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: आरक्षण पर विवाद: CM भूपेश ने 30 को बुलाई कैबिनेट बैठक, राजभवन के रुख पर होगी बात, शीतकालीन सत्र भी 2 जनवरी से

News Desk / Mon, Dec 26, 2022


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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छत्तीसगढ़ में संशोधित आरक्षण विधेयक को लेकर विवाद गरमाता जा रहा है। इसके चलते कांग्रेस सरकार और राजभवन के बीच भी टकराव की स्थिति बन गई है। इसे लेकर अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 30 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। इसमें राजभवन के रुख को लेकर चर्चा होगी। इसके अलावा विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर भी बात होगी। सत्र 2 जनवरी से शुरू होगा। 

यह भी पढ़ें...आरक्षण पर रार: CM भूपेश ने कहा- विरोध पर भी राज्यपाल का ईगो सेटिस्फाई किया, विधानसभा से बड़ा है विधिक सलाहकार?

उपाध्यक्ष चयन को लेकर भी होगी बैठक में चर्चा
विधानसभा का शीतकालीन सत्र दो जनवरी से  है। सत्र के दौरान उपाध्यक्ष चयन को लेकर कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। साथ ही सत्र के दौरान किए जाने वाले शासकीय कार्य पर भी चर्चा होगी। सत्र में लाए जाने वाले विधेयकों की सूचना अब तक नहीं आई है। अन्य विभागों के प्रस्तावों पर भी निर्णय लिए जाएंगे। उनसे कैबिनेट के प्रस्ताव 29 दिसंबर तक भेजने कहा गया है। 
 

यह भी पढ़ें...आरक्षण विधेयक अटका: राज्यपाल ने कहा- कानूनी सलाह के बाद ही कर पाऊंगी हस्ताक्षर, अब उपचुनाव के बाद फैसला

राज्यपाल के पास अटका है आरक्षण विधेयक
दरअसल, आरक्षण संशोधन विधेयक के विधानसभा में पास हो जाने के बाद करीब 22 दिन बीत चुके हैं। तब से विधेयक राजभवन में राज्यपाल के हस्ताक्षर को लेकर अटका हुआ है। विधेयक पर संशय के चलते राजभवन से 10 सवाल भी सरकार से पूछे गए थे, इसके जवाब भी भेजे जा चुके हैं। तमाम जद्दोजहद और समय बीतने के बाद भी राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं होने से अब कांग्रेस सरकार से टकराव बढ़ने लगा है।

यह भी पढ़ें...Chhattisgarh : विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित, SC, ST, OBC का बढ़ा, पर EWS का छह फीसदी हुआ कम

जवाब इसलिए दिया की ईगो सटिस्फाई हो जाए
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को यहां तक कह दिया था कि, सारे अधिकारी मेरी इस बात के विरोध में थे कि राज्यपाल ने जो 10 सवाल भेजे हैं उनका जवाब देना है। संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था है ही नहीं। फिर भी मैंने राज्यपाल की जिद को ध्यान में रखते हुए कि पौने तीन करोड़ जनता के लिए आरक्षण लागू हो जाए। उनको लाभ मिले, ये सोचकर जवाब भेजे। राज्यपाल का जो ईगो है, वह सटिसफाई हो जाए। 

विस्तार

छत्तीसगढ़ में संशोधित आरक्षण विधेयक को लेकर विवाद गरमाता जा रहा है। इसके चलते कांग्रेस सरकार और राजभवन के बीच भी टकराव की स्थिति बन गई है। इसे लेकर अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 30 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। इसमें राजभवन के रुख को लेकर चर्चा होगी। इसके अलावा विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर भी बात होगी। सत्र 2 जनवरी से शुरू होगा। 

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उपाध्यक्ष चयन को लेकर भी होगी बैठक में चर्चा
विधानसभा का शीतकालीन सत्र दो जनवरी से  है। सत्र के दौरान उपाध्यक्ष चयन को लेकर कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। साथ ही सत्र के दौरान किए जाने वाले शासकीय कार्य पर भी चर्चा होगी। सत्र में लाए जाने वाले विधेयकों की सूचना अब तक नहीं आई है। अन्य विभागों के प्रस्तावों पर भी निर्णय लिए जाएंगे। उनसे कैबिनेट के प्रस्ताव 29 दिसंबर तक भेजने कहा गया है। 
 

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राज्यपाल के पास अटका है आरक्षण विधेयक
दरअसल, आरक्षण संशोधन विधेयक के विधानसभा में पास हो जाने के बाद करीब 22 दिन बीत चुके हैं। तब से विधेयक राजभवन में राज्यपाल के हस्ताक्षर को लेकर अटका हुआ है। विधेयक पर संशय के चलते राजभवन से 10 सवाल भी सरकार से पूछे गए थे, इसके जवाब भी भेजे जा चुके हैं। तमाम जद्दोजहद और समय बीतने के बाद भी राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं होने से अब कांग्रेस सरकार से टकराव बढ़ने लगा है।

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जवाब इसलिए दिया की ईगो सटिस्फाई हो जाए
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को यहां तक कह दिया था कि, सारे अधिकारी मेरी इस बात के विरोध में थे कि राज्यपाल ने जो 10 सवाल भेजे हैं उनका जवाब देना है। संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था है ही नहीं। फिर भी मैंने राज्यपाल की जिद को ध्यान में रखते हुए कि पौने तीन करोड़ जनता के लिए आरक्षण लागू हो जाए। उनको लाभ मिले, ये सोचकर जवाब भेजे। राज्यपाल का जो ईगो है, वह सटिसफाई हो जाए। 

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