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: Korba: नोएडा के ट्विन टावर के बाद यहां गिरी पावर प्लांट की चिमनी, बारूद लगाकर देखिए कैसे ढहाया

News Desk / Fri, Oct 14, 2022


कोरबा में पावर प्लांट की चिमनी को ध्वस्त कर दिया गया।

कोरबा में पावर प्लांट की चिमनी को ध्वस्त कर दिया गया। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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कर्ज में डूबे नोएडा के ट्विन टावर को गिराए जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक चिमनी को ढहाया गया है। शुक्रवार को ध्वस्त की गई यह चिमनी एक पावर प्लांट प्रोजेक्ट का हिस्सा थी। बिजली उत्पादन नहीं होने से प्लांट पर कर्ज बढ़ रहा था। इसके चलते बैंक प्रबंधन ने शुक्रवार को दिल्ली की एक एजेंसी से बारूद लगवा कर चिमनी को ध्वस्त करा दिया। चिमनी गिराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वंदना पावर की ओर से कोरबा में करीब 14 साल पहले 35-35 मेगावॉट की दो इकाईयों का निर्माण किया गया था। बिजली उत्पादन के लिए प्लांट को चार्ज भी कर लिया गया था, लेकिन खरीदार नहीं मिलने के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका। इसके चलते कंपनी पर कर्ज बढ़ता जा रहा था। इसके बाद इसे बैंक ने अपने कब्जे में ले लिया था।

कुछ माह में ही उत्पादन ठप हो गया
दरअसल, प्राइवेट सेक्टर में बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए साल 2008 में रायपुर में वंदना ग्रुप की नींव रखी गई। इस कंपनी के लिए छुरी के ग्राम चुरीकला में 700 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। यहां 1050 मेगावॉट क्षमता के पावर प्लांट स्थापित किए जाने की योजना थी। पहले चरण में एक ही इकाई 35 मेगावॉट की स्थापित हो पाई। अप्रैल 2021 में इस इकाई की शुरुआत भी हो गई, लेकिन कुछ माह बाद ही तकनीकी और वित्तीय दिक्कतों के चलते उत्पादन शुरू ही नहीं हो सका। 

बैंक ने नीलामी की, लेकिन खरीदार नहीं मिले
इसके चलते प्लांट को बंद करना पड़ा। इससे कंपनी पर कर्ज बढ़ता जा रहा था। हालात यह हो गई कि प्लांट को पंजाब नेशनल बैंक ने अधिगृहित कर लिया। परिसर के नजदीक वंदना पावर की 540- 540 मेगावॉट की दो और इकाइयों का भी निर्माण किया गया है। इन प्लांट में भी बिजली उत्पादन नहीं हो सका। दोनों प्लांट पर करीब आठ हजार करोड़ रुपए का कर्ज बकाया होने की बात कही जा रही है। बैंक ने प्लांट को बेचने के लिए नीलामी प्रक्रिया भी शुरू की, लेकिन कोई खरीदार ही सामने नहीं आया। 
 

विस्तार

कर्ज में डूबे नोएडा के ट्विन टावर को गिराए जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक चिमनी को ढहाया गया है। शुक्रवार को ध्वस्त की गई यह चिमनी एक पावर प्लांट प्रोजेक्ट का हिस्सा थी। बिजली उत्पादन नहीं होने से प्लांट पर कर्ज बढ़ रहा था। इसके चलते बैंक प्रबंधन ने शुक्रवार को दिल्ली की एक एजेंसी से बारूद लगवा कर चिमनी को ध्वस्त करा दिया। चिमनी गिराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वंदना पावर की ओर से कोरबा में करीब 14 साल पहले 35-35 मेगावॉट की दो इकाईयों का निर्माण किया गया था। बिजली उत्पादन के लिए प्लांट को चार्ज भी कर लिया गया था, लेकिन खरीदार नहीं मिलने के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका। इसके चलते कंपनी पर कर्ज बढ़ता जा रहा था। इसके बाद इसे बैंक ने अपने कब्जे में ले लिया था।

कुछ माह में ही उत्पादन ठप हो गया
दरअसल, प्राइवेट सेक्टर में बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए साल 2008 में रायपुर में वंदना ग्रुप की नींव रखी गई। इस कंपनी के लिए छुरी के ग्राम चुरीकला में 700 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। यहां 1050 मेगावॉट क्षमता के पावर प्लांट स्थापित किए जाने की योजना थी। पहले चरण में एक ही इकाई 35 मेगावॉट की स्थापित हो पाई। अप्रैल 2021 में इस इकाई की शुरुआत भी हो गई, लेकिन कुछ माह बाद ही तकनीकी और वित्तीय दिक्कतों के चलते उत्पादन शुरू ही नहीं हो सका। 

बैंक ने नीलामी की, लेकिन खरीदार नहीं मिले
इसके चलते प्लांट को बंद करना पड़ा। इससे कंपनी पर कर्ज बढ़ता जा रहा था। हालात यह हो गई कि प्लांट को पंजाब नेशनल बैंक ने अधिगृहित कर लिया। परिसर के नजदीक वंदना पावर की 540- 540 मेगावॉट की दो और इकाइयों का भी निर्माण किया गया है। इन प्लांट में भी बिजली उत्पादन नहीं हो सका। दोनों प्लांट पर करीब आठ हजार करोड़ रुपए का कर्ज बकाया होने की बात कही जा रही है। बैंक ने प्लांट को बेचने के लिए नीलामी प्रक्रिया भी शुरू की, लेकिन कोई खरीदार ही सामने नहीं आया। 

 

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