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: Raipur: आरक्षण बिल पर रार; राज्यपाल के बयान पर गरमाई सियासत, सीएम भूपेश बोले- 'मार्च में कौन सा मुहूर्त है'

News Desk / Sun, Jan 22, 2023


सीएम भूपेश बघेल, राज्यपाल अनुसुईया उइके

सीएम भूपेश बघेल, राज्यपाल अनुसुईया उइके - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके के आरक्षण पर दिए गए बयान से प्रदेश की सियासत फिर गरमा गई है। मामले में पक्ष और विपक्ष जमकर राजनीति कर रहे हैं। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पिछले दिनों रायपुर में एक कॉलेज के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची राज्यपाल से जब मीडिया ने आरक्षण विधेयक को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि अभी मार्च तक का इंतजार करिए। इस बयान के बाद वो राजभवन के लिए निकल गईं। 

उनके इस बयान ने छत्तीसगढ़ में आरक्षण बिल को लेकर फिर हवा दे दी है। मामले में प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। नेताओं के बयान लगातार समाने आ रहे हैं। राजभवन और सरकार के बीच रस्साकसी का खेल बद्स्तूर जारी है। सीएम भूपेश बघेल पहले ही राजभवन पर केंद्र के दबाव में काम करने का आरोप लगा चुके हैं। आरक्षण बिल में लेटलतीफी पर सीएम समेत राज्य सरकार के सभी मंत्री, नेता नाराजगी जता चुके हैं। यहां तक की सीएम ने राजभवन के विधिक सलाहकार को भाजपा का एजेंट तक कह दिया था। शहर के कई स्थानों पर पोस्टर लगाकर बीजेपी कार्यालय को राजभवन संचालन केंद्र बताया गया था। वहीं कैबिनेट मंत्रियों का एक समूह भी राज्यपाल से मिलकर जल्द हस्ताक्षर करने की गुहार लगाई थी। अब राज्यपाल के इस बयान ने फिर तूल दे दिया है। 

सीएम भूपेश बोले- मार्च में कौन सा मुहूर्त है
इस बीच आरक्षण पर सीएम भूपेश ने आज सोमवार को कहा कि प्रदेश में सभी नौकरियों की भर्ती पूरी तरह से रुका हुआ है। मार्च में ऐसा कौन सा मुहूर्त है, जिसमें राज्यपाल ने हस्ताक्षर करने की बात कही है।

'किसी भी वर्ग को मिलने वाली सुविधा से वंचित न करें'
कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि, चाहे वो अधिकारी हो या मुख्यमंत्री या राज्यपाल। सब लोगों की नैतिक जवाबदेही है कि किसी भी वर्ग को मिलने वाली सुविधा से वंचित न किया जाए। सीएम बघेल ने आरक्षण विधेयक विशेष सत्र बुलाकर पारित करवाया है। इसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राजभवन भेजा गया है। राज्यपाल को आदिवासियों के संरक्षक होने के नाते तुरंत हस्ताक्षर कर देना चाहिए।


जानें, क्या था मामला
बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2022 को फैसला सुनाते हुए 58% आरक्षण को असंवैधानिक बताया था। उसके बाद से छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कोई आरक्षण रोस्टर नहीं बचा है। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण संबंधी दो संशोधन विधेयक पारित कराए थे। इसमें आरक्षण को बढ़ाकर 76% कर दिया गया था। 

राजभवन में अटका आरक्षण बिल
गहमागहमी के बीच 1 दिसंबर 2022 को आरक्षण संशोधन विधेयकों को पास करा लिया गया। इसके मुताबिक, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 13 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है। अब बिल राजभवन में अटका हुआ है। राज्यपाल ने इसमें कुछ खामियां बताकर 10 बिंदुओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। वहीं भूपेश सरकार का दावा है कि उन्होंने सभी जवाब दे दिए हैं। मामले कांग्रेस ने बीजेपी पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।


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