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IGNTU में स्टूडेंट से हैवानियत की इनसाइड स्टोरी : लहू से सना चेहरा, टूटी नाक, आंखों में खून का थक्का, हिरोस पर बरसे लात-घूंसे-मुक्के, पढ़िए हॉस्टल की सीक्रेट फाइल

अमरकंटक से ग्राउंड रिपोर्ट | IGNTU Amarkantak Ground Reality | Campus Violence Exposed: रात के सन्नाटे में जब पूरा हॉस्टल नींद की आगोश में था, उसी वक्त एक कमरे के भीतर इंसानियत को बेरहमी से पीटा जा रहा था। खून से सना चेहरा, टूटी नाक, आंखों के पास जमे थक्के और फर्श पर बिखरी चीखें… यह किसी जंग का मैदान नहीं था, बल्कि देश के एक केंद्रीय विश्वविद्यालय का हॉस्टल था। सवाल पूछने का जुर्म सिर्फ इतना था कि वह “बाहरी” था। नाम बताया, राज्य बताया और बस उसी पल वह छात्र इंसान से शिकार बना दिया गया। लातें, मुक्के, गालियां और मौत की धमकी… मार तब तक जारी रही, जब तक शरीर ने जवाब नहीं दे दिया।

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यह दर्द सिर्फ एक छात्र का नहीं है, यह उस सिस्टम की क्रूर चुप्पी का दर्द है, जो हर वार के साथ और गहरा होता गया। जिस विश्वविद्यालय को ज्ञान का मंदिर कहा जाता है, वहां नफरत का चाकू इतनी आसानी से चल जाएगा, किसी ने सोचा नहीं था। खून बहता रहा, मदद देर से पहुंची और सवाल आज भी वहीं खड़ा है—अगर उस रात कुछ छात्र दौड़कर नहीं आते, तो क्या आज यह कहानी एक कत्ल की चार्जशीट बन चुकी होती? यह सिर्फ हमला नहीं था, यह साफ संदेश था—डर के साए में जीओ, वरना अगला चेहरा भी खून से लाल कर दिया जाएगा।

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इस रिपोर्ट में विस्तार से पढ़िए IGNTU अमरकंटक में क्रूरता की पूरी कहानी....

अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरी वारदात

मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU Amarkantak), अमरकंटक एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। असम के एक छात्र पर जानलेवा हमले की घटना ने न सिर्फ कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है, क्योंकि छात्र नेताओं और पीड़ितों का दावा है कि इससे पहले भी कश्मीर और राजस्थान से आए छात्रों के साथ मारपीट (Campus Violence) हो चुकी है, लेकिन डर और दबाव के कारण वे सामने नहीं आ सके।

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छात्र संगठनों का साफ कहना है कि यह कोई Isolated Incident नहीं, बल्कि एक Pattern of Harassment है। आरोप है कि बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों को टारगेट करने वाला एक संगठित समूह लंबे समय से सक्रिय है। पांच छात्रों को सस्पेंड कर देना सिर्फ Formality Action है, जबकि असल दोषी नेटवर्क आज भी कैंपस में मौजूद है।

उस रात की खौफनाक कहानी, पीड़ित की जुबानी | Victim Statement

अर्थशास्त्र में एमए प्रथम वर्ष के छात्र हिरोस ज्योति दास उस रात को याद करते हुए आज भी सहम जाते हैं। हिरोस बताते हैं, “मैंने इसी विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है और अभी गुरु गोविंद सिंह हॉस्टल में रहता हूं। 13-14 जनवरी की दरमियानी रात करीब 4 बजे बिल्डिंग से तेज शोर आया, जिससे मेरी नींद खुल गई। मुझे बाथरूम जाना था, इसलिए कमरे से बाहर गया।”

हिरोस के मुताबिक, जब वे लौटे तो उनके कमरे में कुछ युवक मौजूद थे।
“मैंने उनसे विनम्रता से बाहर जाने को कहा। उन्होंने मेरा नाम पूछा, फिर पूछा कि मैं कहां से हूं। जैसे ही मैंने कहा कि मैं असम से हूं, उनका रवैया पूरी तरह बदल गया।”

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इसके बाद जो हुआ, वह Hate Crime on Campus की तस्वीर पेश करता है।
“वे गालियां देने लगे और चिल्लाकर बोले—‘तू वहां से यहां क्यों आया है? अब आ गया है तो जिंदा वापस नहीं जाएगा।’ इसके बाद उन्होंने मुझ पर हमला कर दिया।”

हिरोस बताते हैं कि जब तक आसपास के कमरों से छात्र दौड़कर नहीं आए, तब तक उन्हें लगातार पीटा जाता रहा। हमले के बाद उनके मुंह से खून बह रहा था। साथी छात्र उन्हें विश्वविद्यालय की डिस्पेंसरी ले गए, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि पिटाई में नाक की हड्डी टूट गई और आंख के पास गंभीर चोट आई है।

गुस्से में छात्र, दबाव में प्रशासन | Student Protest

इस घटना के बाद 14 जनवरी की सुबह से ही IGNTU परिसर में माहौल गरमा गया। छात्र बड़ी संख्या में Administrative Building के सामने इकट्ठा हुए और दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की। यह प्रदर्शन सिर्फ हिरोस के लिए नहीं था, बल्कि उन तमाम छात्रों की आवाज बन गया, जो अब तक डर की वजह से चुप थे।

दबाव बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक आदेश जारी किया। आदेश में साफ लिखा गया कि“मुख्य छात्रावास अधीक्षक एवं छात्रावास अधीक्षक के पत्र दिनांक 14 जनवरी में दी गई सूचना एवं अनुशंसा के आधार पर, हिरोस ज्योति दास के साथ छात्रावास में मारपीट करने वाले छात्रों—अनुराग पाण्डेय, जतिन सिंह, रजनीश त्रिपाठी, विशाल यादव और उत्कर्ष सिंह—को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय से निष्कासित किया जाता है। घटना की जांच अनुशासन समिति को और कानूनी कार्रवाई हेतु प्रकरण स्थानीय पुलिस को भेजा जाता है।”

प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई CCTV Footage के आधार पर की गई है। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि यह सिर्फ Damage Control Exercise है और असल में दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

“यहां नस्लवाद आम बात है” | Racism Allegations

जम्मू-कश्मीर से आए और पिछले चार वर्षों से IGNTU में पीएचडी कर रहे छात्र रियाज चौधरी कहते हैं,
“यहां पूरे देश से छात्र आते हैं। ज्यादातर लोग अच्छे हैं, लेकिन कुछ ग्रुप ऐसे हैं जो क्षेत्र, जाति और धर्म के आधार पर छात्रों को परेशान करते हैं। खासकर नॉर्थ-ईस्ट से आने वाले छात्रों को ‘चिंकी’ या ‘चीनी’ कहकर चिढ़ाया जाता है।”

रियाज के मुताबिक, कई घटनाएं हॉस्टल की दीवारों के भीतर ही दबा दी जाती हैं, क्योंकि प्रशासन उतनी सख्ती नहीं दिखाता, जितनी जरूरत है। यह Institutional Failure है, जिसने ऐसे तत्वों के हौसले बढ़ा दिए हैं।

राजस्थान से आए एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यहां 20-30 लड़कों का एक ग्रुप है, ज्यादातर स्थानीय हैं। वे खुलेआम नशा करते हैं। अगर कोई बाहरी छात्र अकेला मिल जाए, तो उसके साथ मारपीट की जाती है।”
यह बयान IGNTU को Drug Abuse on Campus और Law & Order Breakdown की ओर भी इशारा करता है।

आदिवासी विश्वविद्यालय, लेकिन सुरक्षा शून्य | Administrative Lapses

विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और आदिवासी छात्र संगठन के नेता रोहित मरावी इस घटना को आदिवासी समाज और विश्वविद्यालय की गरिमा पर हमला मानते हैं। “यह एक आदिवासी विश्वविद्यालय है। यहां इस तरह की नस्लवादी और क्षेत्रवादी घटनाएं हमारे सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं। कई सालों से ऐसे हमले हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।”

रोहित मरावी यह भी याद दिलाते हैं कि कुछ दिन पहले विश्वविद्यालय गेट पर पत्रकारों के साथ भी मारपीट हुई थी। “हमलावर नशे में थे। इससे हॉस्टल वार्डन और चीफ वार्डन की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं।” यह पूरा घटनाक्रम Campus Governance Failure को उजागर करता है।

प्रशासन और पुलिस का पक्ष | Official Response

विश्वविद्यालय के पीआरओ रजनीश त्रिपाठी का कहना है, “जैसे ही घटना की सूचना मिली, प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए पांचों छात्रों को निष्कासित कर दिया। एक जांच दल बनाया गया है, जो अपनी रिपोर्ट देगा। सभी कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है।”

वहीं, अमरकंटक थाना प्रभारी लाल बहादुर तिवारी ने बताया, “पीड़ित छात्र की शिकायत पर पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। विवेचना जारी है और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।”

हालांकि, छात्रों का आरोप है कि अगर उन्होंने आंदोलन नहीं किया होता, तो न तो विश्वविद्यालय कोई ठोस कदम उठाता और न ही पुलिस FIR Registration करती। घटना के कई घंटे बाद तक आरोपियों की गिरफ्तारी न होना भी छात्रों के संदेह को और गहरा कर रहा है।

बड़ा सवाल | Pressing Questions

IGNTU अमरकंटक में हुई यह घटना सिर्फ एक छात्र पर हमला नहीं है। यह Student Safety, Racism in Universities और Administrative Accountability से जुड़ा गंभीर मामला है। सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय सिर्फ दबाव में आकर कार्रवाई करेगा, या फिर उस पूरे सिस्टम पर चोट करेगा, जो बाहरी छात्रों को असुरक्षित बनाता है?

अगर इस बार भी जवाबदेही तय नहीं हुई, तो हिरोस ज्योति दास जैसी घटनाएं History Repeating Itself बनती रहेंगी, और IGNTU का नाम एक शिक्षण संस्थान से ज्यादा एक असुरक्षित कैंपस के रूप में पहचाना जाएगा।

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