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: Water Vision@2047: PM का वीडियो संदेश, शिवराज बोले- भोपाल जल-प्रबंधन का ऐतिहासिक रूप से अनूठा उदाहरण

News Desk / Wed, Jan 4, 2023


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला

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राजधानी भोपाल में देश में पहली बार जल संरक्षण पर राज्यों के मंत्रियों का प्रथम अखिल भारतीय सम्मेलन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेशन सेंटर भोपाल में प्रारंभ हुआ। प्रधानमंत्री के वर्चुअली दिए गए वीडियो संदेश से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। छह जनवरी तक चलने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में जल समस्याओं के समाधान का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि हमारी संवैधानिक व्यवस्था में पानी का विषय राज्यों के नियंत्रण में आता है। जल-संरक्षण के लिए देश को समन्वित प्रयास की आवश्यकता है। जल को सहयोग और समन्वय का विषय बनाना प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी है। जल प्रबंधन में सरकार के प्रयासों के साथ जन-भागीदारी बढ़ाने के लिए सार्वजनिक पहल और सामाजिक संगठनों को जोड़ना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती, जल-संरक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। देश में ड्रॉप-मोर क्रॉप अभियान को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने अटल भू-जल संरक्षण योजना में भू-जल पुनर्भरण के लिए माइक्रो स्तर पर गतिविधियां संचालित करने की आवश्यकता भी बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी कोई भी नदी या जल संरचना बाहरी कारकों से प्रदूषित न हो। इसके लिए वाटर मैनेजमेंट तथा सीवेज ट्रीटमेंट के क्षेत्र में संवेदनशीलता और सक्रियता से काम करने की आवश्यकता है।

सीएम ने माना केंद्र शासन का आभार
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केन्द्रीय मंत्री शेखावत और केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जल-संरक्षण और संचय के प्रतीक स्वरूप छोटे घड़ों से एक बड़े घड़े में जल अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में नेशनल फ्रेमवर्क ऑन रियूज ऑफ ट्रीटे़ड वेस्ट वाटर, नेशनल फ्रेमवर्क फॉर सेडीमेन्टेशन मैनेजमेंट और जल इतिहास सब पोर्टल की ई-लांचिंग की गई। साथ ही जल शक्ति अभियान ‘कैच द रेन’ पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी हुआ। मुख्यमंत्री ने वाटर विजन @2047 जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विचार-विमर्श के लिए भोपाल का चयन करने पर केंद्र शासन का आभार मानते हुए कहा कि भोपाल, जल-प्रबंधन का ऐतिहासिक रूप से अनूठा उदाहरण रहा है। राजा भोज द्वारा 10वीं शताब्दी में बनाई गई बड़ी झील आज भी भोपाल की एक तिहाई जनता को पेयजल की आपूर्ति कर रही है। प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 2 हजार जल संरचनाएं विद्यमान हैं। यह हम सब का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री का नेतृत्व हमें प्राप्त हुआ और जल-संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए भी हमें उनका मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

जल-जीवन मिशन में 50 हजार करोड़ रुपये के कार्य जारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा में नदी के दोनों ओर पौधारोपण को अभियान के रूप में लिया गया। प्रदेश में जल-जीवन मिशन में 50 हजार करोड़ रुपये के कार्य चल रहे हैं, इससे 46% घरों को नल से जल उपलब्ध कराना संभव होगा। सभी पहलुओं को सम्मिलित करते हुए प्रदेश में अगले एक-दो माह में जल नीति लाई जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेड़ और पानी का चोली दामन का साथ है। मैंने स्वयं प्रतिदिन पौधे लगाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प के अनुसार मैं प्रतिदिन तीन पौधे लगाता हूं। मुख्यमंत्री ने वाटर विजन@2047 में आए सभी प्रतिभागियों को 6 जनवरी को पौधारोपण के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह पौध-रोपण पूरे देश को जल-संरक्षण का संदेश देगा और वाटर विजन@2047 की स्मृतियों को अक्षुण्ण रखेगा।

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोपाल में वाटर विजन@2047 के आयोजन की सहमति देने और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री चौहान का आभार माना। मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। हमारा देश विकसित देश बनने की ओर अग्रसर है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण की चुनौती को देखते हुए माइक्रो स्तर पर समग्र जल-प्रबंधन के लिए कार्य योजनाएं बनाना आवश्यक हैं। देश में जल की भण्डारण क्षमता को बढ़ाना भी आवश्यक है। यह छोटी संरचनाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करने और भू-गर्भीय जल-संरक्षण से संभव होगा।

दो दिवसीय आयोजन में पांच विषयों – जल की कमी- जल की अधिकता और पहाड़ी इलाकों में जल-संरक्षण, पानी का दोबारा इस्तेमाल, जल सुशासन, जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने में सक्षम जल अधो-संरचना और जल गुणवत्ता पर सत्र होंगे।

विस्तार

राजधानी भोपाल में देश में पहली बार जल संरक्षण पर राज्यों के मंत्रियों का प्रथम अखिल भारतीय सम्मेलन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेशन सेंटर भोपाल में प्रारंभ हुआ। प्रधानमंत्री के वर्चुअली दिए गए वीडियो संदेश से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। छह जनवरी तक चलने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में जल समस्याओं के समाधान का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि हमारी संवैधानिक व्यवस्था में पानी का विषय राज्यों के नियंत्रण में आता है। जल-संरक्षण के लिए देश को समन्वित प्रयास की आवश्यकता है। जल को सहयोग और समन्वय का विषय बनाना प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी है। जल प्रबंधन में सरकार के प्रयासों के साथ जन-भागीदारी बढ़ाने के लिए सार्वजनिक पहल और सामाजिक संगठनों को जोड़ना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती, जल-संरक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। देश में ड्रॉप-मोर क्रॉप अभियान को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने अटल भू-जल संरक्षण योजना में भू-जल पुनर्भरण के लिए माइक्रो स्तर पर गतिविधियां संचालित करने की आवश्यकता भी बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी कोई भी नदी या जल संरचना बाहरी कारकों से प्रदूषित न हो। इसके लिए वाटर मैनेजमेंट तथा सीवेज ट्रीटमेंट के क्षेत्र में संवेदनशीलता और सक्रियता से काम करने की आवश्यकता है।

सीएम ने माना केंद्र शासन का आभार
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केन्द्रीय मंत्री शेखावत और केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जल-संरक्षण और संचय के प्रतीक स्वरूप छोटे घड़ों से एक बड़े घड़े में जल अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में नेशनल फ्रेमवर्क ऑन रियूज ऑफ ट्रीटे़ड वेस्ट वाटर, नेशनल फ्रेमवर्क फॉर सेडीमेन्टेशन मैनेजमेंट और जल इतिहास सब पोर्टल की ई-लांचिंग की गई। साथ ही जल शक्ति अभियान ‘कैच द रेन’ पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी हुआ। मुख्यमंत्री ने वाटर विजन @2047 जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विचार-विमर्श के लिए भोपाल का चयन करने पर केंद्र शासन का आभार मानते हुए कहा कि भोपाल, जल-प्रबंधन का ऐतिहासिक रूप से अनूठा उदाहरण रहा है। राजा भोज द्वारा 10वीं शताब्दी में बनाई गई बड़ी झील आज भी भोपाल की एक तिहाई जनता को पेयजल की आपूर्ति कर रही है। प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 2 हजार जल संरचनाएं विद्यमान हैं। यह हम सब का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री का नेतृत्व हमें प्राप्त हुआ और जल-संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए भी हमें उनका मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

जल-जीवन मिशन में 50 हजार करोड़ रुपये के कार्य जारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा में नदी के दोनों ओर पौधारोपण को अभियान के रूप में लिया गया। प्रदेश में जल-जीवन मिशन में 50 हजार करोड़ रुपये के कार्य चल रहे हैं, इससे 46% घरों को नल से जल उपलब्ध कराना संभव होगा। सभी पहलुओं को सम्मिलित करते हुए प्रदेश में अगले एक-दो माह में जल नीति लाई जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेड़ और पानी का चोली दामन का साथ है। मैंने स्वयं प्रतिदिन पौधे लगाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प के अनुसार मैं प्रतिदिन तीन पौधे लगाता हूं। मुख्यमंत्री ने वाटर विजन@2047 में आए सभी प्रतिभागियों को 6 जनवरी को पौधारोपण के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह पौध-रोपण पूरे देश को जल-संरक्षण का संदेश देगा और वाटर विजन@2047 की स्मृतियों को अक्षुण्ण रखेगा।


केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोपाल में वाटर विजन@2047 के आयोजन की सहमति देने और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री चौहान का आभार माना। मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। हमारा देश विकसित देश बनने की ओर अग्रसर है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण की चुनौती को देखते हुए माइक्रो स्तर पर समग्र जल-प्रबंधन के लिए कार्य योजनाएं बनाना आवश्यक हैं। देश में जल की भण्डारण क्षमता को बढ़ाना भी आवश्यक है। यह छोटी संरचनाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करने और भू-गर्भीय जल-संरक्षण से संभव होगा।

दो दिवसीय आयोजन में पांच विषयों – जल की कमी- जल की अधिकता और पहाड़ी इलाकों में जल-संरक्षण, पानी का दोबारा इस्तेमाल, जल सुशासन, जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने में सक्षम जल अधो-संरचना और जल गुणवत्ता पर सत्र होंगे।


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