Logo
Breaking News Exclusive
स्कूल में दी गई घटिया रोटियां, सोशल मीडिया के जरिए बच्चों की गुहार गुड़ी पड़वा, Eid और Ram Navami पर क्या छुट्टी है, शेयर बाजार खुला रहेगा या बंद? विदेशी आग ने मचाई तबाही, जानिए क्यों झुलसा शेयर बाजार ? गुस्साए ग्रामीणों ने बनाया बंधक, 500 पैकेट सरकारी खाद बारिश में भीगी स्ट्रोक पीड़ित को 17KM खटिया से ढोकर लाया गया, एंबुलेंस नहीं पहुंची, BMO 15 घंटे से बेखबर Ramkrishna Hospital में गटर बना मौत का कुंआ, तड़प-तड़पकर मरे 3, रोते-बिलखते रहे परिजन तांत्रिक बोले- 1 लाख में गर्लफ्रेंड आएगी, 5 लाख में मां का काम तमाम, कमिश्नर को भी पैरालाइज्ड कर देंगे BJP नेता समेत 3 की मौत, 30 मिनट तक कार में तड़पते रहे, कांच फोड़कर सिर बाहर आए 28 हजार महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, ‘उजास’ पत्रिका का विमोचन खेतों में बिछी सफेद चादर, किसानों की फसल चौपट, अब बीमारी का खतरा स्कूल में दी गई घटिया रोटियां, सोशल मीडिया के जरिए बच्चों की गुहार गुड़ी पड़वा, Eid और Ram Navami पर क्या छुट्टी है, शेयर बाजार खुला रहेगा या बंद? विदेशी आग ने मचाई तबाही, जानिए क्यों झुलसा शेयर बाजार ? गुस्साए ग्रामीणों ने बनाया बंधक, 500 पैकेट सरकारी खाद बारिश में भीगी स्ट्रोक पीड़ित को 17KM खटिया से ढोकर लाया गया, एंबुलेंस नहीं पहुंची, BMO 15 घंटे से बेखबर Ramkrishna Hospital में गटर बना मौत का कुंआ, तड़प-तड़पकर मरे 3, रोते-बिलखते रहे परिजन तांत्रिक बोले- 1 लाख में गर्लफ्रेंड आएगी, 5 लाख में मां का काम तमाम, कमिश्नर को भी पैरालाइज्ड कर देंगे BJP नेता समेत 3 की मौत, 30 मिनट तक कार में तड़पते रहे, कांच फोड़कर सिर बाहर आए 28 हजार महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, ‘उजास’ पत्रिका का विमोचन खेतों में बिछी सफेद चादर, किसानों की फसल चौपट, अब बीमारी का खतरा

: छत्तीसगढ़ में दरवाजे पर क्यों लगाते हैं धान की झालर, सीएम भूपेश बघेल में निभाते हैं ये परंपरा, जानें कारण

News Desk / Sat, Oct 22, 2022


रायपुर: धनतेरस के साथ ही देशभर में दिवाली का त्योहार शुरू हो गया है। छत्‍तीसगढ़ में भी धनतेरस के दिन बाजारों में सुबह से भीड़ दिखाई दे रही है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिवाली की सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार अपने आवास के गेट पर धान की झालर लगाकर इस रस्म की शुरुआत की। बता दें कि दीपावली के दौरान खेतों में जब नई फसल पककर तैयार हो जाती है, तब गांववाले धान की नर्म बालियों से कलात्मक झालर तैयार करते हैं।

छत्तीसगढ़ की परंपरा के अनुसार, धान की झालर को अपने घरों की सजावट कर लोग अपनी सुख और समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्हें पूजन के लिए आमंत्रित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि उनका यह आमंत्रण उन चिड़ियों के माध्यम से देवी तक पहुंचता है, जो धान के दाने चुगने आंगन और दरवाजे पर उतरती हैं।
इसे भी पढ़ें-
छत्तीसगढ़ में तीन दिनों तक दिखेगी आदिम संस्कृति की झलक, 9 देशों और 38 राज्यों के 1500 कलाकार करेंगे शिरकत

प्रकृति के साथ मनाते हैं खुशियां
लोगों का मानना है कि इस तरह प्रदेश की लोक-संस्कृति अपनी खुशियों को प्रकृति के साथ बांटती है और उसे सहेजती है। छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर सरगुजा तक धान की झालर घर के आंगन और दरवाजे पर लटकाए जाने की परंपरा है। जिसे पहटा अथवा पिंजरा भी कहा जाता है।

बाजारों में बिकती हैं झालरें
राज्‍य में धान की झालरों को अपने घरों में सजाने की परंपरा बहुत पुरानी है। धनतरेस के साथ ही बाजारों में भी झालरें बिकने लगती हैं। बाजारों में इस तरह की झालर की खूब डिमांड रहती है।


Source link

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन