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: MP News: बीएससी नर्सिंग सेकंड ईयर की परीक्षा पर रोक, हाईकोर्ट का उत्तर पुस्तिकाओं को शील्ड करने का आदेश

News Desk / Wed, Dec 7, 2022


मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ। - फोटो : अमर उजाला

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने प्रदेशभर में आयोजित हो रही बीएससी नर्सिंग सेकंड ईयर की परीक्षा पर रोक लगा दी है। यह रोक नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े ओर जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविधालय की ओर से जारी नर्सिंग परीक्षाओं का टाइम-टेबल आने के बाद लगाई गई है। साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में आयुर्विज्ञान विश्वविधालय के परीक्षा नियंत्रक को चार जनवरी को दस्तावेजों के साथ तलब किया है। साथ ही एक और छह दिसंबर को जो परीक्षाएं आयोजित हो चुकी हैं, उनकी उत्तर पुस्तिका को शील्ड करने का आदेश भी जारी किया गया है। 

दरअसल, 19 सितंबर को जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविधालय की तरफ से एक आदेश जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि बीएससी नर्सिंग के सेकंड ईयर की परीक्षा 2022 आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा में कुछ नर्सिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थी संबद्धता एवं नामांकन के अभाव में परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे महाविद्यालय ओर उनके विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय यह परीक्षा आयोजित कर रहा है। ऐसे में याचिकाकर्ता ने पूर्व में नर्सिंग परीक्षाओं के फर्जीवाड़े ओर ताजा आदेश को कोर्ट के संज्ञान में लाया है। इसके बाद ही कोर्ट ने परीक्षाओं पर स्टे दिया है। याचिकाकर्ता के वकील उमेश बोहरे ने बताया कि विश्वविद्यालय के आदेश के बाद स्पष्टता नहीं थी। कई विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस आदेश से उन्हें फौरी राहत मिली है। 

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने प्रदेशभर में आयोजित हो रही बीएससी नर्सिंग सेकंड ईयर की परीक्षा पर रोक लगा दी है। यह रोक नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े ओर जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविधालय की ओर से जारी नर्सिंग परीक्षाओं का टाइम-टेबल आने के बाद लगाई गई है। साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में आयुर्विज्ञान विश्वविधालय के परीक्षा नियंत्रक को चार जनवरी को दस्तावेजों के साथ तलब किया है। साथ ही एक और छह दिसंबर को जो परीक्षाएं आयोजित हो चुकी हैं, उनकी उत्तर पुस्तिका को शील्ड करने का आदेश भी जारी किया गया है। 

दरअसल, 19 सितंबर को जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविधालय की तरफ से एक आदेश जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि बीएससी नर्सिंग के सेकंड ईयर की परीक्षा 2022 आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा में कुछ नर्सिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थी संबद्धता एवं नामांकन के अभाव में परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे महाविद्यालय ओर उनके विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय यह परीक्षा आयोजित कर रहा है। ऐसे में याचिकाकर्ता ने पूर्व में नर्सिंग परीक्षाओं के फर्जीवाड़े ओर ताजा आदेश को कोर्ट के संज्ञान में लाया है। इसके बाद ही कोर्ट ने परीक्षाओं पर स्टे दिया है। याचिकाकर्ता के वकील उमेश बोहरे ने बताया कि विश्वविद्यालय के आदेश के बाद स्पष्टता नहीं थी। कई विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस आदेश से उन्हें फौरी राहत मिली है। 


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