राजेंद्रग्राम में सड़क पर उतरे सैकड़ों आदिवासी छात्र : छात्रावास की जमीन पर कब्जे का विरोध, अमरकंटक-रीवा मार्ग जाम से दोनों तरफ 2 KM लंबी कतारें, कलेक्टर को बुलाने पर अड़े
अनूपपुर (राजेंद्रग्राम)। अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ विकासखंड मुख्यालय राजेंद्रग्राम के पास बसनिहा ग्राम पंचायत मोड़ पर मंगलवार को शासकीय महाविद्यालय पुष्पराजगढ़ के छात्रावास के सैकड़ों छात्र-छात्राएं उग्र प्रदर्शन करते हुए सड़क पर उतर आए। आदिवासी छात्र संगठन के बैनर तले छात्र अमरकंटक-रीवा मुख्य मार्ग पर बीच सड़क पर दरी बिछाकर बैठ गए हैं।
छात्रों के इस अचानक चक्काजाम से हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और सड़क के दोनों ओर लगभग 2 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई है। छात्र-छात्राएं सीधे कलेक्टर को मौके पर बुलाने और त्वरित कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

क्या है विवाद? 'सरकारी हॉस्टल की जमीन पर जबरन रास्ता दे रहे'
विद्यार्थियों का गंभीर आरोप है कि छात्रावास परिसर की बाउंड्रीवॉल के पीछे स्थित निजी भूमि पर निर्माण कार्य चल रहा है। भू-स्वामी जबरन कब्जा करने की नीयत से छात्रावास की जमीन के रास्ते से अपने निजी मकान की निकासी के लिए गेट लगा रहा है।
बाउंड्रीवॉल पर रोक का आरोप: छात्रों का कहना है कि हॉस्टल की बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य रोककर निजी जमीन मालिक को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
अनदेखी से आक्रोश: इस अवैध निर्माण और कब्जे को लेकर पहले भी कई बार आवेदन और ज्ञापन सौंपे जा चुके थे, लेकिन जब अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की, तो छात्रों को मजबूरन चक्काजाम का रास्ता चुनना पड़ा।

मौके पर प्रशासनिक हलचल: मनाते रहे अफसर, मांग पर अड़े रहे छात्र
चक्काजाम और 2 किलोमीटर लंबे जाम की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मौके पर नायब तहसीलदार, बसनिहा ग्राम पंचायत के राजस्व अधिकारी और राजेंद्रग्राम थाना प्रभारी (TI) वीरेंद्र बरकडे पुलिस बल के साथ पहुंचे।
छात्रों का अल्टीमेटम: अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाने और जाम हटाने की काफी कोशिश की, लेकिन छात्र इस बात पर अड़े हैं कि जब तक राजस्व विभाग हॉस्टल की जमीन से लगाए जा रहे गेट को हटवाकर पक्की दीवार खड़ी करने का लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगे।
तहसीलदार बोले- 'शासकीय जमीन से निजी रास्ता नहीं दिया जा सकता'
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुष्पराजगढ़ तहसीलदार ईश्वर सिंह प्रधान ने बताया:
"निजी जमीन छात्रावास की नई बिल्डिंग के पीछे स्थित है। हॉस्टल की दीवार का कुछ हिस्सा पीछे अभी अधूरा है, उसी का फायदा उठाकर निजी निर्माण के लिए गेट लगाया जा रहा था। विद्यार्थियों का विरोध बिल्कुल जायज है कि सरकारी छात्रावास की जमीन से निजी जमीन के लिए रास्ता नहीं दिया जा सकता। छात्रावास निर्माण में ग्राम पंचायत एजेंसी है, पूर्व में दोनों पक्षों के बीच क्या एग्रीमेंट हुए थे, इसकी जांच की जा रही है।"
थाना प्रभारी वीरेंद्र बरकडे ने बताया कि छात्रों से बातचीत जारी है और जल्द से जल्द रास्ता खुलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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