8 कातिलों का सीरियल-किलर...मरती चिड़िया को देख आया 'खूनी-आईडिया' : पहले दुश्मनों से दोस्ती,फिर सुहागा मिलाकर शराब पिलाई, 8 मौतें, पुलिस के 'माइंड-गेम' ने सच उगलवाया
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के खर्वे गांव में 8 लोगों की मौत से पर्दा उठा चुका है। कातिल किराना व्यापारी के दिमाग में नदी किनारे मरते चिड़िया को देख कत्ल का 'खूनी आईडिया' आया। उसने शिकारी को मरे मछली में ‘सुहागा’ डालते देखा था, जिसे खाते ही चिड़िया एक मिनट में मर गई थी। रामसहाय ने खुद को चूहों से परेशान बताकर शिकारी से सुहागा ले लिया।
पहले उसने एक आवारा कुत्ते पर इसका ट्रायल किया। इसके बाद अपने दुश्मनों से दोस्ती की। उन्हें सुहागा मिलाकर शराब पिलाई और एक-एक कर सभी को मौत की नींद सुला दी। शातिर कातिल जहर देकर खुद ही पीड़ितों को अस्पताल ले जाने का नाटक करता, उनके अंतिम संस्कार में शामिल होता रहा।
लेकिन पुलिस के 'माइंड गेम' ने साइको किलर बनने का अहंकार तोड़ दिया। पुलिस ने उस पर चिल्लाने के बजाय उसके साथ सहानुभूति दिखाई और उसकी चालाकी की झूठी तारीफ की। पुलिस के झांसे में आते ही साइको किलर का अहंकार जाग उठा और पूरी सच्चाई बता दी। चलिए आपको बताते हैं कि, पुलिस की जांच में आरोपी ने क्या कुछ बताया है?

गाली देने, पुरानी रंजिश, पत्नी पर बुरी नजर का शक
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि, ये 8 लोग किसी न किसी रूप में उसे अपमानित करते थे। बद्री उसे गाली देता था, बुठालु ने चुनाव में उसके खिलाफ प्रचार किया था, छत्तुराम उसकी पत्नी पर बुरी नजर रखता था, बुधराम से जमीन का विवाद था।
चैतुराम 50 हजार रुपए के कर्ज के लिए ब्याज की धमकी देता था, विनोद उसे रोज बद्दुआ देता था, गजानंद पर जादू-टोने का शक था और महेतरू से उसकी पुरानी दुश्मनी थी।
चिड़िया के शिकार से आया आईडिया
रामसहाय जायसवाल ने पुलिस को बताया कि, एक दिन सुबह वह नहाने के लिए नदी पर गया था। वहां उसने एक शिकारी को मृत मछली के मुंह में कुछ डालते और उसे जमीन पर फेंकते देखा। कुछ ही देर में एक चिड़िया ने उस मछली को उठाया और एक मिनट के भीतर ही वह मर गई। यह देखकर रामसहाय के मन में हत्या का विचार आया।
रामसहाय ने शिकारी से इस 'जादू' के बारे में पूछा। शिकारी ने बताया कि यह कोई जादू नहीं, बल्कि 'सुहागा' नामक पदार्थ है। उसने समझाया कि मरी हुई मछली के मुंह में इसे डालने पर, जो भी चिड़िया उसे खाती है, वह तुरंत मर जाती है। इस घटना ने रामसहाय को अपने दुश्मनों को खत्म करने का तरीका सुझाया।
रामसहाय ने सोचा कि, अगर चिड़िया इतनी आसानी से मर सकती है, तो इंसान क्यों नहीं? उसने तुरंत बहाना बनाया कि, मुझे चूहों से परेशानी है, मुझे भी दे दे सुहागा। शिकारी ने भरोसा कर लिया और उसे सुहागा दे दिया।

कुत्ते पर किया ट्रायल, फिर बढ़ा आत्मविश्वास
रामसहाय ने पहले किसी इंसान पर जहर नहीं आज़माया। उसने एक आवारा कुत्ते को सुहागा मिला बिस्किट खिलाया। कुत्ते ने खाया और एक मिनट में मर गया। रामसहाय को पक्का यकीन हो गया कि, सुहागा 100 कारगर है।
अब वह किसी को भी मार सकता था, बिना पकड़े। उसने तय कर लिया कि, जिसे मारना है, पहले उससे दोस्ती करूं, फिर शराब पिलाऊं और उसमें सुहागा मिलाऊं, जिससे किसी को शक न हो।
दोस्ती कर कहा- आज तू मेरे साथ शराब पी, सारी पुरानी बातें भूल जा
रामसहाय ने बद्री को बुलाकर कहा कि, आज तू मेरे साथ शराब पी, सारी पुरानी बातें भूल जा। बद्री खुश हो गया। रामसहाय ने आधा पाव शराब में सुहागा मिला दिया। बद्री ने घूंट लिया और बोला कि, यार, आज तो शराब कुछ अजीब लग रही है। ये उसके आखिरी शब्द थे।
दूसरा शिकार — बुठालु (20 फरवरी 2026) — बुठालु ने चुनाव में रामसहाय के खिलाफ बात फैलाई। रामसहाय ने उसे भी जहरीली शराब पिला दी।
तीसरा शिकार , छत्तुराम (12 मार्च 2026) — रामसहाय को शक था कि छत्तुराम उसकी पत्नी पर बुरी नज़र रखता है। उसने छत्तुराम को भी मौत का प्याला पिला दिया।
चौथा शिकार — बुधराम (20 मार्च 2026) — ज़मीन को लेकर पुरानी रंजिश थी। बुधराम 3 बार के पूर्व सरपंच थे।
पाँचवाँ शिकार — विनोद (31 मार्च 2026) — विनोद रोज़ रामसहाय को गाली-बद्दुआ देता था।
छठा शिकार — गजानंद (28 अप्रैल 2026) — रामसहाय को डर था कि वह उस पर जादू-टोना कर रहा है।
सातवाँ शिकार चैतुराम (29 अप्रैल 2026) — 50 हजार के कर्ज़ से मुक्त होना चाहता था। चैतुराम की बेटी ने रोते हुए कहा — "पिता ने उसे अपना भाई माना था... उसने ऐसा क्यों किया?"
आठवाँ शिकार — महेतरू (14 मई 2026) 2023 के चुनाव में मारपीट हुई थी। रामसहाय ने गुस्से में कहा — "ले, मर तू...!" और महेतरू की मौत हो गई।
रामसहाय ने हर मृतक के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ और परिवार को सांत्वना दी। लोग उसे अच्छा इंसान समझते थे, लेकिन सच्चाई यह थी कि वह अपने ही हाथों मारे गए लोगों का मातम मना रहा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
पुलिस को दो दिन तक किया गुमराह, फिर माइंड गेम में फंसा
जब गांव में लगातार मौतों के बाद हलचल बढ़ी, तो ग्रामीणों ने 6 जून 2026 को पुलिस में आवेदन देकर रामसहाय पर संदेह जताया। पुलिस ने रामसहाय से पूछताछ शुरू की। रामसहाय ने पुलिस को गुमराह किया कि, मैं तो उन सबका भाई था।
मैं ही उन्हें अस्पताल ले गया, मैंने ही कफन-दफन किया, मैं रोया भी, मैंने सबको सांत्वना दी। मुझ पर झूठे इल्ज़ाम क्यों? दो दिन तक उसने पुलिस को चकमा दिया। उसके चेहरे पर कोई डर नहीं, कोई पछतावा नहीं, बस एक साइको किलर की शीतलता थी।
जब रामसहाय टूट नहीं रहा था, तब एसपी ओ.पी. शर्मा ने एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक और पूरे पुलिस स्टाप जो इस मामले में जुड़े हुए थे सभी के साथ एक रणनीति बनाई। इससे सीधे पूछताछ नहीं, पहले दोस्त बनना होगा।
पुलिस ने उसे सहानुभूति दिखाई। कहा कि, रामसहाय, तू अच्छा आदमी है। हम जानते हैं तुझे बहुत ताने मिले, बहुत गालियां मिलीं। किसी की सीमा होती है न? रामसहाय ने सारी शिकायतें गिनानी शुरू कर दीं। बद्री रोज़ गाली देता था, छत्तुराम मेरी पत्नी को देखता था, चैतुराम ने कर्ज़ का ब्याज मांगा।
पुलिस ने उसका अहंकार जगाया
पुलिस ने कहा कि, बड़ी चालाकी से किया तूमने, हमें बता कैसे किया? किसी को पता क्यों नहीं चला?
रामसहाय का अहंकार जाग गया। उसे लगा पुलिस उसकी तारीफ कर रही है। वह बोला कि, नदी किनारे शिकारी से मुझे सुहागा मिला था, उसने बताया था कि, मरी मछली में डालो, चिड़िया मर जाती है। मैंने पहले कुत्ते पर ट्रायल किया, एक मिनट में मर गया। फिर मैंने आधा पाव शराब में थोड़ा सा सुहागा मिलाया और एक-एक करके सबको पिलाया।
पुलिस ने शुभचिंतक बनकर सच उगलवाया- एसपी
एसपी ओ.पी. शर्मा ने कहा कि, आरोपी ने पुलिस को दो दिनों तक गुमराह करता रहा न वो टूट रहा था न उसके चेहरे में कोई शिकन था और नहीं कोई पछतावा पुलिस उसे अपने झांसे में लेने उसको दोस्त बनाया उसका विश्वास जीते कि पुलिस उनका शुभचिंतक है। इस पर वो हमारे झांसे में आकर सारी सच्चाई बोल दिया कि वे कैसे 8 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
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