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: OBC Reservation: हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश वापस लेने से किया इनकार, सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं याचिकाएं

News Desk

News Desk / Sun, Nov 20, 2022

OBC Reservation: हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश वापस लेने से किया इनकार, सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं याचिकाएं

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court new - फोटो : istock

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मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के संबंध में दायर 62 याचिकाओं पर सोमवार को जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंद्र सिंह युगलपीठ द्वारा सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा ईडब्ल्यूएस आरक्षण को उचित करार दिए जाने के संबंध में पारित आदेश का हवाला देते हुए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर लगी रोक को वापस लेने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने स्थगन आदेश वापस लेने के आग्रह को अस्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 12 दिसंबर को निर्धारित की है।

गौरतलब है कि प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ व पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गयी थीं। याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। ओबीसी आरक्षण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दायर चार याचिकाओं में एक याचिका वापस ली गई है।

सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने का हवाला देते हुए ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ईओडब्ल्यू आरक्षण को उचित बताए जाने संबंधित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। हाईकोर्ट ने कई भर्तियों में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत लागू करने पर स्थगन आदेश पारित किया है। जिसके कारण पीएससी, शिक्षकों सहित अन्य भर्तियां रुकी हुई हैं। युगलपीठ से स्थगन आदेश वापस लेने का आग्रह किया गया था। याचिकाकर्ताओं की तरफ से आदित्य संघी तथा शासन की तरफ से विशेष अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह उपस्थित हुए।

विस्तार

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के संबंध में दायर 62 याचिकाओं पर सोमवार को जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंद्र सिंह युगलपीठ द्वारा सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा ईडब्ल्यूएस आरक्षण को उचित करार दिए जाने के संबंध में पारित आदेश का हवाला देते हुए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर लगी रोक को वापस लेने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने स्थगन आदेश वापस लेने के आग्रह को अस्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 12 दिसंबर को निर्धारित की है।

गौरतलब है कि प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ व पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गयी थीं। याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। ओबीसी आरक्षण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दायर चार याचिकाओं में एक याचिका वापस ली गई है।

सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने का हवाला देते हुए ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ईओडब्ल्यू आरक्षण को उचित बताए जाने संबंधित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। हाईकोर्ट ने कई भर्तियों में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत लागू करने पर स्थगन आदेश पारित किया है। जिसके कारण पीएससी, शिक्षकों सहित अन्य भर्तियां रुकी हुई हैं। युगलपीठ से स्थगन आदेश वापस लेने का आग्रह किया गया था। याचिकाकर्ताओं की तरफ से आदित्य संघी तथा शासन की तरफ से विशेष अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह उपस्थित हुए।


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