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: Chhattisgarh Reservation Quota: छत्तीसगढ़ में 76 फीसदी आरक्षण की राह कितनी आसान? समझिए पूरी बात

News Desk

News Desk / Fri, Nov 25, 2022

Chhattisgarh Reservation Quota: छत्तीसगढ़ में 76 फीसदी आरक्षण की राह कितनी आसान? समझिए पूरी बात

रायपुर: छत्तीसगढ़ में आरक्षण को लेकर सियासत गरम है। इस बीच आरक्षण संशोधन विधेयक (Chhattisgarh reservation quota) के प्रस्ताव को भूपेश कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अब इसे सरकार एक दिसंबर को होने वाली विधानसभा के विशेष सत्र में पेश करेगी। सरकार इसे पूरे डाटा के साथ विधानसभा के विशेष सत्र में रखेगी हालांकि बीजेपी लगातार आदिवासी आरक्षण में कुछ विशेष मांगों को लेकर सरकार को घेरने का काम कर रही थी। ऐसे में विधानसभा का विशेष सत्र भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। वहीं, सरकार के फैसले पर विशेषज्ञों के मन में कई सवाल भी हैं।


दरअसल, गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में सीएम भूपेश बघेल कैबिनेट की बैठक हुई थी। इसमें आरक्षण संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गई है। बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने जानकारी दी। हालांकि किस वर्ग को आरक्षण में कितना फायदा मिलेगा उसकी स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हुई है। साथ ही बताया कि आने वाले एक और दो दिसंबर को विधानसभा के विशेष सत्र में पेश होने वाले आरक्षण विधेयक के विषय में विस्तार से चर्चा की गई है।

इसमें अनुसूचित जनजाति के अलावा अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस के आरक्षण पर भी बात हुई है। उन्होंने बताया कि इससे पहले उच्च न्यायालय ने जिला कैडर का आरक्षण खारिज कर दिया था। इसलिए जिला कैडर के आरक्षण को भी एक्ट में लाया जाएगा।आरक्षण की चर्चा के विषय पर समझने का प्रयास करें तो यह विधेयक आबादी के आधार पर बनाया गया है।

आदिवासियों के लिए 32% आरक्षण का प्रावधान है और सभी वर्गों में कुल 76 पर्सेंट का आरक्षण मिल सकता है। वहीं, आरक्षण संशोधन विधेयक कैबिनेट में मंजूरी के साथ ही यह माना जा रहा है। सभी वर्गों को मिलाकर प्रदेश में अब आरक्षण का कुल प्रतिशत 76 हो जाएगा। इसमें आदिवासियों को 32 परसेंट आरक्षण, इसी तरह अनुसूचित जाति के लिए 13 परसेंट, ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27% प्रस्तावित, सामान्य वर्ग के गरीब ईडब्ल्यूएस को 4% आरक्षण। इसी तरह विधानसभा में पेश किए जाने वाले संशोधन विधेयक में कुल आरक्षण का जो प्रतिशत होगा वह 76% होने की बात कही जा रही है।

आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर संशय
हालांकि आरक्षण संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। अभी इसे विधानसभा में पेश करना बाकी है। इतना ही नहीं जानकारों की मानें तो संशोधन विधेयक को विधानसभा में पारित करवाने में कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं, राज्यपाल जब तक मंजूरी नहीं दे देती, तब तक इसे कानून का स्वरूप नहीं दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की तरफ नजर डालें तो राज्यपाल इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए सरकार के माध्यम से विधानसभा को वापस लौटा सकती हैं। यह भी हो सकता है कि आगे राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेज भी सकती है।

ऐसे में अभी इसे पास करवाने में बहुत सारी अड़चनें हैं। इनके दूर हो जाने के बाद ही 76 फीसदी तक प्रदेश में कोटा हो सकता है। वरिष्ठ पत्रकार बाबूलाल शर्मा ने नवभारत टाइम्स.कॉम से बातचीत में बताया कि आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी दल दोनों ही आवाज उठा रहे थे। हालांकि कांग्रेस की सरकार ने अपना वादा पूरा करते हुए कैबिनेट में इसे मंजूरी दे दी है।

उन्होंने कहा कि अभी इसे विधानसभा सत्र में रखा जाएगा। हालांकि बीजेपी इस विधेयक का विरोध करती भी है, तब भी यह विधेयक पूर्ण रूप से विधानसभा में पारित हो जाएगा। हालांकि जब तक विधेयक को कानून का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक आरक्षण नहीं माना जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि राज्यपाल की तरफ से इस विधेयक को मंजूरी भी दे दी जाएगी। इसे नवमी अनुसूची के माध्यम से बनाया जाएगा।

बाबूलाल शर्मा ने बताया कि नवमी अनुसूची को समझने का प्रयास करें तो इसमें यह प्रावधान है कि इस माध्यम से किए गए निर्णय की सुनवाई किसी कोर्ट में नहीं होगी। इसलिए आरक्षण संशोधन विधेयक को अगर कानून का दर्जा मिलता है तो उसे नवमी अनुसूची के दायरे में रखकर निर्णय लेना पड़ेगा। अगर राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति को अनुमोदित कर दिया तो तब इसमें काफी वक्त लग सकता है।
रायपुर से रोहित बर्मन की रिपोर्ट

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