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CM साहब- आदिवासी बच्चों ने क्या बिगाड़ा है ? : गरियाबंद में झोपड़ी में आंगनबाड़ी, 209 किराए में, 81 जुगाड़ में चल रहे, कमर तक बाढ़ पार कर रहे मासूम

MP CG Times / Fri, Aug 7, 2026

गिरीश जगत, गरियाबंद। सरकारी फाइलों में विकास की लंबी-चौड़ी तस्वीरें खींची जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत उन दावों को बेनकाब कर रही है। एक तरफ सरकार कुपोषण खत्म करने के दावे कर रही है, दूसरी तरफ मासूम बच्चों को खेत के बीच बनी झोपड़ी में आंगनबाड़ी का सहारा दिया जा रहा है। वहीं, करोड़ों की योजनाओं के बीच पुल नहीं बनने से स्कूली बच्चों को रोज कमर तक पानी में उतरकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।

गरियाबंद के आदिवासी अंचलों से सामने आईं ये तस्वीरें बताती हैं कि योजनाओं की घोषणाएं तो हो जाती हैं, लेकिन अमल की रफ्तार इतनी सुस्त है कि उसका खामियाजा सबसे कमजोर तबके को भुगतना पड़ रहा है। अफसरों की उदासीनता और अधूरे विकास कार्यों ने बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनके स्वास्थ्य तक को खतरे में डाल दिया है।

आदिवासी अंचल में विकास की दो तस्वीरों ने खोली सरकारी दावों की पोल

गरियाबंद जिले के आदिवासी इलाकों से विकास की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर मैनपुर विकासखंड के टेकनपारा में आंगनबाड़ी केंद्र खेत के बीच बनी झोपड़ी से संचालित हो रहा है, तो दूसरी ओर साल्हेभांटा के खासरपारा में पुल नहीं बनने से स्कूली बच्चों को बरसात के पूरे मौसम में कमर तक पानी पार कर स्कूल जाना पड़ रहा है।

प्रदेश और केंद्र सरकार आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए लगातार योजनाएं चलाने का दावा करती हैं, लेकिन इन दोनों मामलों ने जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। सरकारी मंजूरी मिलने के बावजूद विकास कार्य पूरे नहीं हो सके, जिससे आम लोगों का जीवन सीधे प्रभावित हो रहा है।

खेत की झोपड़ी में चल रही आंगनबाड़ी

गरियाबंद के आदिवासी विकासखंड मैनपुर की सरगीगुड़ा ग्राम पंचायत के टेकनपारा में आंगनबाड़ी केंद्र खेतों के बीच सड़क किनारे बनी एक झोपड़ी में संचालित किया जा रहा है।यहीं पर छोटे बच्चों को पोषण आहार दिया जाता है।

कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। लेकिन जिस स्थान से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी जानी है, वहीं बच्चों को सुरक्षित भवन तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका।

बारिश में मंडराता रहता है खतरा

बरसात के दौरान झोपड़ी में आंगनबाड़ी चलने से बच्चों और कार्यकर्ताओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसके अलावा सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जीवों के पहुंचने का भी डर रहता है।

इसके बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग इस केंद्र को सुरक्षित भवन उपलब्ध नहीं करा सका। यह स्थिति विभाग की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है।

जिले में 81 आंगनबाड़ी केंद्र अब भी जुगाड़ के भरोसे

गरियाबंद जिले में कुल 1,525 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 209 केंद्र किराए के भवनों में चल रहे हैं, जबकि 91 केंद्र दूसरे सरकारी भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 81 आंगनबाड़ी केंद्र जुगाड़ व्यवस्था के सहारे चल रहे हैं, जिसे सामुदायिक सहयोग का नाम दिया गया है।

सालों से मांग के बाद दो वर्ष पहले 12 नए आंगनबाड़ी भवनों की मंजूरी तो मिल गई, लेकिन आदिवासी विकास विभाग अब तक उनका निर्माण शुरू नहीं करा सका। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कुपोषण मुक्त अभियान को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है।

सड़क बनी, लेकिन पुल नहीं... बरसात में बेकार हो गया पूरा रास्ता

गरियाबंद के साल्हेभांटा क्षेत्र में बनवापारा से खासरपारा तक प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत पक्की सड़क बनाई गई है, लेकिन बीच में पुल नहीं बनने के कारण बरसात के मौसम में सड़क का उपयोग लगभग बंद हो जाता है। नाले में पानी बढ़ते ही ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के सामने आवाजाही का संकट खड़ा हो जाता है।

कमर तक पानी पार कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे

सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ रही है। नाले में पानी आने पर बच्चों को कमर तक पानी में उतरकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। कई बार वे भीगे हुए कपड़ों में ही पूरे दिन स्कूल में पढ़ाई करने को मजबूर होते हैं। यदि पानी का बहाव अधिक हो जाए तो स्कूल जाना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीण बोले- हर बारिश में बढ़ जाती है परेशानी

पालक रूपसिंह मरकाम और पूर्व जनपद सदस्य कल्याण ओटी ने बताया कि सिर्फ स्कूली बच्चे ही नहीं, बल्कि खासरपारा और आसपास के ग्रामीणों को भी पूरे बरसात के मौसम में आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

उनका कहना है कि पुल नहीं बनने से हर साल यही स्थिति बनती है और लोगों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है।

158 लाख का पुल मंजूर, टेंडर प्रक्रिया जारी

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता अभिषेक पाटकर ने बताया कि खासरपारा नाले पर 30 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए 1 करोड़ 58 लाख रुपये की मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुल निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।

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