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: MP News: चार साल पहले खो गया था बच्चा, आधार कार्ड की तकनीकी ने परिवार से मिला दिया

News Desk / Sat, Jan 7, 2023


आधार कार्ड के जरिए परिजनों से मिला बच्चा

आधार कार्ड के जरिए परिजनों से मिला बच्चा - फोटो : अमर उजाला

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आधार कार्ड के कई फायदे हैं, किसी व्यक्ति की यूनिक पहचान से लेकर शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में आधार कार्ड ही उपयोग में आता है। लेकिन आजकल इससे गुमशुदा को मिलाने का काम भी हो रहा है। हम कह सकते हैं कि यह केवल एक कार्ड ही नहीं है, बल्कि एक ऐसा डॉक्यूमेंट बन चुका है, जिसके जरिए आप कहीं भी हों, आपकी पहचान कभी भी खत्म नहीं हो सकती। यहां हम आपको आधार कार्ड के मानवीय पक्ष से जुड़ी एक वास्तविक कहानी बताएंगे।

सतना जिले में आधार कार्ड, चार साल से बिछड़े एक दिव्यांग बच्चे को अपने परिजनों से मिलाने में बहुत बड़ा आधार बना। दरअसल, परिवार से बिछड़कर सतना पहुंचे मानसिक दिव्यांग ऋषभ को आधार कार्ड ने उसके परिवार से दोबारा मिलवा दिया। बीते चार साल से बाल कल्याण समिति रीवा में फिर एक साल बाद ऋषभ इंदौर शिफ्ट हो गया था। यह बच्चा चार साल पहले उमरिया जिले के पथरहटा गांव से गुमशुदा हो गया था। ऋषभ कुछ महीने बाद सतना स्टेशन पर मिला, लेकिन मूक-बधिर ऋषभ कुछ बोल नहीं पा रहा था। सतना जीआरपी पुलिस ने जांच पड़ताल की, लेकिन किशोर का कुछ पता नहीं चला तो उसे रीवा बालगृह पहुंचाया, जहां उसकी देखरेख की गई।

उमरिया कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज...
ऋषभ के परिजन उमरिया कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज करवाए थे और अपने स्तर पर हर जगह तलाश की थी, मगर कोई सुराग नहीं मिला। परिजन हताश होकर घर के चिराग के मिलने की उम्मीद छोड़ दिए थे। लेकिन अचानक एक फोन ने उनकी उम्मीद को जिंदाकर दिया। 15 दिन के इंतजार के बाद घर का चिराग उन्हें मिल भी गया। ये सब फिंगरप्रिंट की मदद से हुआ।

दरअसल ऋषभ जब सात साल का था, तब परिजनों ने ऋषभ का आधार कार्ड बनवाया था। कंप्यूटर मेमोरी में ऋषभ का फिंगर प्रिंट सेव था। इंदौर में ऋषभ का बाल कल्याण समिति ने आधार कार्ड बनाने की कोशिश की, मगर फिंगर प्रिंट ऍसेप्ट नहीं हो रहा था। फिर अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर जब फिंगर प्रिंट का मिलान किया गया तो किशोर ऋषभ का फिंगर प्रिंट सात साल पहले आधार कार्ड से मिलान हुया। नाम पता और पिता का नाम की जानकारी हुई।

आधार कार्ड मोबाइल नंबर में किया गया संपर्क...
आधार कार्ड में लिखा मोबाइल नंबर से जब संपर्क किया गया, तब इस बात का खुलासा हुया की चार साल पहले ऋषभ गुम हो चुका था। कानूनी कार्रवाई के बाद ऋषभ को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। ऋषभ भी परिजनों को देख खिलखिला उठा और परिजनों के आखों में खुशी के आंसू निकल पड़े। सतना बाल कल्याण समिति ने एक कार्यक्रम आयोजित कर ऋषभ को परिजनों को सौंप दिया। ऋषभ के परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। टीम को साधुवाद दी। वहीं, बाल कल्याण समिति के सदस्य भी खुश नजर आए और एक मूक बधिर किशोर को उसके परिजनों को सौंपकर गर्व महसूस किए।

विस्तार

आधार कार्ड के कई फायदे हैं, किसी व्यक्ति की यूनिक पहचान से लेकर शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में आधार कार्ड ही उपयोग में आता है। लेकिन आजकल इससे गुमशुदा को मिलाने का काम भी हो रहा है। हम कह सकते हैं कि यह केवल एक कार्ड ही नहीं है, बल्कि एक ऐसा डॉक्यूमेंट बन चुका है, जिसके जरिए आप कहीं भी हों, आपकी पहचान कभी भी खत्म नहीं हो सकती। यहां हम आपको आधार कार्ड के मानवीय पक्ष से जुड़ी एक वास्तविक कहानी बताएंगे।

सतना जिले में आधार कार्ड, चार साल से बिछड़े एक दिव्यांग बच्चे को अपने परिजनों से मिलाने में बहुत बड़ा आधार बना। दरअसल, परिवार से बिछड़कर सतना पहुंचे मानसिक दिव्यांग ऋषभ को आधार कार्ड ने उसके परिवार से दोबारा मिलवा दिया। बीते चार साल से बाल कल्याण समिति रीवा में फिर एक साल बाद ऋषभ इंदौर शिफ्ट हो गया था। यह बच्चा चार साल पहले उमरिया जिले के पथरहटा गांव से गुमशुदा हो गया था। ऋषभ कुछ महीने बाद सतना स्टेशन पर मिला, लेकिन मूक-बधिर ऋषभ कुछ बोल नहीं पा रहा था। सतना जीआरपी पुलिस ने जांच पड़ताल की, लेकिन किशोर का कुछ पता नहीं चला तो उसे रीवा बालगृह पहुंचाया, जहां उसकी देखरेख की गई।

उमरिया कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज...
ऋषभ के परिजन उमरिया कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज करवाए थे और अपने स्तर पर हर जगह तलाश की थी, मगर कोई सुराग नहीं मिला। परिजन हताश होकर घर के चिराग के मिलने की उम्मीद छोड़ दिए थे। लेकिन अचानक एक फोन ने उनकी उम्मीद को जिंदाकर दिया। 15 दिन के इंतजार के बाद घर का चिराग उन्हें मिल भी गया। ये सब फिंगरप्रिंट की मदद से हुआ।

दरअसल ऋषभ जब सात साल का था, तब परिजनों ने ऋषभ का आधार कार्ड बनवाया था। कंप्यूटर मेमोरी में ऋषभ का फिंगर प्रिंट सेव था। इंदौर में ऋषभ का बाल कल्याण समिति ने आधार कार्ड बनाने की कोशिश की, मगर फिंगर प्रिंट ऍसेप्ट नहीं हो रहा था। फिर अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर जब फिंगर प्रिंट का मिलान किया गया तो किशोर ऋषभ का फिंगर प्रिंट सात साल पहले आधार कार्ड से मिलान हुया। नाम पता और पिता का नाम की जानकारी हुई।


आधार कार्ड मोबाइल नंबर में किया गया संपर्क...
आधार कार्ड में लिखा मोबाइल नंबर से जब संपर्क किया गया, तब इस बात का खुलासा हुया की चार साल पहले ऋषभ गुम हो चुका था। कानूनी कार्रवाई के बाद ऋषभ को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। ऋषभ भी परिजनों को देख खिलखिला उठा और परिजनों के आखों में खुशी के आंसू निकल पड़े। सतना बाल कल्याण समिति ने एक कार्यक्रम आयोजित कर ऋषभ को परिजनों को सौंप दिया। ऋषभ के परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। टीम को साधुवाद दी। वहीं, बाल कल्याण समिति के सदस्य भी खुश नजर आए और एक मूक बधिर किशोर को उसके परिजनों को सौंपकर गर्व महसूस किए।

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