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कभी हाथ में चॉक और सामने थे बच्चे, फिर राजनीति में रचा इतिहास : पूर्व CM जोगी से लेकर डिप्टी सीएम विजय शर्मा तक; छत्तीसगढ़ के ये 20+ दिग्गज पहले थे 'मास्टर साहब'

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में ऐसे दर्जनों कद्दावर चेहरे हैं, जिनके राजनीतिक करियर की शुरुआत किसी चुनावी मंच या आंदोलन से नहीं, बल्कि क्लासरूम के ब्लैकबोर्ड और सामने बैठे मासूम बच्चों से हुई। कभी हाथ में चॉक-डस्टर और हाजिरी का रजिस्टर थामने वाले इन गुरुओं ने वक्त के साथ शिक्षक की नौकरी छोड़ राजनीति के मैदान में कदम रखा।

इनमें से किसी ने छत्तीसगढ़ का पहला मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा, तो कोई उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, सांसद और पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना। 'शिक्षक दिवस' के पावन अवसर पर पढ़िए ऐसे ही दिग्गज नेताओं के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी:

1. प्रोफेसर और शिक्षक जो पहुंचे सत्ता के शीर्ष पदों पर

अजीत जोगी: इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर से पहले CM तक का सफर

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी राजनीति में आने से पहले रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में प्राध्यापक (1964-65) थे। इसके बाद उन्होंने IAS की परीक्षा पास की और कलेक्टर बने। बाद में प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में आए और प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उनकी पत्नी डॉ. रेणु जोगी भी रायपुर मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग विभाग की प्रोफेसर थीं, जो बाद में कोटा विधानसभा से विधायक बनीं।

विजय शर्मा: फिजिक्स की क्लास से डिप्टी सीएम की कुर्सी

वर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने फिजिक्स में एमएससी करने के बाद 1996 से 1998 के बीच रायपुर के सेंट्रल कॉलेज, प्रगति कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर के रूप में पढ़ाया। एबीवीपी (ABVP) से छात्र राजनीति शुरू करने वाले विजय शर्मा 2023 में कवर्धा से विधायक चुने गए और पहली ही बार में डिप्टी सीएम बने।

रामविचार नेताम: प्राथमिक स्कूल के शिक्षक से कैबिनेट मंत्री

बलरामपुर के सनावल गांव से आने वाले कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बैंक की नौकरी छोड़कर रामचंद्रपुर ब्लॉक के चाकी प्राथमिक स्कूल में बच्चों को पढ़ाया। 1990 में पहली बार विधायक बनने के बाद वे लगातार अविभाजित मप्र और छत्तीसगढ़ में कई बार मंत्री व संगठन के शीर्ष पदों पर रहे।

टंकराम वर्मा: सरकारी शिक्षक से कैबिनेट मंत्री

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने करियर की शुरुआत सरकारी शिक्षक के रूप में की थी। शिक्षा विभाग की नौकरी से वीआरएस/रिटायरमेंट के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए, रमेश बैस के निज सहायक (PA) रहे और 2023 में बलौदाबाजार से पहली बार चुनाव जीतकर सीधे कैबिनेट मंत्री बने।

मोहन मरकाम: शिक्षाकर्मी से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मंत्री

भूपेश सरकार में मंत्री रहे मोहन मरकाम शिक्षा विभाग में शिक्षाकर्मी वर्ग-1 और वर्ग-2 के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। 1990 से कांग्रेस में सक्रिय मरकाम 2008 में कोंडागांव से विधायक बने। आगे चलकर वे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष भी रहे।

2. संगठन और विधानसभा के 'अनुभावी' मास्टर साहब

विक्रम उसेंडी: पढ़ाने के पेशे से शुरुआत करने वाले विक्रम उसेंडी बाद में सक्रिय राजनीति में आए। वे विधायक, सांसद, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और मंत्री पदों पर रहे।

रामपुकार सिंह: पत्थलगांव के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधानसभा के पूर्व प्रोटेम स्पीकर रामपुकार सिंह राजनीति में आने से पहले शिक्षक थे। वे 8 बार विधायक चुने गए।

डोमनलाल कोर्सेवाड़ा: 1972 में सहायक शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू करने वाले

कोर्सेवाड़ा ने 26 साल तक पढ़ाया और 1998 में व्याख्याता पद से रिटायर हुए। इसके बाद वे अहिवारा से भाजपा के विधायक बने।

चंद्रदेव राय: बिलाईगढ़ के पूर्व विधायक और संसदीय सचिव चंद्रदेव राय 2003 में शिक्षाकर्मी बने थे। वे शिक्षाकर्मी संघ के बड़े नेता रहे और कर्मचारी आंदोलन के रास्ते राजनीति में पहुंचे।

3. महिला नेत्रियों ने भी क्लासरूम से विधानसभा तक रचा इतिहास

सावित्री मनोज मंडावी: रायपुर के कटोरा तालाब स्थित शासकीय स्कूल में व्याख्याता थीं। पति मनोज मंडावी के निधन के बाद 2022 के भानुप्रतापपुर उपचुनाव में नौकरी छोड़कर मैदान में उतरीं और विधायक बनीं।

चातुरी नंद: सरायपाली की विधायक चातुरी नंद शासकीय व्याख्याता की नौकरी छोड़कर 2023 में पहली बार चुनाव लड़ीं और जीतीं। विधायक बनने के बाद भी वे स्कूलों में जाकर बच्चों को साइंस पढ़ाती नजर आती हैं।

4. दिग्गज आदिवासी नेता जो कभी थे शिक्षक

छत्तीसगढ़ के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में जनचेतना फैलाने का काम भी कभी इन्हीं 'मास्टर साहबों' ने किया, जो बाद में दिग्गज नेता बने:

अरविंद नेताम: पूर्व केंद्रीय मंत्री और 4 बार के सांसद अरविंद नेताम राजनीति में आने से पहले शिक्षक थे।

नंदकुमार साय: पूर्व सांसद, राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष व वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय भी शुरुआती दौर में शिक्षक रहे।

डॉ. शक्राजीत नायक: कॉलेज में प्रोफेसर रहे, फिर रायगढ़ से विधायक और छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री बने।

देवलाल दुग्गा: शिक्षक की नौकरी के बाद विधायक बने और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रहे।

सिद्धनाथ पैकरा: सामरी से विधायक और रमन सरकार में संसदीय सचिव रहे।

अन्य प्रमुख नाम: झतिरूराम बघेल, राजाराम तोड़ेम, अंतूराम कश्यप, भुसरूराम नाग, अघन सिंह ठाकुर, मंतूराम पवार, संपत सिंह भंडारी, डॉ. रामलाल भारद्वाज और कृष्ण कुमार ध्रुव जैसे कई ऐसे नाम हैं, जिन्होंने पहले ब्लैकबोर्ड पर बच्चों की तकदीर लिखी और बाद में राजनीति के मैदान में उतरकर पूरे समाज और प्रदेश की दशा और दिशा बदली।

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