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: Surajpur: तैमोर पिंगला के रेस्क्यू सेंटर में 'सिविल बहादुर' की मौत, झारखंड से सरगुजा में घुसते पकड़ा गया था

News Desk / Mon, Jan 2, 2023


तैमोर पिंगला के रेस्क्यू सेंटर में हाथी 'सिविल बहादुर' की मौत हो गई।

तैमोर पिंगला के रेस्क्यू सेंटर में हाथी 'सिविल बहादुर' की मौत हो गई। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर स्थित तैमोर पिंगला रेस्क्यू सेंटर में मंगलवार सुबह हाथी 'सिविल बहादुर' की मौत हो गई। इस हाथी की उम्र 75 साल से अधिक बताई गई है। यह किसी भी हाथी की एक औसत उम्र से ज्यादा है। पिछले कुछ समय से यह उम्रदराज हाथी बीमार भी था। वनविभाग के कर्मचारियों के लिए सिविल बहादुर एक साथी की तरह बन गया था। विभाग की ओर से उसका ससम्मान अंतिम संस्कार किया जाएगा।
 
करीब पांच साल से था कैंप में
सिविल बहादुर हाथी को 1990 के दशक में झारखंड से सरगुजा सीमा में प्रवेश करने पर पकड़ा गया था। कुसमी क्षेत्र के सिविल दाग में पकड़े जाने के कारण उसका नामकरण सिविल बहादुर किया गया था। दंतैल हाथी सिविल बहादुर को वनविभाग ने प्रशिक्षित कर लिया था। करीब पांच साल पहले उसे तैमार पिंगला रेस्क्यू सेंटर में लाया गया था। इसके बाद से वह रेस्क्यू सेंटर में सबका चहेता बन गया था। 

औसत से ज्यादा थी हाथी की उम्र
रेस्क्यू सेंटर के चिकित्सक डॉ. अजीत पांडेय ने बताया कि सिविल बहादुर की उम्र हाथियों की औसत उम्र से ज्यादा थी। हाथी की उम्र करीब 50 से 70 साल मानी जाती है। बढ़ती उम्र के साथ उसकी दिक्कतें बढ़ गई थीं। हाथी के शव का पोस्टमार्टम भी किया जाएगा। सिविल बहादुर की मौत से हाथी रेस्क्यू सेंटर में सन्नाटा पसरा हुआ है। उसकी मौत से हर कोई दुखी है। 

विस्तार

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर स्थित तैमोर पिंगला रेस्क्यू सेंटर में मंगलवार सुबह हाथी 'सिविल बहादुर' की मौत हो गई। इस हाथी की उम्र 75 साल से अधिक बताई गई है। यह किसी भी हाथी की एक औसत उम्र से ज्यादा है। पिछले कुछ समय से यह उम्रदराज हाथी बीमार भी था। वनविभाग के कर्मचारियों के लिए सिविल बहादुर एक साथी की तरह बन गया था। विभाग की ओर से उसका ससम्मान अंतिम संस्कार किया जाएगा।


 
करीब पांच साल से था कैंप में
सिविल बहादुर हाथी को 1990 के दशक में झारखंड से सरगुजा सीमा में प्रवेश करने पर पकड़ा गया था। कुसमी क्षेत्र के सिविल दाग में पकड़े जाने के कारण उसका नामकरण सिविल बहादुर किया गया था। दंतैल हाथी सिविल बहादुर को वनविभाग ने प्रशिक्षित कर लिया था। करीब पांच साल पहले उसे तैमार पिंगला रेस्क्यू सेंटर में लाया गया था। इसके बाद से वह रेस्क्यू सेंटर में सबका चहेता बन गया था। 

औसत से ज्यादा थी हाथी की उम्र
रेस्क्यू सेंटर के चिकित्सक डॉ. अजीत पांडेय ने बताया कि सिविल बहादुर की उम्र हाथियों की औसत उम्र से ज्यादा थी। हाथी की उम्र करीब 50 से 70 साल मानी जाती है। बढ़ती उम्र के साथ उसकी दिक्कतें बढ़ गई थीं। हाथी के शव का पोस्टमार्टम भी किया जाएगा। सिविल बहादुर की मौत से हाथी रेस्क्यू सेंटर में सन्नाटा पसरा हुआ है। उसकी मौत से हर कोई दुखी है। 


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