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: छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू की दहशत: तीन दिन में 3700 मुर्गियों की मौत, दो दिन बाद चला पता, बिक्री पर रोक लगाई गई

News Desk / Mon, Feb 6, 2023


मुर्गियों की मौत के बाद पालिकाकर्मियों ने उन्हें दफनाया।

मुर्गियों की मौत के बाद पालिकाकर्मियों ने उन्हें दफनाया। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बर्थ फ्लू की दहशत ने दस्तक दी है। इस बार बालोद में तीन दिन के अंदर 3700 मुर्गियों की मौत हो गई। यह मुर्गियां एक ही फार्म पर थीं। पशुपालन विभाग को इसका पता भी तीसरे दिन चला। इसके बाद टीम पहुंची और शेष मरी हुई मुर्गियों का सैंपल लेने के बाद उन्हें दफना दिया गया है। जांच के लिए सैंपल को रायपुर भेजा गया है। हालांकि विभाग को आशंका है कि मुर्गियों में कोई बड़ी बीमारी हो सकती है। 

तीसरे दिन मौत हुई तो विभाग को पता चला
जानकारी के मुताबिक, दल्लीराजहरा के वार्ड-16 में तिवारी पोल्ट्री फार्म है। इस फार्म से मुर्गियों की मौत का सिलसिला तीन दिन पहले शुरू हुआ था। पहले दिन 300, फिर अगले दिन 600 मुर्गियों की मौत हो गई। इस पर फार्म संचालक ने बिना पशुपालन विभाग को सूचना दिए, उन्हें दफना दिया। तीसरे दिन सभी मुर्गियां मर गईं। इसकी जानकारी जब मंगलवार को पशु पालन विभाग को लगी तो अफसर मौके पर पहुंच गए।

जांच के लिए सैंपल रायपुर भेजे गए
इसके बाद टीम ने मुर्गियों का पोस्टमार्टम कराया और उन्हें दफनाने से पहले सैंपल लिए गए। उन्हें जांच के लिए भेजा गया है। पशुपालन विभाग के उपसंचालक डीके सिहारे ने बताया कि मुर्गियों के मौत होने की बात सामने आई, जिसके बाद टीम को रवाना किया था। जिस तरह मुर्गियों की एक साथ मृत्यु हुई है उसे देखते हुए विशेष जांच के लिए सैंपल रायपुर की लैब में भेजे गए हैं। उस रिपोर्ट का इंतजार है। उससे ही मौत का कारण पता चलेगा।

पिछले साल बर्ड फ्लू से हुई थी मौतें
पिछले साल जिले में बर्ड फ्लू का संक्रमण फैला था। इस दौरान कुसुमकासा क्षेत्र के फार्म में सैकड़ों मुर्गियों की मौतें हुई थी। इसके बाद पशुपालन विभाग ने मोर्चा संभाला हुआ था। अब 3700 मुर्गियों की मौत की बात सामने आई है। ऐसे में विभाग की ओर से मुर्गियों की बिक्री में रोक लगा दी गई है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में भी मुर्गियों के विशेष ध्यान रखने की बात कही जा रही है।


पोल्ट्री फार्म संचालक अभी तक घाटे से उबरे नहीं
जिले के पोल्ट्री फार्म संचालकों ने संयुक्त रूप से समिति बनाई है, जो उनके हित में कार्य करती है। समितिक के सदस्य सुरेंद्र देशमुख ने बताया कि कोरोना काल के समय से अफवाहों के कारण मुर्गियों की बिक्री में काफी कमी आई थी। व्यापार पूरी तरह चौपट हो गया था। एक साथ इतनी मुर्गियों की मौत, अच्छी खबर पोल्ट्री फार्म संचालकों के लिए नहीं है। संचालक पहले ही घाटे से अब तक उबर नहीं पाए हैं। 

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