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: Ujjain: बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे प्रवासी भारतीय, बोले- ऐसा सम्मान मिला हम बार-बार उज्जैन आना चाहेंगे

News Desk / Wed, Jan 11, 2023


इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन में शामिल होने आए प्रवासी भारतीय बाबा महाकाल दर्शन के लिए लगातार उज्जैन पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार चार दिन में 400 प्रवासी भारतीय दर्शन लाभ ले चुके हैं। उनके भस्म आरती सहित अन्य दर्शन के लिए प्रशासक संदीप सोनी ने विशेष टीम बनाई है, जो तड़के तीन बजे से रात 10 बजे तक प्रवासी भारतीयों को दर्शन के अलावा महाकाल लोक भ्रमण में सहयोग दे रही है। सहायक प्रशासक आरके तिवारी के अनुसार अलग-अलग देशों से आए प्रवासी भारतीय अपने विचार भी साझा कर रहे हैं। रात को उन्हें महाकाल लोक में स्नेह भोज करवाकर अतिथि सत्कार किया गया। 

भूलेंगे नहीं मालवा का अतिथि-सत्कार
प्रवासी भारतीय अतिथि गण के सम्मान में श्री महाकाल लोक त्रिवेणी परिसर में मालवा के आतिथ्य स्वरूप भोज का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 400 अतिथि सम्मिलित हुए। सभी ने अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की व प्रवासी सम्मेलन के साथ उज्जैन श्री महाकाल लोक व श्री महाकालेश्वर मंदिर दर्शन के अनुभव को अलौकिक बताया। मंदिर समिति द्वारा सभी अतिथिगणों को दुपट्टा ओढ़ाकर, प्रसाद व भगवान श्री महाकाल की सुंदर तस्वीर भेंट की गई। 
 

कुवैत से आए लांबा, दर्शन कर अभिभूत 
कुवैत से पधारे प्रवासी कुलदीप सिंह लांबा ने भगवान श्री महाकाल के दर्शन किए। वह अपने परिवार के साथ भगवान श्री महाकाल के दर्शन के लिए आए थे। वह श्री महाकाल लोक की अनुभूतियों को अभिभूत हुए। उन्होंने कहा की अब हम बाबा महाकाल के दर्शन करने जरूर आएंगे।

यहां दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति हुई
मेलबॉर्न, ऑस्ट्रेलिया से आए व्यवसायी व प्रवासी भारतीय सुंदर अय्यर व जय शाह ने कहा श्री महाकाल लोक व श्री महाकालेश्वर मंदिर में आध्यात्मिक अनुभूति हुई। जैसा सुना था, उससे कहीं ज्यादा अच्छा यहां आकर महसूस हुआ।
 

बार-बार उज्जैन आएंगे, सत्कार व्यवस्था अच्छी रही
भूटान, थिम्पू से आए शिक्षाविद डॉ. डीके अरोरा जो 27 वर्षों से शैक्षणिक क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं, उन्होंने बताया कि वे आध्यात्मिक संवेदना व उपलब्धि के लिए बार-बार उज्जैन आना चाहेंगे। वहीं, जगन्नाथ मंदिर, लंदन, यू के से पधारे सुकांत साहू जो कि लंदन जगन्नाथ मंदिर के फाउंडर ट्रस्टी भी हैं उन्होंने भगवान श्री महाकाल के दर्शन व श्री महाकाल लोक भ्रमण के बाद अपनी भावनायें व्यक्त की और कहा कि इंदौर-उज्जैन आकर ऐसा लगा कि हम हमारे परिवार के किसी समारोह में आएं हों। हिंदुस्तान, सनातन धर्म के साथ ही हमने "अतिथि-देवो-भव" को जिया है,  शब्द कम पड़ रहे हैं हमारे उद्गार के लिए।
 


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