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अनूपपुर में 37 दिन बाद फिर हाथियों की 'दहशत' : छत्तीसगढ़ से सीमा पार कर घुसा 4 गजराजों का दल; वन विभाग ने कहा- रात में कच्चे मकानों में न सोएं लोग

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के वनांचलों में एक बार फिर हाथियों की धमक से हड़कंप मच गया है। करीब 37 दिनों की शांति के बाद बुधवार रात चार हाथियों का एक दल छत्तीसगढ़ की सीमा को पार कर अनूपपुर के जैतहरी वन परिक्षेत्र में दाखिल हो गया।

जैतहरी के वन परिक्षेत्राधिकारी विवेक मिश्रा ने बताया कि हाथियों का यह झुंड छत्तीसगढ़ के मरवाही वन क्षेत्र की सीमा से होते हुए सबसे पहले चोलना गांव के करीब पहुंचा। इसके बाद हाथियों का यह दल आगे बढ़ते हुए धनगवां जंगल के भीतर तक चला गया और फिलहाल वहीं डेरा जमाए हुए है।

हाईवे की तरफ बढ़े कदम, खदेड़ने की कोशिश रही नाकाम

वन विभाग की रेस्क्यू और गश्ती टीम ने हाथियों की आमद होते ही मुस्तैदी दिखाई। रात के वक्त वन कर्मियों ने हाथियों के इस दल को वापस छत्तीसगढ़ के जंगलों की ओर मोड़ने (खदेड़ने) का प्रयास भी किया।

इस दौरान हाथी कुछ दूरी तक मुख्य हाईवे की ओर आगे बढ़े, जिससे अमला सहम गया। हालांकि, कुछ देर बाद हाथियों का रुख बदला और वे वापस घने जंगल क्षेत्र की ओर लौट गए। सुबह होते ही चारों हाथी धनगवां जंगल के सुरक्षित इलाके में रुक गए हैं।

वन विभाग की मुनादी: गांवों में लाउडस्पीकर से दी जा रही चेतावनी

हाथियों के मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग का मैदानी अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। वाहनों के जरिए जंगल से लगे संवेदनशील गांवों में लगातार मुनादी कराई जा रही है और ग्रामीणों के लिए गाइडलाइन जारी की गई है।

जंगल जाने पर पूरी तरह रोक: ग्रामीणों से साफ कहा गया है कि वे महुआ, लकड़ी या किसी भी काम से फिलहाल जंगल की तरफ बिल्कुल न जाएं।

कच्चे मकान खाली करने की सलाह: वन अधिकारियों ने जंगल से सटे हुए कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे रात के समय वहां न सोएं, क्योंकि हाथी भोजन की तलाश में कच्चे घरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सेल्फी और नजदीक जाने की भूल न करें: ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि हाथियों को देखने के लिए भीड़ न लगाएं, न ही उनके नजदीक जाकर फोटो या सेल्फी लेने की कोशिश करें। किसी भी हलचल पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

ये वही पुराने 'मेहमान' हैं... अनूपपुर से डिंडोरी तक महीनों किया था विचरण

वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह वही हाथियों का पुराना समूह है जो कुछ समय पहले जैतहरी और आसपास के जंगलों में कई महीनों तक डेरा जमाए हुए था। इस दल ने पूर्व में अनूपपुर, राजेंद्रग्राम, अहिरगवां, बुढार (शहडोल) और डिंडोरी जिले के वन क्षेत्रों में भी लंबा वक्त बिताया था और जमकर विचरण किया था।

रात-दिन रखी जा रही नजर

हाथियों की इस वापसी के बाद वन विभाग ने सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। रात के समय भी विशेष रूप से वन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो हाथियों की पल-पल की लोकेशन ट्रैक कर रहे हैं ताकि जान-माल के नुकसान जैसी किसी भी अप्रिय स्थिति या हादसे को टाला जा सके।

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