धान? : गरियाबंद में रुचि नहीं दिखा रहे मीलर्स, बफर लिमिट से 8 गुना ज्यादा स्टॉक, क्या फिर दोहराए जाएंगे घोटाले?

MP CG Times / Wed, Feb 18, 2026

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में समर्थन मूल्य में इस साल 50 लाख 65726 क्विंटल की धान खरीदी हुई।जिसमें से अब तक 2 8 लाख 25888 क्विंटल धान ही परिवहन हो सका है।जिले में अब तक 56.45 प्रतिशत ही धान का उठाव हो सका है जो पिछले दो साल की तुलना में 15 से 20 फीसदी कम है।

हालांकि प्रदेश के 33 जिलों में गरियाबंद की रैंकिंग उठाव के मामले में 15 वे नंबर पर है।पर देरी को देखते हुए समिति की चिंता बढ़ गई है। लगातार ब्रांच स्तर से जिले को पत्राचार कर समिति बफर लिमिट से कई गुना ज्यादा मात्रा फड़ो में मौजूद रहने से रखरखाव पर अतिरिक्त व्यय के अलावा धान के सुखत को लेकर चिन्ता जाहिर कर रही है।

खरीदी मात्रा से वजन घटा तो खरीदी केंद्रों की जिम्मेदारी मान खरीदी में मिलने वाले कमीशन में कटौती के अलावा उन्हें अंतर की राशि भरपाई के लिए उन पर कानूनी हथकंडा अपनाया जाता है।

विलंब की दो बड़ी वजह पढ़िए

वजह 1 मिलरो में रुचि घटी

जिले में कुल 57 राइस मिल मौजूद हैं,जिनमें से इस बार केवल 45 मिलरो के लिए डीओ जारी हो रहा है। आंकड़े पर नजर डाले तो अब तक पिछले 1 माह में 2 1 लाख 17650 क्विंटल मात्रा राइस मिलो के लिए जारी किया गया है, जबकि मिलरो ने अब तक महज 1 3लाख 73110 क्विंटल ही उठाव किया है।

वजह जिन्हें डिओ जारी किया गया है।उनके पास दो साल पहले का भी स्टॉक मौजूद है,एफसीआई में चावल रखने की जगह कम पड़ गई इसके अलावा करोड़ों रुपए का बैंक गारंटी भी मिलरो का फंसा पड़ा है।

वजह2_

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उदंती सीता नदी अभ्यारण्य इलाके में 5 फरवरी से भारी माल वाहकों की आवाजाही नेशनल हाईवे में बंद शाम ढलने के बाद बंद कर दी गई है।प्रतिबंध से पहले रोजाना 150 ट्रक संग्रहण केंद्र कुंडेल पहुंचा करती थी, जिसकी संख्या आधी हो गई है।

हालांकि प्रतिबंध के दायरे में 90 में से केवल 31 खरीदी केंद्र आते है।परिवहन कर्ताओं की लापरवाही के वजह से अन्य स्थानों में भी उठाव प्रभावित है।रिपोर्ट के मुताबिक 16 लाख 98840 क्विंटल का टीओ जारी किया गया है,जिसके एवज में ट्रांसपोर्टर केवल 13 लाख 74 हजार क्रिंटल का उठाव कर पाया है।

दीवानमुड़ा में सबसे कम 39 फीसदी उठाव,भौतिक सत्यापन पर असर

_पिछले दो सालों से खरीदी में अनियमितता को लेकर चर्चित दीवानमुडा खरीदी केंद्र में अब तक सबसे कम उठाव होना कई संदेहों को जन्म देता है।उड़ीसा सीमा से लगे इस केंद्र में 10 लाख 3519 क्विंटल की रिकॉर्ड खरीदी हुई है।

अब तक यहां से 39460 क्विंटल परिवहन किया गया है।जबकि अब 10800 क्विंटल क्षमता वाले खरीदी केंद्र में 64 हजार 5920 क्विंटल शेष है। ओडिशा सीमा से लगे प्रायः सभी केंद्रों में तय बफर लिमिट से कई गुना ज्यादा धान की मात्रा मौजूद है। ऐसे में खरीदी के बाद किए जाने वाले भौतिक सत्यापन की सत्यता पर भी कई सवाल उठाते है।

डीएमओ मार्कफेड किशोर चंद्र ने बताया कि सभी केंद्रों के लिए पर्याप्त टीओ डीओ जारी हुए हैं। सड़क में प्रतिबंध और मिलरो की संख्या कम होने के कारण उठाव में गति नहीं आ पा रही है।

जिला खाद्य अधिकारी अरविंद दुबे ने बताया कि अधिकतम उठाव के लगातार प्रयास जारी है।पूरी क्षमता से उठाव जारी है। मिलरस के द्वारा भी पर्याप्त मात्रा उठाव हो उसके लिए प्रयास जारी है।सभी खरीदी केंद्रों की भौतिक सत्यापन लगातार किए जा रहे हैं,इसमें कोई दिक्कत नहीं है।

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