भारत में कैसे पनपा 'लाल आतंक' नक्सलवाद ? : कौन-कौन से बड़े ऑपरेशन, कितने नेताओं-ग्रामीणों की बलि, जानिए कितने साल में खात्मा ?
MP CG Times / Mon, Mar 30, 2026
End of Naxalism in India: Journey from Maoist Insurgency to 2026 Deadline: 25 मई 1967, गुरूवार, नक्सलबाड़ी, पश्चिम बंगाल। चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने जन्म दिया उस विद्रोह को जिसे आज भारत नक्सलवाद के नाम से जानता है। जमींदारों के खिलाफ सुलगी आग धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गई। 60 साल में हजारों लाशें गिरीं। नेता, मंत्री, जवान सब लाल आतंक की चपेट में आए। खून की नदियां बहीं और जंगलों में डर का साम्राज्य बन गया।
End of Naxalism in India: Journey from Maoist Insurgency to 2026 Deadline: सालों में हुए ऑपरेशन और encounters ने नक्सली कमांड को चुनौती दी। Salwa Judum, Operation Black Forest, CoBRA Deployment ये नाम केवल अभियान नहीं, बल्कि नक्सलियों की कमर तोड़ने की लड़ाई के प्रतीक हैं। सवाल आज भी वही है कितने शहीद हुए, कितने नेताओं की बलि चढ़ी, कितने ग्रामीणों के खून से नदिया बही, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा में Red Corridor ने कैसे खून के आंसू रुलाए ?
End of Naxalism in India: Journey from Maoist Insurgency to 2026 Deadline: आज हम पढ़ेंगे कि नक्सलवाद कैसे पनपा, कौन-कौन से बड़े ऑपरेशन हुए, कितने कत्ल हुए, कितने वरिष्ठ नेता मारे गए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कैसे लाल आतंक के खात्मे डेडलाइन तय की 31 मार्च 2026 । यह सिर्फ हिंसा की कहानी नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, रणनीति और विकास की जीत की कहानी भी है।

End of Naxalism in India: Journey from Maoist Insurgency to 2026 Deadline
भारत में नक्सलवाद, जिसे Left-Wing Extremism भी कहा जाता है, एक लंबा हिंसक संघर्ष रहा है। इसका मूल उद्देश्य था ज़मीनी असमानता, किसानों और आदिवासियों के अधिकार और सामाजिक न्याय। लेकिन समय के साथ यह सशस्त्र विद्रोह और जंगल युद्ध में बदल गया। यह आंदोलन केवल ग्रामीण असमानताओं तक सीमित नहीं रहा; इसका असर प्रशासन, राजनीतिक नेतृत्व और सुरक्षा बलों तक फैला।
1967 – नक्सलवाद की शुरुआत
West Bengal के नक्सलबारी गांव में किसानों और ज़मीनदारों के बीच संघर्ष ने 1967 में नक्सल आंदोलन की नींव रखी। CPI(M) के कुछ क्रांतिकारी समूहों ने हथियार उठाकर किसानों के लिए लड़ाई शुरू की। 1969 में CPI(ML) का गठन हुआ और आंदोलन का दायरा बढ़ा।
1970–1980s – फैलाव और प्रथम लहर
1970 के दशक में नक्सलवाद बंगाल से आगे फैलकर Odisha, Andhra Pradesh, Bihar, और मध्य भारत के जंगलों में पहुँच गया। ग्रामीण असमानता, बेरोज़गारी और सरकारी उपेक्षा ने आंदोलन को मजबूती दी। इस दौर में हिंसा अधिकतर ग्रामीण संघर्ष और ज़मीनी कब्ज़ों के रूप में सामने आई।

1990–2000 – हिंसा का उभार और प्रतिरोध
1990 के दशक में नक्सलवादी और संगठित हुए। बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में हिंसा बढ़ी। पुलिस और सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई शुरू की, लेकिन जंगलों और स्थानीय समर्थन ने उन्हें चुनौती दी।
2000–2010 – CPI‑Maoist और हिंसा की चरम सीमा
2004 में People's War Group और Maoist Communist Centre के विलय से CPI(Maoist) का गठन हुआ। 'Red Corridor' बन गया, जिसमें छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा शामिल थे। इस दौर में बड़ी हिंसा, IED हमले और ग्रामीण इलाकों में नियंत्रण बढ़ा।

सबसे बड़े हमले और मौतें
2010 Bastar Ambush: कई सुरक्षा कर्मियों की मौत।
2025 Bijapur IED Attack: 8 जवान और 1 नागरिक मरा।
कुल मौतें (2000–2025): 12,000+
Security Forces: 2,700+
Civilians: 4,100+
Naxalites: 4,900+
सरकार की रणनीति और ऑपरेशन
Operation Black Forest (2025): 31 नक्सलियों को neutralize किया।
CoBRA Units & Mega Operations: Jharkhand और Bastar में बड़े ऑपरेशन।
Security Camps to Development: Bastar के सुरक्षा कैंपों को स्कूल और हॉस्पिटल में बदला।
2024–25: 270+ neutralizations, 800+ गिरफ्तारियां, 1,225+ surrendered Maoists।
नक्सल नेताओं की गिरफ़्तारी और बलि
Madvi Hidma: 18 नवंबर 2025 को encounter में मारा गया।
Chelluri Narayana Rao: वरिष्ठ कमांडर, surrendered।
नक्सलियों ने किन नेताओं और मंत्रियों को मारा
भारत में नक्सलवाद के हिंसक दौर में कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को नक्सलियों ने सीधे निशाना बनाया।
महेंद्र कर्मा (Mahendra Karma)
कौन थे: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, Salwa Judum आंदोलन के संस्थापक और पूर्व MLA (Chhattisgarh).
हमला कब हुआ: 25 मई 2013
घटना: Darbha Valley (Sukma district) में landmine blast + gunfire हमला। लगभग 32 लोग मरे।
नंद कुमार पटेल (Nand Kumar Patel)
कौन थे: कांग्रेस नेता और Chhattisgarh के पूर्व अध्यक्ष
हमला कब हुआ: 25 मई 2013
घटना: Darbha Valley हमले में गंभीर रूप से घायल, बाद में मृत्यु।
विद्या चरण शुक्ला (Vidya Charan Shukla)
कौन थे: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री
हमला कब हुआ: 25 मई 2013
घटना: घायल → बाद में मृत्यु।
भिमा मंडावी (Bhima Mandavi)
कौन थे: भाजपा के विधायक, Dantewada (Chhattisgarh)
हमला कब हुआ: 9 अप्रैल 2019
घटना: Nakulnar village में काफिले पर हमला, मारे गए।
पूर्व Andhra Pradesh के गृह मंत्री (Alimineti Madhava Reddy)
घटना: नक्सलियों ने उनके खिलाफ साज़िश रची और मार दिया।
IPS अधिकारी और DIG (K S Vyas और अन्य)
घटना: नक्सलियों ने वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाना बनाया, कई हाई-प्रोफाइल encounters में मौत।
सुरक्षा और प्रशासनिक नेतृत्व पर हमले
नक्सलियों ने सिर्फ राजनीतिक नेताओं को ही निशाना नहीं बनाया। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जैसे DIG K S Vyas, कई encounters में directly लक्ष्य बने। इसने संगठन की हिंसा का दायरा प्रशासन तक फैला दिया।
विद्रोह का अंत और 31 मार्च 2026 डेडलाइन
हजारों Maoists surrendered, command structure ढह गई।
केंद्र ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन तय की।
Security, intelligence, और विकास योजनाओं से यह मिशन संभव हुआ।
मानव और सामाजिक Toll
2000–2025 में लगभग 12,102 लोगों की मौतें हुईं।
सुरक्षा बल: 2,700+
नागरिक: 4,100+
नक्सलियों: 4,900+
इसने दिखाया कि नक्सली हिंसा सिर्फ ग्रामीण संघर्ष नहीं थी, बल्कि राजनीतिक, प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे तक प्रभावित करने वाला विद्रोह बन गया था।
मुख्य सवाल और जवाब
नक्सलवाद कैसे शुरू हुआ? – 1967, नक्सलबारी आंदोलन।
सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य? – छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल।
बड़े ऑपरेशन? – Operation Black Forest, CoBRA deployment, Bastar grid।
कितने लोग मरे? – 12,000+ (Security, Civilians, Naxals)।
2026 डेडलाइन क्यों? – decades-long insurgency को खत्म करने और विकास को आगे बढ़ाने के लिए।
1967–2026 तक लगभग 59 साल के संघर्ष में भारत ने नक्सलवाद के लाल आतंक को काबू में किया। हजारों मौतें, बड़े ऑपरेशन और सरकार-समुदाय की साझी रणनीति ने इसे समाप्त किया। अब ग्रामीण विकास, शिक्षा और रोजगार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
Deadliest Naxal Attacks in India (Year – Place – Fatalities)
2010 – Dantewada Ambush (6 Apr) – 76 CRPF जवान मारे गए
2010 – Silda Camp Attack (15 Feb, WB) – 24 पैरामिलिटरी जवान मारे गए
2010 – Narayanpur Ambush (29 June, Chhattisgarh) – 26 जवान शहीद
2010 – Bijapur IED Blast (8 May, Chhattisgarh) – 8 जवान शहीद
2013 – Darbha Valley Attack (25 May, Chhattisgarh) – 32 मौतें (महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल सहित)
2014 – Chhattisgarh Attack (11 Mar) – 15 सुरक्षा कर्मी + 1 नागरिक मारे गए
2014 – Sukma (28 Feb) – 6 पुलिसकर्मी शहीद
2017 – Sukma Attack (24 Apr) – 26 CRPF जवान शहीद
2018 – Araku Valley Killing (A.P.) – कई नेताओं और नागरिकों की मौत
2009 – Laheri Ambush (Oct, Maharashtra) – 17 पुलिसकर्मी शहीद
2009 – Bastar Landmine Blast (18 Jul) – नागरिक और सुरक्षा कर्मी मारे गए
2008 – Korchi-Pairaguda Attacks – पंचायत भवनों पर हमला, नेताओं की हत्या
2010–14 – Multiple Bastar IED Ambushes – बार-बार सुरक्षा गाड़ियों पर IED हमले
2025 – Bijapur Naxal Attack (6 Jan, Chhattisgarh) – 8 जवान + 1 नागरिक शहीद
2000–2025 – Ongoing Encounters – Left-Wing Extremism संघर्ष में 12,000+ मौतें (सुरक्षाबल + नागरिक + नक्सली)
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