Logo
Breaking News Exclusive
महाकाल में क्या चिता की भस्म चढ़ती है, रात में नेता क्यों नहीं रुकते, क्या कुर्सी चली जाती है; जानिए सच्चाई ? तारापीठ में होटल धधका, 7 लोग जिंदा जले, मां और 2 बच्चों समेत कई लापता नागचंद्रेश्वर मंदिर दर्शन के लिए भीड़, 13 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ी; अस्पताल में भर्ती Ashok Dham Temple में भगदड़, 7 महिलाओं की मौत; 23 से ज्यादा घायल, 3 की हालत नाजुक MP के NCC कैंप में सोलो सिंगिंग में पहला स्थान, 17+ वाद्य यंत्रों के उस्ताद; पढ़िए देवभोग के बेटे की कहानी ? गरियाबंद में 22 में 11 सड़कों में दरारें, गाड़ियां चलना मुश्किल; क्या रायपुर से लिखी गई करप्शन की स्क्रिप्ट ? गरियाबंद में झोपड़ी में आंगनबाड़ी, 209 किराए में, 81 जुगाड़ में चल रहे, कमर तक बाढ़ पार कर रहे मासूम जेल में बंद भाई से मिलने जा रहा था; 120 की स्पीड में कार 7 फीट उछली, दम तोड़ने से पहले बोला- मुझे बचा लो... बेटे ने मां को दिए थे पैसे, मांगने पर मना किया तो पति ने लात-घूसों से तोड़ी तिल्ली; गिरफ्तार SI, ASI स्टेनो और पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा में झंडे गाड़े, लेकिन MBBS सीट नहीं मिला, पढ़िए शहडोल संभाग के शुभांगी की कहा महाकाल में क्या चिता की भस्म चढ़ती है, रात में नेता क्यों नहीं रुकते, क्या कुर्सी चली जाती है; जानिए सच्चाई ? तारापीठ में होटल धधका, 7 लोग जिंदा जले, मां और 2 बच्चों समेत कई लापता नागचंद्रेश्वर मंदिर दर्शन के लिए भीड़, 13 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ी; अस्पताल में भर्ती Ashok Dham Temple में भगदड़, 7 महिलाओं की मौत; 23 से ज्यादा घायल, 3 की हालत नाजुक MP के NCC कैंप में सोलो सिंगिंग में पहला स्थान, 17+ वाद्य यंत्रों के उस्ताद; पढ़िए देवभोग के बेटे की कहानी ? गरियाबंद में 22 में 11 सड़कों में दरारें, गाड़ियां चलना मुश्किल; क्या रायपुर से लिखी गई करप्शन की स्क्रिप्ट ? गरियाबंद में झोपड़ी में आंगनबाड़ी, 209 किराए में, 81 जुगाड़ में चल रहे, कमर तक बाढ़ पार कर रहे मासूम जेल में बंद भाई से मिलने जा रहा था; 120 की स्पीड में कार 7 फीट उछली, दम तोड़ने से पहले बोला- मुझे बचा लो... बेटे ने मां को दिए थे पैसे, मांगने पर मना किया तो पति ने लात-घूसों से तोड़ी तिल्ली; गिरफ्तार SI, ASI स्टेनो और पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा में झंडे गाड़े, लेकिन MBBS सीट नहीं मिला, पढ़िए शहडोल संभाग के शुभांगी की कहा

: Holi 2023: मध्यप्रदेश के इस जिले में बंदूक की गोली से होता है होलिका दहन, जानिए क्या है इस परंपरा का राज

News Desk / Mon, Mar 6, 2023


सिरोंज में सोमवार को होलिका दहन किया गया।

सिरोंज में सोमवार को होलिका दहन किया गया। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश में हर तीज त्यौहार से जुड़ी अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। होली का पर्व पूरे प्रदेश में काफी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। प्रदेश के कई जिलों में होली मनाने की अलग-अलग परंपराएं आज भी जारी हैं। ऐसी ही एक परंपरा विदिशा जिले के सिरोंज में होलकर शासन के समय से चली आ रही है। प्रदेश के अन्य स्थानों पर भले ही होलिका दहन माचिस या मशाल से किया जाता हो लेकिन सिरोंज में होलिका दहन बंदूक की गोली से किया जाता है। सदियों पुरानी इस परंपरा का निर्वहन इस बार भी किया गया। सोमवार रात एक बजे मुहूर्त अनुसार इस बार होलिका दहन किया गया।

सिरोंज में सबसे पुरानी और बड़ी होली पचकुंइया हनुमान मंदिर के पास जलाई जाती है। इस होली का दहन माचिस से नहीं बंदूक से होता है। होलिका दहन के पहले होली की पूजा पं. नलिनीकांत शर्मा द्वारा करवाई जाती है। होली सजाकर उसके पास घास का ढेर रखा जाता है, फिर उसी घास के ढेर को निशाना बनाकर बंदूक से गोली दागी जाती है। घास में चिंगारी लगते ही, तत्काल वह आग सामने सजी होली में डाली जाती है। होली के जलते ही उल्लास उमड़ पड़ता है। इसी होली की आग से शहर की अन्य होली और घर-घर में जलाई जाने वाली होली की आग भी सुलगती है।

ये है बंदूक से होलिका दहन करने का कारण
जानकारों के अनुसार करीब 150 साल पहले सिरोंज में रावजी की हवेली के पीछे मुन्नू भैया की हवेली थी। इसे 52 चौक की हवेली कहा जाता था। यहां कानूनगो रहा करते थे, जिनका ओहदा तहसीलदार के बराबर माना जाता था। ये कानूनगो मुन्नू भैया के नाम से जाने जाते थे। टोंक रियासत का दौर था। कानूनगो मुन्नू भैया के समय ही एक बार यहां टोंक रियासत के नवाब ने होलिका दहन पर बंदिश लगा दी थी। इससे हिन्दुओं की भावनाएं आहत हुई थीं, लेकिन कोई कुछ नहीं कर पा रहा था।

अंदर ही अंदर सब कसमसा रहे थे कि सांकेतिक ही सही होली तो जलना चाहिए, इसलिए कुछ सनातनी लोगों ने योजना बनाई। चुपके से लकड़ी-कंडों का ढेर लगाकर उसे सूखी घास के गट्ठों से ढंक दिया गया। ऊपर से यह ढेर घास का था। योजनाबद्ध तरीके से धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करने होलिका दहन की रात माथुर परिवार के सदस्यों ने इसी ढेर पर बंदूक चला दी, जिससे होली जल उठी। इसके बाद त्योहार की रस्म पूरी हुई, तभी से यहां होलिका दहन बंदूक से करने की परंपरा चल पड़ी।


वर्तमान में भी कानूनगो माथुर परिवार इस परंपरा का निर्वहन कर रहा है। इस परिवार के वंशज महेश माथुर ने एक कथा भी इस संदर्भ में बताई। उन्होंने कहा कि जब सिरोंज में नवाबी शासन आया, तो इस परंपरा पर रोक लगाने का प्रयास किया। तब होली के चबूतरे पर घास का एक ढेर (गंज) लगा दिया। जिस पर उनके पूर्वजों ने बंदूक से फायर कर होली जला दी थी। उसके बाद पीढ़ी दर पीढ़ी यह परंपरा चली आ रही है।
 

Source link

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन