2026 में शेयर बाजार में कितने लाख करोड़ रुपए डूबे? शेयर बाजार में गिरावट की वजह क्या है? सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट क्यों जारी है? 2026 में शेयर बाजार का आगे क्या हाल होगा? निवेशकों की संपत्ति में कितनी कमी आई?
Stock Market Crash History : 2026 में 80 लाख करोड़ स्वाहा, अकेले मार्च ने निगले 51 लाख करोड़; बाजार में कब-कब मची ऐसी तबाही?
Wed, Oct 28, 2026
Stock Market Crash 2026: भारतीय शेयर बाजार में इस साल कई बार बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मार्च में निवेशकों की संपत्ति करीब 51.09 लाख करोड़ रुपए घट गई। 19 मार्च को सेंसेक्स लगभग 2,497 अंक टूटा और एक ही दिन में बाजार की पूंजी करीब 12.87 लाख करोड़ रुपए कम हो गई। इस तरह 2026 में करीब 80 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए।
28 अक्टूबर को भी बाजार दबाव में रहा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि गिरावट थमेगी या बिकवाली जारी रहेगी।
80 लाख करोड़ रुपए नुकसान का अनुमान ?
2026 में शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावटों के चलते निवेशकों की संपत्ति को करीब 80 लाख करोड़ रुपए तक का नुकसान होने का अनुमान है। मार्च में ही बाजार पूंजीकरण करीब 51.09 लाख करोड़ रुपए घट गया था। इसके बाद मई और अक्टूबर में भी बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
2026 में कब-कब शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई?
19 मार्च: एक दिन में 12.87 लाख करोड़ रुपए घटे
19 मार्च को सेंसेक्स 2,496.89 अंक यानी 3.26% गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ। निफ्टी भी करीब 776 अंक टूटकर 23,002.15 पर आ गया।
इस दिन बाजार की कुल पूंजी करीब 12.87 लाख करोड़ रुपए घट गई। कच्चे तेल में तेजी, पश्चिम एशिया का तनाव और HDFC Bank से जुड़ी खबरों ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।
मार्च: पूरे महीने में 51 लाख करोड़ रुपए का नुकसान
मार्च में गिरावट लगातार बनी रही। महीने के दौरान सेंसेक्स करीब 11.49% और निफ्टी 11.31% गिरा। इस दौरान निवेशकों की संपत्ति में करीब 51.09 लाख करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई।
30 मार्च: महीने के आखिरी कारोबारी दिन भी गिरावट
30 मार्च को सेंसेक्स 1,635.67 अंक यानी 2.22% गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ। निफ्टी 488.20 अंक टूटकर 22,331.40 पर आ गया। उस दिन निवेशकों की संपत्ति करीब 9.74 लाख करोड़ रुपए घट गई।
11 मई: बाजार पर फिर दबाव
11 मई को सेंसेक्स करीब 1,313 अंक और निफ्टी लगभग 360 अंक गिरा। बाजार की गिरावट के बीच निवेशकों की संपत्ति में करीब 5.66 लाख करोड़ रुपए की कमी दर्ज हुई।
28 अक्टूबर: बाजार फिर गिरावट के साथ खुला
28 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 750 अंक से ज्यादा गिरकर 72,841.26 पर आ गया। निफ्टी भी 180 अंक से ज्यादा टूटकर 22,600 के नीचे पहुंच गया।
सुबह के कारोबार में IT शेयरों पर दबाव दिखा। हालांकि, शुरुआती आंकड़े पूरे दिन के कारोबार का अंतिम नतीजा नहीं हैं।
शेयर बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की महंगाई: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने से आयात बिल और कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी रहता है।
2. पश्चिम एशिया में तनाव: क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका रहती है। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ती है और बाजार में बिकवाली हो सकती है।
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ता है। लगातार बिकवाली से सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट तेज हो सकती है।
4. अमेरिकी ब्याज दरों की चिंता: अमेरिका के फेडरल रिजर्व के फैसलों का असर विदेशी निवेश और डॉलर की चाल पर पड़ता है। इससे भारतीय बाजार भी प्रभावित होता है।
5. कंपनियों के नतीजे: कंपनियों की कमाई उम्मीद से कमजोर रहने पर उनके शेयर गिर सकते हैं। महंगी लागत और मांग में सुस्ती भी मुनाफे पर असर डाल सकती है।
आगे शेयर बाजार में गिरावट जारी रहेगी या संभलेगा?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के हालात और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगी।
अगर कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं, तनाव कम होता है और विदेशी निवेशक खरीदारी शुरू करते हैं, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे भी तेजी की वजह बन सकते हैं।
लेकिन तेल महंगा बना रहता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव और गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
निवेशकों को कच्चे तेल, रुपए की चाल, विदेशी निवेशकों के आंकड़ों और कंपनियों के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। केवल एक-दो दिन की तेजी को बाजार में स्थायी सुधार का संकेत नहीं मानना चाहिए।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि गिरावट खत्म हो गई है। बाजार की अगली दिशा समझने के लिए आने वाले कारोबारी सत्रों के संकेत अहम होंगे।
नोट:
मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार में आई बड़ी गिरावटों के आधार पर 2026 में अब तक निवेशकों की संपत्ति में करीब 80 लाख करोड़ रुपए तक की कमी आने का अनुमान है। यह आंकड़ा अनुमानित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।