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गरियाबंद में भी तो मुसवा कांड नहीं हो गया ? : 22 खरीदी केंद्र से 600 ट्रक धान उठा, लेकिन पावती ही नहीं, कहीं करोड़ों की साजिश तो नहीं ?

MP CG Times / Sun, Feb 22, 2026

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के एक मात्र धान संग्रहण केंद्र कुंडेल में गंभीर लापरवाही सामने आया है।देवभोग और गोहरापदर खरीदी केंद्र से धान भर कर भेजे गए ट्रकों की जिस पावती को 24 घंटे के भीतर केंद्रों को दिया जाना है वह 15 दिनों से लंबित पड़ा हुआ है।

देवभोग ब्रांच मैनेजर अमर सिंग ध्रुव ने अपने उच्च अधिकारियों को इसकी लिखित जानकारी दिया है।ध्रुव ने बताया कि देवभोग ब्रांच के अधीन आने वाले 10 खरीदी केंद्रों से परिवहन कर ट्रकों में भेजे गए 362 ट्रक धान की पावती केंद्रों को नहीं मिला है।इससे गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है।इतना ही मात्रा गोहरापदर केंद्र से भेजे गए ट्रकों का बताया जा रहा है।

वाईफाई आज लगा है,काम में तेजी आएगी

संग्रहण केंद्र प्रभारी जगमोहन साहू ने भी माना कि एंट्री कार्य काफी विलंब से चल रहा है ,पर परिवहन कर लाए गए प्रत्येक ट्रक की रिसिविंग की जानकारी ऑन लाइन मॉनिटरिंग ऐप में चढ़ाई जा रही है। अपनी मजबूरी बताते हुए प्रभारी ने कहा कि माहभर पहले तक 1300 ट्रकों की एंट्री पीछे चल रही थी। अब वह संख्या आधी हो गई है।

कारण बताते हुए कहा कि यहां ऑनलाइन कार्य ऑपरेटरों के मोबाइल से हो रहा था,बिजली सेवा बाधित होने से सिस्टम भी काम करना बंद कर रहा था।लेकिन आज से वाईफाई लगाया गया है। इन्वारेट लगाया गया ताकि बिजली बाधा न पहुंचा सके।

साहू ने कहा कि केंद्र में दो कमयूटर ऑपरेटर मौजूद है इसकी संख्या 3 करने अधिकारियों के समक्ष मांग रखी गई है ।प्रभारी ने दावा किया है कि जल्द ही सभी प्राप्त ट्रकों की प्रविष्टियां संधारित कर दिया जाएगा।

गड़बड़ी हुई तो सुखत बताकर समिति से होती है वसूली

ट्रकों का रिसीव विलंब से मिलना। पिछले कई सालों से सिलसिला जारी है। उठाव और रखरखाव के बीच फंसे खरीदी प्रभारी हिसाब मिलान में गड़बड़ी की चूक कर जाते हैं। बताया जा रहा है कि पिछले साल देवभोग के 10 खरीदी केंद्र में 6753 क्विंटल धान की सुखत बताया गया, तय मानक से अत्याधिक मात्रा के लिए खरीदी केंद्रों ने 2करोड़ 22 लाख की भरपाई किया था।

यह भरपाई धान खरीदी कर अथवा मिलर्स से ताल मेल कर उनके कोटे में उठाव दर्शा कर भरपाई किया था। ट्रकों की रिसीव मिलान नहीं होने के कारण झखरपारा में 60 लाख रुपए के धान की हेराफेरी में खरीदी प्रभारी को जेल भेज दिया गया था।आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहे खरीदी प्रभारियों की डर है कि इस बार उनके साथ घटना की पुनरावृत्ति न हो जाए।

वजन में हेर फेर का बड़ा खेल भी एक वजह

पावती को पेंडिंग रखने के पीछे वजन में खेल को भी एक वजह बताया जाता है।जीपीएस ट्रैकिंग के कारण धान से भरे ट्रक को खरीदी केंद्र से संग्रहण केंद्र तत्काल दिखाया जाता है पर पहुंचे ट्रक में धान की निर्धारित मात्रा की जानकारी पावती में दी जाती है। देवभोग गौहरापदर ब्रांच के खरीदी केंद्र से संग्रहण केंद्र की दूरी 100 किमी से ज्यादा है। इस क्षेत्र के धर्मकांटा को भी मान्य नहीं दिया गया है।

संग्रहण केंद्र में होने वाले वजन को ही मान्यता देकर रखने की परंपरा है।ऐसे में शॉर्टेज बता कर खरीदी प्रभारियों को संग्रहण केंद्र तलब किया जाता है फिर भरपाई के नाम पर सेटिंग की परिपाटी चली आ रही है।दरअसल ओडिसा सीमा से लगे धान खरीदी केंद्रो में ओडिसा से धान आवक किसी से छुपी नहीं है। ऐसे में संग्रहण केंद्र में पावती के पेंडिंग में कमाई का रास्ता यहां से जुड़े लोग निकालते हैं।

मुसवा कांड के बाद संग्रहण केंद्र की खामियां छुपाने की आशंका

कवर्धा में संग्रहण केंद्र में बड़ी मात्रा में शॉर्टेज को छुपाने जिस तरह चूहे का आड़ लिया गया,आशंका है कि गरियाबंद के कुंडेल में किसी गड़बड़ी को छुपाने नियमित पावती नहीं दिया जा रहा है।पावती देने का मतलब है प्राप्त मात्रा का ऑन लाइन एंट्री।

ऐसे में कहा जा रहा है कि सटीक आंकड़ा अगर अपलोड हुआ और कुंडेल केंद्र की भौतिक सत्यापन हुआ तो कही कुंडली न खुल जाए।कवर्धा में हुए कांड से गरियाबंद डीएमओ रहे किशोर चंद्रा की भूमिका थी। 4 दिन पहले ही चंद्रा को हटाया गया है।आरोप था कि उठाव नियमित नहीं हो रहा था।पर हटाने की ये वजह गले नहीं उतर रही है।जांच हुआ तो हो सकता है कोई बड़ा मसला मामला सामने आ जाए

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