अनूपपुर में अचानक धंसी जमीन, 30 फीट गहरा बना गड्ढा : 100 मीटर दूर है बस्ती, नीचे पानी बहने की आवाज से खौफ में लोग, फेंसिंग शुरू, अलर्ट जारी
अनूपपुर जिले के राजनगर (एसईसीएल हसदेव क्षेत्र) अंतर्गत नगर परिषद बनगवां के वार्ड नंबर 12 (पुराना मुहाड़ा) से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। शुक्रवार दोपहर यहां वीरेंद्र सिंह की बाउंड्रीवॉल के ठीक सामने अचानक जमीन धंस गई और कुछ ही घंटों में देखते ही देखते 8 से 10 फीट चौड़ा और करीब 30 फीट गहरा विशाल गोफ (गड्ढा) बन गया।
गड्ढे के अंदर से नीचे तेज गति में पानी बहने की भयावह आवाजें आ रही हैं, जिससे आसपास के रहवासियों में दहशत फैल गई है।
100 मीटर दूर घनी बस्ती: और जमीन धंसने की आशंका
घटना की जानकारी मिलते ही नगर परिषद बनगवां के सीएमओ लखन पनिका, नगर परिषद अध्यक्ष और स्थानीय पार्षद तत्काल मौके पर पहुंचे। घटनास्थल से महज 100 मीटर की दूरी पर आवासीय कॉलोनी स्थित है, जहां बैगा आदिवासी परिवार और अन्य नागरिक निवास करते हैं।
सीएमओ लखन पनिका ने बताया कि गोफ काफी गहरा है और नीचे पानी का तेज बहाव है। आशंका जताई जा रही है कि आसपास की जमीन और धंस सकती है या गड्ढा और चौड़ा हो सकता है।
हादसों को रोकने के लिए नगर परिषद ने गोफ के चारों तरफ लोहे/जाली की फेंसिंग कराने का काम शुरू कर दिया है और लोगों को उस तरफ न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
SECL की लापरवाही? 9-10 कोयला खदानों के ऊपर बसा है इलाका
राजनगर क्षेत्र एसईसीएल (SECL) के हसदेव एरिया में आता है। इस इलाके में करीब 9 से 10 कोयला खदानें (अंडरग्राउंड और ओपनकास्ट) संचालित रही हैं।
अधिकारियों का मानना है कि जिस जगह जमीन धंसी है, वह खदान का 'डिप्लेरिंग एरिया' (कोयला निकालने के बाद खाली छोड़ा गया हिस्सा) हो सकता है। प्रशासनिक स्तर पर कॉलरी प्रबंधन (SECL) को तत्काल सूचना देकर गड्ढे को मिट्टी/मलबे से भरने के निर्देश दिए गए हैं। SECL के जीएम ने जल्द भराव कार्य शुरू कराने का भरोसा दिया है।
मालगा में भी धंस चुकी है जमीन, पेड़ समा गया था अंदर
उल्लेखनीय है कि हसदेव क्षेत्र में जमीन धंसने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले आमाडांड क्षेत्र के मालगा गांव में भी इसी तरह जमीन धंसने से 18 से 20 फीट लंबा विशाल पेड़ अचानक जमीन के अंदर समा गया था।
उस समय मध्य प्रदेश शासन के राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल और तत्कालीन कलेक्टर ने मौका मुआयना कर कॉलरी प्रबंधन को सुरक्षा के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद SECL प्रबंधन की अनदेखी जारी है, जिससे हजारों लोगों की जान जोखिम में पड़ी हुई है।
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