MP में 12 लाशें, चीखते परिवार और धधकती चिताएं : ललितपुर टू सागर 250KM शराब तस्करी रूट; EXCLUSIVE रिपोर्ट में जानिए 20 ‘कातिलों’ का किरदार ?
MP CG Times / Sun, Sep 6, 2026
12 लाशें12 परिवारों का उजड़ना…और गांवों में पसरा मातम। कहीं घर से उठी चीखें थम नहीं रही हैं, कहीं आंगन से अर्थी उठ रही है। जिन गलियों में बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब शोक है। जहरीली शराब ने 12 जिंदगियां छीन लीं। 109 लोग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। कई मरीजों के शरीर नीले पड़ गए। शनिवार रात तीन और मौतों ने गांवों के दर्द को और गहरा कर दिया।
एक बोतल शराब…और पूरा घर तबाह। 4 सितंबर की शाम राजेंद्र लोधी ने नौराज में जुझार लोधी की दुकान से 'बंबईया ब्रांड' की शराब खरीदी थी। इसके बाद तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान मौत हो गई। दूसरे घरों में भी उल्टियां, बेहोशी और शरीर नीला पड़ने की शिकायतें सामने आईं।
अब गांवों में सिर्फ चिताओं का धुआं है। किसी बच्चे ने पिता खोया, किसी परिवार ने अपना सहारा। जिन हाथों में कल तक खेतों की मिट्टी थी, आज वही हाथ अर्थी पर हैं। चिताएं जलती रहीं और पीछे रह गए परिवार पूछते रहे- कुछ लोगों के मुनाफे की कीमत आखिर इतनी जिंदगियां क्यों बनीं?
FIR में सामने आया कि ज्यादा मुनाफे के लिए जहरीले रसायन से तैयार शराब गांव-गांव पहुंचाई और बेची गई। 20 आरोपी बांदा थाने और 10 विनायका थाने में नामजद हैं। जांच की कड़ियां सागर से उत्तर प्रदेश के ललितपुर तक पहुंच रही हैं। पढ़िए इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में शराब कहां बनी, किसने तैयार की, किसने खरीदी, किसके जरिए सागर पहुंची और गांवों में किसने बेची?

ये कहानी है... एक शराब की बोतल से 12 मौतों तक पहुंची पूरी चेन की
4 सितंबर की शाम। नौराज गांव में राजेंद्र लोधी ने शराब खरीदी। FIR में दर्ज फरियादी अनूप सिंह लोधी के बयान के मुताबिक राजेंद्र ने गांव के जुझार लोधी की दुकान से सस्ती ‘बम्बइया ब्रांड’ शराब ली और पी। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
एक व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने की घटना जल्द ही कई परिवारों की त्रासदी में बदल गई। गांव और आसपास के इलाकों से शराब पीने वाले लोगों के अस्पताल पहुंचने की खबरें आने लगीं। कुछ की हालत इतनी बिगड़ी कि शरीर नीला पड़ गया। इलाज के बावजूद मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया।
प्रारंभिक जांच में शराब में मेथेनॉल की मिलावट सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जहरीले रसायन वाली शराब तैयार करने की शुरुआत कहां हुई थी।

नौराज की दुकान से शुरू हुई FIR की पहली कड़ी
FIR में सबसे पहले जिस स्थानीय कड़ी का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, वह जुझार लोधी है। फरियादी के बयान के मुताबिक राजेंद्र ने उसी की दुकान से शराब खरीदी थी। जुझार पर नौराज में अवैध शराब बेचने का आरोप है।
लेकिन पुलिस के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि शराब किसने बेची। सवाल यह है कि जुझार तक पहुंची शराब आई कहां से? इसी सवाल के बाद जांच नौराज से निकलकर दूसरे आरोपियों और सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचती है।
जुझार के साथ नौराज के चार और नाम
FIR में जुझार के अलावा दिनेश सिंह लोधी उर्फ दिवेश, सौरभ लोधी, गोविन्द लोधी और मनोहर लोधी को भी आरोपी बनाया गया है। इन सभी के पते नौराज, थाना बंडा, जिला सागर के हैं। FIR में इनके नाम आने के बाद पुलिस स्थानीय स्तर पर शराब की खरीद-बिक्री और वितरण की कड़ी की जांच कर रही है।
नौराज में अब यह पता लगाना जांच का अहम हिस्सा है कि शराब सिर्फ एक दुकान से बिक रही थी या इसके पीछे स्थानीय स्तर पर लोगों का पूरा नेटवर्क काम कर रहा था।
कहानी में आता है लाइसेंसी शराब ठेकेदार का नाम
इसके बाद FIR में यशवंत सिंह ठाकुर का नाम आता है। वे बरेठी के लाइसेंसी शराब ठेकेदार हैं। यह नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सिर्फ गांव में अवैध बिक्री तक सीमित नहीं है।
FIR में लाइसेंसी शराब ठेकेदार का नाम आने के बाद पुलिस यह भी जांच रही है कि वैध शराब कारोबार और अवैध शराब के बीच कहीं कोई कड़ी थी या नहीं।यशवंत सिंह की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
बंडा के मनीष और आशीष भी आरोपी
FIR में मनीष लोधी और आशीष साहू को भी आरोपी बनाया गया है। दोनों बंडा क्षेत्र से जुड़े हैं। इन नामों के साथ जांच नौराज गांव से आगे बढ़कर बंडा क्षेत्र के व्यापक नेटवर्क की तरफ जाती है। पुलिस देख रही है कि शराब किन लोगों के संपर्क में थी और अलग-अलग स्थानों तक उसका वितरण कैसे हुआ।
फिर सामने आता है UP का ललितपुर कनेक्शन
जांच की महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक आकाश राय का नाम है। उसका पता मड़ावरा, जिला ललितपुर, उत्तर प्रदेश दर्ज है। सागर पुलिस की शुरुआती जांच में शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से होने की आशंका सामने आई है। ऐसे में आकाश राय का नाम जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है।
पुलिस पता लगाने में जुटी है कि ललितपुर से शराब की खेप कहां से चली, उसे किसने खरीदा, किस वाहन या माध्यम से सागर पहुंचाया गया और स्थानीय स्तर पर इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। यही वह कड़ी है, जहां सागर के गांवों में बिक रही शराब की कहानी उत्तर प्रदेश के ललितपुर तक पहुंचती है।
ललितपुर से सागर तक सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, पूरा नेटवर्क?
FIR में रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविन्द, रविन्द्र सिंह, रोहित लोधी, माखन और अनिकेत गंधर्व के नाम भी शामिल हैं। इनमें रविन्द्र सिंह का पता ग्राम बसगोई, जिला टीकमगढ़ है। बाकी आरोपी सागर जिले से जुड़े हैं।
इन आरोपियों की मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या शराब की सप्लाई एक सीधी लाइन में हुई थी या इसके बीच कई मध्यस्थ काम कर रहे थे?
पुलिस इसी नेटवर्क को जोड़ने में जुटी है। किस आरोपी का संपर्क किससे था, किसने शराब खरीदी, किसने उसे आगे भेजा और किसने स्थानीय स्तर पर उसे खपाया—इन सवालों के जवाब जांच से निकलेंगे।

सप्लाई से बिक्री तक तीन अहम कड़ियां
जहरीली शराब कांड की जांच में आकाश राय, जुझार लोधी और यशवंत सिंह ठाकुर की भूमिका अहम मानी जा रही है। आकाश राय पर ललितपुर से सागर तक शराब की सप्लाई और परिवहन नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है, जबकि जुझार लोधी पर नौराज गांव में शराब की अवैध बिक्री करने का आरोप है।
फरियादी के मुताबिक राजेंद्र ने उसी से शराब खरीदी थी। वहीं यशवंत सिंह ठाकुर बरेठी के लाइसेंसी शराब ठेकेदार हैं और अवैध शराब के नेटवर्क में उनकी भूमिका की पुलिस जांच कर रही है। इन तीनों की भूमिका के आधार पर पुलिस सप्लाई, परिवहन और स्थानीय बिक्री की पूरी कड़ी खंगाल रही है।
गूगरा-गूगरा खुर्द की स्थानीय कड़ी
नेटवर्क की आखिरी कड़ियों में विशाल लोधी, मंगल रजक और राजा सिंह के नाम आते हैं। इनके पते गूगरा और गूगरा खुर्द, थाना बंडा, जिला सागर से जुड़े हैं।
पुलिस इन आरोपियों की भूमिका स्थानीय स्तर पर शराब की सप्लाई और बिक्री में तलाश रही है।
यानी जांच की एक लाइन ऐसी बनती है। बाहर से शराब की सप्लाई → सागर में नेटवर्क → बंडा क्षेत्र → गांव → स्थानीय बिक्री → लोगों तक शराब। लेकिन इस पूरी चेन में जहरीली शराब तैयार करने वाला व्यक्ति या ठिकाना कौन था, यह अभी जांच का सबसे बड़ा सवाल है।

20 नामों से खुलती है शराब नेटवर्क की तस्वीर
FIR में शामिल 20 आरोपियों को उनके संभावित नेटवर्क के आधार पर मोटे तौर पर तीन हिस्सों में देखा जा सकता है।
पहली कड़ी, स्थानीय बिक्री: नौराज और आसपास के क्षेत्र में शराब बेचने के आरोपी।
दूसरी कड़ी, सप्लाई और वितरण: सागर, टीकमगढ़ और ललितपुर से जुड़े आरोपी।
तीसरी कड़ी, स्थानीय खपत तक पहुंच: गूगरा और गूगरा खुर्द से जुड़े आरोपी।
हालांकि यह वर्गीकरण जांच की दिशा समझने के लिए है। किसी आरोपी की अंतिम भूमिका अदालत या जांच एजेंसी की पुष्टि के बिना तय नहीं मानी जा सकती।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल: जहरीली शराब बनी कहां?
मेथेनॉल की मिलावट सामने आने के बाद जांच का सबसे अहम हिस्सा शराब के निर्माण स्थल तक पहुंचना है। अगर शराब बाहर से आई थी तो उसका निर्माण कहां हुआ? अगर ललितपुर से सप्लाई हुई तो ललितपुर में किसने तैयार की?
अगर वहां से सिर्फ कुछ सामग्री या शराब आई थी तो सागर में इसे किसने तैयार किया? और सबसे अहम- मेथेनॉल किसने उपलब्ध कराया? यही वह सवाल है जिसका जवाब 12 मौतों की पूरी कहानी का सबसे बड़ा खुलासा कर सकता है।
12 मौतों के बाद पुलिस ने कस दिया शिकंजा
एसपी अनुराग सुजानिया के निर्देश पर पुलिस अवैध शराब के निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। शराब के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। अलग-अलग ठिकानों पर पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
बंडा थाने में दर्ज मामले में 20 नामजद आरोपी हैं। इनमें से 10 को पुलिस ने अभिरक्षा में लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। विनायका थाने में भी 10 आरोपियों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है।
यानी अब जांच सिर्फ एक FIR तक सीमित नहीं है। पुलिस अलग-अलग थाना क्षेत्रों के मामलों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की तस्वीर तैयार कर रही है।

अफसरों पर भी कार्रवाई, 5 सस्पेंड
जहरीली शराब कांड में विभागीय लापरवाही के आरोप में आबकारी और पुलिस विभाग के 5 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते, बंडा की आबकारी उप निरीक्षक रोशनी उरेते, गूगरा चौकी प्रभारी ASI पूरन सिंह और बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।
इसके अलावा संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरज श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है। इस कार्रवाई ने एक दूसरा सवाल भी खड़ा किया है।अगर क्षेत्र में अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय था तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
मंत्री ने कहा- मेथेनॉल की पूरी चेन खंगालेंगे
डिप्टी सीएम और जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने समीक्षा बैठक में मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रारंभिक जांच में शराब में मेथेनॉल की मिलावट सामने आई है। अब पुलिस इस मेथेनॉल के स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। यानी जांच अब सिर्फ ‘किसने शराब बेची?’ तक नहीं रहेगी। जांच का अगला सवाल है। ‘किसने जहरीली शराब तैयार की?’
FIR के 20 नामों के पीछे छिपे 5 बड़े सवाल
1. शराब तैयार किसने की?
FIR में कई आरोपी हैं, लेकिन जहरीली शराब बनाने वाले मुख्य स्रोत तक पहुंचना अभी सबसे अहम चुनौती है।
2. मेथेनॉल कहां से आया?
प्रारंभिक जांच में मेथेनॉल की मिलावट सामने आई है। इसका स्रोत पता करना जरूरी है।
3. ललितपुर कनेक्शन कितना बड़ा है?
आकाश राय का पता ललितपुर का है और पुलिस सप्लाई की कड़ी ललितपुर तक पहुंचने की बात कह रही है। अब इस कनेक्शन की पूरी पुष्टि जांच से होगी।
4. नौराज में शराब कौन-कौन बेच रहा था?
जुझार समेत कई स्थानीय नाम FIR में हैं। पुलिस को इनकी आपसी भूमिका और संपर्क स्पष्ट करने होंगे।
5. 12 मौतों वाली शराब की खेप कितनी बड़ी थी?
अगर एक ही नेटवर्क से शराब आई थी तो यह पता लगाना जरूरी है कि वह कितने गांवों तक पहुंची और कितने लोगों ने उसे खरीदा।

यह सिर्फ शराब बेचने का मामला नहीं
FIR और अब तक सामने आई जांच को जोड़ें तो सागर शराब कांड की तस्वीर सिर्फ एक दुकान या एक गांव तक सीमित नहीं दिखती। नौराज की स्थानीय बिक्री से लेकर बंडा क्षेत्र, दूसरे जिलों और उत्तर प्रदेश के ललितपुर तक कई कड़ियां जांच के घेरे में हैं।
एक तरफ 12 परिवार अपनों को खो चुके हैं। दूसरी तरफ 109 मरीज अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। पुलिस ने 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, 10 को बंडा मामले में अभिरक्षा में लिया गया है और कई जगह छापेमारी चल रही है। लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा अध्याय अभी बाकी है।
12 मौतों वाली शराब की पहली बोतल आखिर किसने बनाई थी?
यही वह सवाल है, जिसका जवाब मिलने पर पता चलेगा कि इस जहरीली शराब की चेन में कौन सिर्फ आखिरी विक्रेता था और कौन उस नेटवर्क की सबसे ऊपर की कड़ी।
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