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तहसीलदार ने नेताजी को तरेरी आंखें, तमीज भी सिखाई : BJP के पोस्टर हटते ही दिग्गी राजा खुश, शिवराज ने पढ़ाया खेत बचाने का पाठ; मंडल अध्यक्ष ने किया मूड खराब

मध्य प्रदेश की राजनीति में इस हफ्ते खूब मसाला रहा। कहीं आंखों की फाइट हुई, कहीं पोस्टरों की छुट्टी हो गई। कोई खेत में उतरकर धरती को समझा रहा था, तो कहीं संगठन अपने ही मंडल अध्यक्षों की हाजिरी लेने बैठ गया। कुल मिलाकर सत्ता, संगठन और सिस्टम... सबने अपनी-अपनी स्क्रिप्ट लिखी। आइए, खोलते हैं 'MP की सीक्रेट फाइल्स'...

नेताजी बोले- आंख मत दिखाओ... अफसर बोले- पहले तमीज दिखाओ

उमरिया के मानपुर में कांग्रेस किसानों की लड़ाई लड़ने पहुंची थी, लेकिन थोड़ी देर में लड़ाई किसानों से ज्यादा 'आंख बनाम तमीज' पर आ गई। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने तहसीलदार की तरफ देखा... या यूं कहिए कि तहसीलदार ने उनकी तरफ देख लिया। नेताजी बोले- "आंख मत दिखाइए।"

तहसीलदार भी सरकारी नौकरी में थे, लेकिन जवाब निजी अंदाज में आया- "आप भी तमीज से बात कीजिए।" बस... फिर क्या था। समर्थकों ने नारे लगा दिए। तहसीलदार बोले- "आप मुझे धमका रहे हैं।" कार्यकर्ता बोले- "धमका तो आप रहे हैं।" कुछ मिनट के लिए ऐसा लगा कि ज्ञापन बाद में देंगे, पहले बहस का फैसला करा लेते हैं।

वैसे पूरा प्रदर्शन कलेक्टर को ज्ञापन देने के लिए था। कांग्रेस नेता छह घंटे तक कलेक्टर साहब का इंतजार करते रहे। कलेक्टर नहीं आए... आखिर में अपर कलेक्टर आए, ज्ञापन लिया और मामला शांत हुआ। यानी इंतजार कलेक्टर का था, एंट्री अपर कलेक्टर की हुई।

सरकारी कार्यक्रम में पोस्टर लगे... कांग्रेस बोली- ये खेती है या पार्टी कार्यालय?

अब रुख करते हैं रतलाम का। कार्यक्रम था प्राकृतिक खेती पर, लेकिन चर्चा शुरू हो गई राजनीतिक पोस्टरों पर।

कृषि विभाग की कार्यशाला में भाजपा किसान मोर्चा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य नेताओं के पोस्टर लगाए गए थे। कांग्रेस नेताओं ने देखा तो कहा- "खेती की क्लास में राजनीति का सिलेबस किसने जोड़ दिया?"

धरना शुरू... नारे शुरू... और मांग सिर्फ एक- पोस्टर हटाओ। अधिकारियों ने माहौल भांपा और कार्यक्रम के दौरान ही पोस्टर उतरवा दिए। खबर दिग्विजय सिंह तक पहुंची तो उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपा दी। यानी इस बार फसल से पहले पोस्टरों की कटाई हो गई।

शिवराज खेत में उतरे... बोले- धरती मां को भी थोड़ा आराम दो

अब बात केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की। नेताजी इस बार मंच से नहीं, सीधे धान के खेत से बोले। अयोध्या पहुंचे, धान की रोपाई की और पानी से भरे खेत में खड़े होकर किसानों को समझाया कि अगर रासायनिक खाद का यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियां खेत नहीं, किस्से देखेंगी।

उन्होंने कहा कि हरित खाद और गोबर की खाद का ज्यादा इस्तेमाल कीजिए। कुल मिलाकर संदेश साफ था- धरती मां भी अब 'ओवरलोड' का बोर्ड लगाने की तैयारी में है।

और अब अंदर की बात...

मंडल अध्यक्ष गायब... संगठन बोला- अगली बार हाजिरी पूरी चाहिए

सत्ताधारी दल ने राजधानी में अपने संस्थापक नेता का बलिदान दिवस मनाया। लेकिन कार्यक्रम में कई मंडल अध्यक्षों की कुर्सियां खाली रहीं। संगठन ने सोचा कि अनुपस्थिति पर भी कुछ लिखा जाना चाहिए। इसलिए एक पत्र जारी कर दिया।

अब मजेदार बात देखिए... पत्र में किसी का नाम ही नहीं था। बस लिखा था- "मंडल अध्यक्ष जी..."

यानी जिसे लगे कि बात उसके लिए है... वही मान ले। पत्र में प्यार से समझाया गया कि आगे से संगठन के कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। अब पार्टी के गलियारों में चर्चा यही है कि यह सिर्फ 'रिमाइंडर' था... या फिर आने वाले दिनों का 'ट्रेलर'

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