आखिर कौन निगल गया किसानों का पैसा ? : गरियाबंद में 22 में 11 सड़कों में दरारें, गाड़ियां चलना मुश्किल; क्या रायपुर से लिखी गई करप्शन की स्क्रिप्ट ?
गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में किसानों की सुविधा के नाम पर मंडी निधि से करोड़ों रुपए खर्च हुए, लेकिन नतीजा ऐसी सड़कें हैं जो बनने के कुछ ही महीनों में दरारों से कराहने लगीं। कहीं काम अधूरा पड़ा है, कहीं सड़क पर वाहनों की आवाजाही तक मुश्किल हो गई है। सवाल यह है कि किसानों के पैसे से बनी इन सड़कों की ऐसी हालत के लिए जिम्मेदार कौन है? और अगर करोड़ों के काम की निगरानी रायपुर में बैठकर होनी है, तो फिर गांव की जमीन पर गुणवत्ता कौन देखेगा?
सरकार और मंडी बोर्ड का सिस्टम कागजों पर कितना भी मजबूत क्यों न दिखे, जमीन पर उसकी पोल इन टूटी सड़कों ने खोल दी है। करीब 3.80 करोड़ रुपए के 22 कामों में से कई अब तक अधूरे हैं और कई में दरारें पड़ चुकी हैं। यानी पैसा खर्च हुआ, काम भी हुए, लेकिन सवाल जस का तस है। किसानों की सुविधा के लिए निकली मंडी निधि आखिर सुविधा दे रही है या सिर्फ फाइलों में विकास पूरा कर रही है?

किसानों और मंडी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होने वाली मंडी निधि से गरियाबंद जिले में 22 सीसी सड़कों के लिए करीब 3 करोड़ 79 लाख 48 हजार रुपए मंजूर किए गए। वर्ष 2025 में बिन्द्रानवागढ़ क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में इन सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेका कंपनियों को अगस्त 2025 से कार्य आदेश भी जारी हुए। लेकिन करीब एक साल बाद भी सभी काम पूरे नहीं हो पाए हैं। कुछ सड़कें अधूरी हैं, जबकि पूर्ण बताई गई कई सड़कों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं। कुछ जगहों पर सड़क की हालत ऐसी है कि वाहनों की आवाजाही तक प्रभावित हो गई है।
22 सड़कों के लिए 3.79 करोड़ रुपए मंजूर
वर्ष 2025 में बिन्द्रानवागढ़ क्षेत्र के विभिन्न गांवों में 22 सीसी सड़कों के निर्माण के लिए मंडी निधि से 3 करोड़ 79 लाख 48 हजार रुपए की मंजूरी दी गई। निविदा प्रक्रिया के बाद संबंधित ठेका कंपनियों को अगस्त 2025 से काम शुरू करने के आदेश दिए गए।
जानकारी के मुताबिक कुछ ठेकेदारों ने काम पूरा कर दिया, जबकि कुछ ने काम शुरू ही नहीं किया या अधूरा छोड़ दिया। पूर्ण बताई गई कई सड़कों में अब दरारें सामने आने लगी हैं।

धौराझोला मार्ग पर 10.61 लाख की सड़क में दो महीने में दरारें
मूढ़गेल माल से धौराझोला जाने वाले मार्ग पर 351 मीटर सीसी सड़क मेसर्स आशीष यादव ने करीब पांच महीने पहले बनाई थी। इसकी लागत 10 लाख 61 हजार रुपए बताई गई है। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण के करीब दो महीने बाद ही सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने लगीं। इससे इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
इस सड़क को लेकर ग्रामीणों की एक और शिकायत है। यहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत पक्की सड़क स्वीकृत थी। लेकिन मुख्य मार्ग के शुरुआती 351 मीटर हिस्से में मंडी बोर्ड की सीसी सड़क बनने से कनेक्टिविटी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की गुणवत्ता खराब होने के कारण न तो यह टिकाऊ बनी और न ही मुख्य मार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी मिल पाई।

11 सड़कों में दरारें, 5 का काम अधूरा
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक धौराझोला के अलावा खरीपथरा, तुहामेटा, आमदी, भरवामुड़ा समेत 11 सड़कों में दरारें सामने आई हैं। वहीं छैलडोंगरी और गौहरापदर समेत 5 सड़कों का काम अभी अधूरा बताया जा रहा है।
निर्माण कार्यों में पारदर्शिता के लिए लगाए जाने वाले सूचना बोर्ड भी किसी सड़क पर नजर नहीं आने की बात कही गई है। इससे निर्माण लागत, एजेंसी और कार्य की समयसीमा जैसी जानकारी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही है।
काली मिट्टी में बेस तैयार करने पर भी सवाल
ग्रामीण इलाकों में सीसी सड़क की गुणवत्ता के लिए जमीन की स्थिति और बेस तैयार करने का काम महत्वपूर्ण होता है। आरोप है कि काली मिट्टी वाले स्थानों पर सड़क निर्माण के दौरान बेस तैयार करने के तय मापदंडों का पालन नहीं किया गया।
ऐसे स्थानों पर मुरम डालकर उसका सही तरीके से कॉम्पेक्शन करना और जरूरत के मुताबिक पानी की तराई कर मुरम की पटाई करना जरूरी होता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन प्रक्रियाओं में लापरवाही के कारण कई सड़कों में जल्द दरारें आ गईं।
रायपुर से हो रही मॉनिटरिंग पर सवाल
इन निर्माण कार्यों की तकनीकी मॉनिटरिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मंडी बोर्ड की तकनीकी शाखा संभाग स्तर पर रायपुर स्थित कार्यालय से काम की निगरानी करती है। गरियाबंद से रायपुर की दूरी करीब 220 किलोमीटर है। आरोप है कि राजधानी में बैठे तकनीकी कर्मचारियों द्वारा जिले में बड़ी संख्या में निर्माण कार्यों की नियमित फील्ड मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है।
जानकारी के अनुसार जिले में मंडी निधि से 44 से ज्यादा कार्य स्वीकृत हैं। ऐसे में सीमित तकनीकी अमले द्वारा इतने कार्यों की प्रभावी निगरानी नहीं होने से निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है।
कांग्रेस ने कहा- मंडी निधि का इस्तेमाल किसानों के लिए होना चाहिए
कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने मंडी निधि से कराए जा रहे कार्यों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मंडी निधि का इस्तेमाल किसानों से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए। बेसरा ने कहा कि वे पूर्व में मंडी उपाध्यक्ष थे और पिछली सरकार के दौरान इस निधि को मंडी की सुविधाओं पर केंद्रित करके खर्च किया जाता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में जिम्मेदार लोगों द्वारा नेताओं को खुश करने के लिए कहीं भी कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी स्वीकृत कार्यों की समीक्षा, गुणवत्ता की जांच और कथित कमीशनखोरी की जांच की मांग की है।
SDO बोले- खराब गुणवत्ता मिली तो कार्रवाई होगी
मंडी बोर्ड के SDO कमल यादव ने कहा कि उन्होंने अभी ज्वाइन किया है, इसलिए फिलहाल फील्ड की ज्यादा जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कहीं निर्माण की गुणवत्ता खराब पाई जाती है तो वे जल्द ही मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जिन ठेकेदारों ने काम पूरा नहीं किया है, उन्हें नए सिरे से नोटिस भेजे जा रहे हैं।
मंडी सचिव बोले- खुद निरीक्षण करूंगा
गरियाबंद मंडी के सचिव दिनेश बंजारे ने कहा कि मंडी निधि का इस्तेमाल मंडी विकास, किसानों से जुड़े कार्यों और किसानों की आवाजाही में सुविधा के लिए किया जाना है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत कार्य किसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही किए जाने हैं।
बंजारे ने कहा कि उन्हें कई बिंदुओं की जानकारी अभी मिली है। वे स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे। इसके बाद तकनीकी शाखा और मंडी बोर्ड के डायरेक्टर को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया जाएगा।
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